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    बचपन का जंक फूड बदल देता है दिमाग की बनावट, बड़े होकर हेल्दी खाने से भी नहीं होती पूरी भरपाई

    Updated: Sun, 24 May 2026 10:49 AM (IST)

    बचपन में जंक फूड का अधिक सेवन दिमाग की संरचना को स्थायी रूप से बदल सकता है, जिससे याददाश्त और खाने की आदतें प्रभावित होती हैं। ...और पढ़ें

    बचपन में खाए जंक फूड से बदल सकती है मस्तिष्क की संरचना (Image Source: AI-Generated)

    बचपन में खाए जंक फूड से बदल सकती है मस्तिष्क की संरचना (Image Source: AI-Generated) 

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    एएनआई, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि बचपन का खान-पान हमारे दिमाग पर कितना गहरा असर डालता है? हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध में बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। अगर बचपन में बहुत अधिक मात्रा में जंक फूड खाया जाए, तो यह दिमाग की बनावट यानी संरचना में हमेशा के लिए बदलाव ला सकता है। सबसे हैरानी की बात यह है कि अगर आप बड़े होकर एकदम स्वस्थ आहार अपना भी लें, तब भी दिमाग पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाता। आइए, इस महत्त्वपूर्ण शोध के बारे में विस्तार से जानते हैं।

    बाद में सेहतमंद खाना भी नहीं कर पाता पूरी भरपाई

    'नेचर कम्युनिकेशंस' में प्रकाशित यूनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क के एक अध्ययन के अनुसार, नियमित रूप से ज्यादा फैट और हाई शुगर वाला खाना खाने वाले बच्चों के दिमाग में स्थायी परिवर्तन हो सकते हैं। विज्ञानियों ने पाया कि जब बचपन में बिना पोषक तत्वों वाला भोजन ज्यादा खाया जाता है, तो यह हमारी आगे की खाने-पीने की आदतों को हमेशा के लिए बदल देता है। यह दिमाग के उन हिस्सों को प्रभावित करता है जो हमारी भूख को नियंत्रित करते हैं।

    याददाश्त और एकाग्रता पर पड़ता है बुरा असर

    जंक फूड सिर्फ हमारे शरीर का वजन ही नहीं बढ़ाता, बल्कि यह हमारे दिमाग की कार्यक्षमता को भी धीमा करता है। शोध में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जंक फूड का अधिक सेवन इंसान की याददाश्त, किसी काम पर ध्यान लगाने की क्षमता और कुछ भी नया सीखने की क्षमता को कम कर देता है।

    चूहों पर हुए शोध से खुला यह राज

    इस नतीजे तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने चूहों पर एक अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि:

    • जिन जानवरों को उनके जीवन के शुरुआती दौर में ज्यादा फैट और चीनी वाला खाना दिया गया, उनके बड़े होने पर खाने-पीने के तरीके में स्थायी बदलाव आ गए।
    • वैज्ञानिकों ने इस बदलाव का सीधा कनेक्शन दिमाग के 'हाइपोथैलेमस' हिस्से में होने वाली गड़बड़ी से जोड़ा।
    • आपको बता दें कि हाइपोथैलेमस ही दिमाग का वह जरूरी हिस्सा है, जो हमारी भूख और शरीर के ऊर्जा संतुलन को कंट्रोल करता है।

    क्या इसका कोई बचाव है?

    हालांकि जंक फूड से होने वाला नुकसान स्थायी हो सकता है, लेकिन विज्ञानियों ने एक राहत की बात भी बताई है। शोध के अनुसार, कुछ फायदेमंद आंत के बैक्टीरिया और 'प्रीबायोटिक फाइबर' के इस्तेमाल से इन बुरे प्रभावों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

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    इस अध्ययन की लेखिका डॉ. क्रिस्टीना कुएस्टा-मार्टी ने इस शोध का निचोड़ बताते हुए कहा है, "हमारे निष्कर्ष यह साफ बताते हैं कि जीवन के शुरुआती दौर में हम जो भी खाते हैं, वह वास्तव में बहुत मायने रखता है।"

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