गलत समय पर खाने से 'कन्फ्यूज' हो रहा है आपका लिवर, रिसर्च में हुआ मोटापे की वजह का खुलासा
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो भूख लगने पर नहीं, बल्कि काम से फुर्सत मिलने पर खाना खाते हैं? अगर हां, तो यह आर्टिकल आपको चौंका सकता है। दरअसल, एक न ...और पढ़ें

बेसमय खाना कहीं बिगाड़ न दे आपके शरीर की इंटरनल क्लॉक (Image Source: Freepik)
HighLights
लिवर समय के हिसाब से प्रोटीन छोड़ता है, न कि लगातार एक जैसा
बेसमय खाने से लिवर की यह प्राकृतिक लय बिगड़ जाती है
लिवर का चक्र बिगड़ने से मोटापे जैसी समस्याएं हो सकती हैं
प्रेट्र, नई दिल्ली। हम सभी बचपन से सुनते आ रहे हैं कि अनियमित खानपान और खराब दिनचर्या हमारी सेहत के लिए ठीक नहीं है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बेसमय भोजन करने की आदत आपके शरीर की इंटरनल क्लॉक को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है? हाल ही में हुए एक शोध में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि खाने का गलत समय सीधे तौर पर हमारे लिवर की फंक्शनिंग में बाधा डालता है।

(Image Source: AI-Generated)
लिवर की क्लॉक और प्रोटीन का साइकिल
ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड विश्वविद्यालय की शोधकर्ता मेल्टेम वेगर ने इस अध्ययन में एक बहुत महत्वपूर्ण बात बताई है। उन्होंने कहा कि हमारे लिवर की अपनी खुद की एक 'बॉडी क्लॉक' होती है। लिवर हमारे खून में प्रवाहित होने वाले अधिकांश प्रमुख प्रोटीनों का उत्पादन करता है। पहले यह माना जाता था कि लिवर एक समान गति से प्रोटीन छोड़ता है, लेकिन इस नए शोध ने इस विचार को चुनौती दी है। शोध के अनुसार, लिवर 24 घंटे की एक लय में काम करता है और उसी के अनुसार शरीर में प्रोटीन छोड़ता है।
शिफ्ट में काम करना और अनियमित भोजन
'नेचर मेटाबोलिज्म' जर्नल में प्रकाशित इस शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि जो लोग शिफ्ट में काम करते हैं या जिनका खाने का कोई निश्चित समय नहीं होता, उनके लिवर का कार्य प्रभावित होता है। अनियमित खानपान की आदतें लिवर की 'सर्केडियन लय' को बाधित कर देती हैं। चूंकि लिवर शरीर की घड़ी के हिसाब से ही प्रोटीन रिलीज करता है, इसलिए खाने में अनियमितता आने पर इस पूरी प्रक्रिया में रुकावट आ जाती है।
मोटापे और बीमारियों का खतरा
शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि लिवर की इस 24 घंटे की लय का टूटना हमारी सेहत के लिए गंभीर हो सकता है। जब लिवर के प्रोटीन छोड़ने के चक्र में व्यवधान आता है, तो यह मोटापे जैसी पुरानी कंडीशन्स से जुड़ जाता है। यह अध्ययन लिवर की क्लॉक और मोटापे के बीच के संबंध को समझने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
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यह अपनी तरह का पहला ऐसा अध्ययन है जो बताता है कि मॉलिक्यूलर लेवल पर यह लय कैसे काम करती है। इससे हमें यह समझने में आसानी होगी कि हमारी रोजमर्रा की दिनचर्या और खाने की आदतें हमारे शरीर के अंदरूनी तंत्र को कैसे प्रभावित करती हैं।