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दुबला-पतला शरीर है, तो भी न रहें बेफिक्र; नॉर्मल वजन के बावजूद युवा हो रहे 'डायबिटीज' के शिकार

Published: Thu, 25 Jun 2026 09:57 AM (IST)

क्या आप जानते हैं कि दुबले शरीर का यह मतलब नहीं है कि आपको शुगर नहीं हो सकती। जी हां, भारतीयों में तेजी से पैर पसार रही है 'लीन डायबिटीज'।

दुबले-पतले लोग भी हो रहे डायबिटीज के शिकार (Image Source: AI-Generated)

दुबले-पतले लोग भी हो रहे डायबिटीज के शिकार (Image Source: AI-Generated)

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विशाल श्रेष्ठ, कोलकाता। कोलकाता के गरियाहाट इलाके के रहने वाले शांतनु बोस अपने दुबले-पतले शरीर के कारण वर्षों इस मुगालते में रहे कि उन्हें मधुमेह नहीं हो सकता। दो साल पहले बीमार पड़ने पर रक्त परीक्षण करवाया तो मधुमेह का पता चला। हावड़ा के शंकर सिंह का भ्रम भी इसी तरह टूटा।

आमतौर पर मोटापे को मधुमेह (टाइप-2) के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है, लेकिन विभिन्न अध्ययनों में सामने आया है कि दुबली-पतली काया व सामान्य अथवा उससे कम वजन वाले भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

,Type 2 diabetes India

(Image Source: AI-Generated)

भारत में क्यों बढ़ रहे हैं 'लीन डायबिटीज' के मामले?

दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों, विशेषकर भारत में ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मधुमेह विशेषज्ञ बताते हैं कि ‘लीन डायबिटीज’ मधुमेह (टाइप-2) का ही एक प्रकार है। यह ऐसी शारीरिक स्थिति है, जिसमें कोलेस्ट्राल व वजन सामान्य अथवा उससे कम रहता है, फिर भी मधुमेह हो जाता है। कोलकाता स्थित एनआरएस मेडिकल कालेज के सहायक प्रोफेसर व जाने-माने मधुमेह चिकित्सक डॉ. सौमिक गोस्वामी ने कहा, लीन डायबिटीज के मामलों में शरीर दुबला-पतला होता है लेकिन अंदरुनी फैट अधिक होता है, खासकर लिवर और पेट के आसपास। इस कारण शरीर में 'थिन-फैट फेनोटाइप' बनता है, जिससे इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ता है और मेटाबोलिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यही मधुमेह का कारण बनते हैं।

आइक्यू सिटी मेडिकल कालेच के प्रोफेसर डॉक्टर राकेश कुमार कहते हैं, देश में वर्तमान में मधुमेह (टाइप-2) के करीब 10 करोड़ मरीज हैं, जिनमें 30 प्रतिशत लीन डायबिटीज के मामले हैं। इनमें पुरूष की संख्या महिलाओं से थोड़ी अधिक है। 20-35 आयु वर्ग के लोग इसकी सबसे अधिक चपेट में आ रहे हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के नागरिकों के मामले में 18.5 से 22.99 को सामान्य बॉडी मास इंडेक्स माना गया है। बीएमआइ के इससे अधिक होने पर सामान्य से अधिक वजन व 25 के पार जाने पर मोटापे की स्थिति मानी जाती है। पश्चिमी देशों के विपरीत यहां की एक अच्छी-खासी आबादी में बीएमआइ सामान्य से कम रहने पर भी पेट के आसपास फैट व ब्लड शुगर, दोनों अधिक देखा जाता है।

दुबले लोगों में देर से पकड़ में आता है डायबिटीज

मधुमेह मरीजों के कल्याणार्थ वर्षों से काम करती आ रही संस्था डायबिटीज अवेयरनेस एंड यू (डे) के संस्थापक सचिव इंद्रजीत मजूमदार ने बताया कि लीन डायबिटीज के कई कारण हैं। कुपोषण एक प्रमुख कारण है। कई शोध बताते हैं कि बचपन में खराब पोषण से अग्न्याशय पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता, जिससे बाद में उसकी इंसुलिन बनाने की क्षमता कमजोर हो जाती है। शरीर में मांसपेशियां कम होना भी एक बड़ा कारण है। मांसपेशियां ग्लूकोज को इस्तेमाल करती हैं। जिन लोगों का मसल मास कम होता है, उनमें इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ सकता है। इसके अलावा आनुवंशिक कारण भी हैं। कम वजन के साथ पैदा हुए बच्चों के भी लीन डायबिटीज से ग्रसित होने की आशंका रहती है। दुबले-पतले लोगों में मधुमेह देर से पकड़ में आता है क्योंकि वे इसकी आशंका कम मानकर चलते हैं। इससे जांच भी देर से होती है। व्यायाम ऐसे मरीजों के लिए प्रभावी हो सकता है।

दक्षिण और पूर्व के राज्य सबसे प्रभावित

  • भारत में लीन डायबिटीज का प्रभाव सबसे अधिक दक्षिण और पूर्व के राज्यों में है।
  • तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, बंगाल व ओडिशा में ऐसे मरीज अधिक देखे जा रहे हैं।

सामान्य BMI के बावजूद डायबिटीज का हाई रिस्क

मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के 2025 के अध्ययन में 3.98 लाख से अधिक मधुमेह (टाइप-2) मरीजों में 1.5 प्रतिशत लीन डायबिटीज के मामले पाए गए। दक्षिण एशिया में लीन डायबिटीज के सबसे अधिक मामले भारत, बांग्लादेश व श्रीलंका में देखे जा रहे हैं, हालांकि इसे 25 बीएमआइ से कम वाले मधुमेह मरीजों के रूप में मापा गया है।

विभिन्न अध्ययनों में भारत में नए मधुमेह मरीजों में 30-50 प्रतिशत तक सामान्य या कम वजन वाले पाए गए। बांग्लादेश में युवा मधुमेह मरीजों में लीन डायबिटीज के मामले यूरोपीय आबादी की तुलना में लगभग दोगुना दर्ज हुए हैं। श्रीलंका में भी सामान्य बीएमआइ के बावजूद मधुमेह की दर बहुत ऊंची है। 2025 में प्रकाशित एंडोटेक्स्ट की समीक्षा के अनुसार भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका व इंडोनेशिया में मधुमेह के 40 प्रतिशत से अधिक मरीजों का बीएमआई 25 से कम पाया गया है।

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