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    पैंक्रियाज का फैट छीन सकता है आपकी सोचने-समझने की शक्ति, नई रिसर्च में दावा

    Updated: Mon, 09 Feb 2026 08:18 AM (IST)

    क्या आप जानते हैं कि मोटापे का आपके दिमाग पर कैसा असर पड़ता है? एक नए अध्ययन ने इस बारे में बड़ा खुलासा किया है। अब तक हम यही समझते थे कि शरीर में ज्याद ...और पढ़ें

    शरीर के इस अंग में जमा फैट है आपके ब्रेन का सबसे बड़ा दुश्मन (Image Source: AI-Generated)

    शरीर के इस अंग में जमा फैट है आपके ब्रेन का सबसे बड़ा दुश्मन (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. चर्बी की मात्रा नहीं, उसका स्थान दिमाग के लिए महत्वपूर्ण

    2. पैंक्रियाज का फैट दिमाग को समय से पहले बूढ़ा करता है

    3. 'स्किनी फैट' से भी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ता है

    प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या आप आईने में खुद को फिट देखकर खुश होते हैं और सोचते हैं कि मोटापे से जुड़ी बीमारियां आपको नहीं छू सकतीं? अगर हां, तो सावधान हो जाइए! एक नई स्टडी ने साबित किया है कि सिर्फ वजन कम होना या दुबला दिखना ही दिमाग की सेहत की गारंटी नहीं है। वैज्ञानिक अब कह रहे हैं कि खतरा इस बात में नहीं है कि आपके शरीर में 'कितनी' चर्बी है, बल्कि असल खतरा इस बात में है कि वह चर्बी आपके शरीर में 'छिपी' कहां है।

    How pancreatic fat affects the brain

    (Image Source: Freepik)

    पैंक्रियाज का फैट है सबसे खतरनाक

    अध्ययन के अनुसार, अगर आपके शरीर में फैट का स्टोरेज पैंक्रियाज पर है या आप 'स्किनी फैट' (दुबले दिखने पर भी शरीर में फैट होना) श्रेणी में आते हैं, तो यह चिंता का विषय है। इस प्रकार का फैट स्टोरेज आपके दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना सकता है। यह न केवल आपकी सोचने-समझने की शक्ति को कम करता है, बल्कि न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    चीन की 'जुझाउ मेडिकल यूनिवर्सिटी' के एफिलिएटेड हॉस्पिटल के एसोसिएट प्रोफेसर काई लियू ने इस शोध का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि पुराने अध्ययनों में केवल आंतरिक वसा के अनुपात पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन इस नई रिसर्च ने वसा जमा होने के अलग-अलग पैटर्न से जुड़े विशिष्ट जोखिमों को उजागर किया है।

    प्रोफेसर लियू की टीम ने शरीर के विभिन्न अंगों में वसा की सटीक मात्रा मापने के लिए एमआरआई तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे उन्हें एक डाटा-आधारित वर्गीकरण प्रणाली बनाने में मदद मिली, जो पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित है और इसमें किसी प्रकार के अनुमान की गुंजाइश नहीं है।

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    26,000 लोगों पर किया गया यह बड़ा शोध

    इस शोध की विश्वसनीयता को पुख्ता करने के लिए, वैज्ञानिकों ने यूके बायोबैंक के लगभग 26,000 व्यक्तियों के डाटा का विश्लेषण किया। इसमें प्रतिभागियों के मेडिकल रिकार्ड्स, शारीरिक माप, मेडिकल इमेजिंग, बीमारियों का इतिहास और उनकी जीवनशैली की आदतों को शामिल किया गया था।

    दिमाग का 'ग्रे मैटर' सिकुड़ने का खतरा

    विश्लेषण में साफ तौर पर पाया गया कि जिन लोगों के शरीर में अग्न्याशय प्रधान वसा और 'स्किनी फैट' वाले पैटर्न थे, उन्हें न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यह वसा वितरण मुख्य रूप से दिमाग के 'ग्रे मैटर' के सिकुड़ने, दिमाग की उम्र तेजी से बढ़ने और मानसिक गिरावट से जुड़ा हुआ है।

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