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लाख कोशिशों के बाद भी कम नहीं हो रहा वजन? कहीं आप इंसुलिन रेजिस्टेंस के शिकार तो नहीं, ऐसे पहचानें

Published: Mon, 08 Jun 2026 03:49 PM (GMT+05:30)

बिगड़ती लाइफस्टाइल और डाइट के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस एक आम समस्या बनती जा रही है। यह डायबिटीज और गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षणों को कैसे पहचानें? (Picture Courtesy: Freepik)

इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षणों को कैसे पहचानें? (Picture Courtesy: Freepik)

HighLights

  1. इंसुलिन रेजिस्टेंस डायबिटीज की वजह बन सकता है

  2. इस कंडीशन में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है

  3. खराब लाइफस्टाइल और डाइट इसकी बड़ी वजह हैं

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में लाइफस्टाइल और खान-पान की आदतें बदलने के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस एक बेहद आम समस्या बनती जा रही है। यह एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें सेल्स इंसुलिन हार्मोन का ठीक से इस्तेमाल करना बंद कर देते हैं। 

इस वजह से ब्लड शुगर बढ़ने लगता है और अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह टाइप-2 डायबिटीज और दूसरी गंभीर बीमारियों की वजह भी बन सकता है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि आप इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षणों को पहचानकर इसे ठीक भी कर सकते हैं। इस बारे में क्लीनिकल डाइटिशियन उर्वी गोहिल ने कुछ टिप्स शेयर किए हैं। आइए जानें इनके बारे में।

इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षण कैसे होते हैं?

कई बार लोग इंसुलिन रेजिस्टेंस के लक्षणों को मामूली थकान या बढ़ता वजन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इन्हें समय रहते पहचानना जरूरी है-

  • पेट की चर्बी- वजन बढ़ना, खासकर पेट के निचले हिस्से के आसपास चर्बी का लगातार जमा होना इसका एक बड़ा संकेत है।
  • वजन घटाने में मुश्किल- लाख कोशिशों, डाइटिंग और एक्सरसाइज के बाद भी अगर आपका वजन कम नहीं हो रहा है, तो यह भी इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है।
  • फैटी लिवर- लिवर में एक्स्ट्रा फैट का जमा होना।
  • PCOS- महिलाओं में हार्मोनल इंबैलेंस के कारण पीरियड्स का अनियमित होना और ओवरी में सिस्ट बनना।
  • गर्दन और बगल का काला पड़ना- त्वचा पर, खासकर गर्दन के पीछे और बगल की त्वचा का काला और वेलवेटी होना।
  • ब्रेन फॉग- किसी काम में ध्यान लगाने में कमी या भूलने की बीमारी महसूस होना।
  • लगातार भूख और मीठे की तलब- खाना खाने के तुरंत बाद भी कुछ मीठा खाने की तेज इच्छा होना और बार-बार भूख महसूस होना
  • एनर्जी क्रैश- खाना खाने के बाद शरीर में अचानक सुस्ती आना या एनर्जी का स्तर अचानक कम होना।
  • हाई ट्राइग्लिसराइड्स- ब्लड टेस्ट में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ा हुआ आना।
 

इंसुलिन रेजिस्टेंस को सुधारने के लिए क्या करें?

  • नाश्ते में प्रोटीन शामिल करें- अपने दिन की शुरुआत प्रोटीन से भरपूर नाश्ते के साथ करें। यह आपके ब्लड शुगर को संतुलित रखता है।
  • सिर्फ कार्ब्स खाने से बचें- ऐसा खाना खाने से बचें जिसमें सिर्फ कार्बोहाइड्रेट हो। कार्ब्स के साथ हमेशा फाइबर, फैट या प्रोटीन जरूर लें।
  • मैदा और चीनी से दूरी बनाएं- मैदा और चीनी से बनी चीजों को जितना हो सके उतना कम खाएं।
  • लिक्विड कैलोरीज से परहेज- पैकेट बंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और मीठी चाय-कॉफी जैसी लिक्विड कैलोरीज कम से कम लें, क्योंकि ये सीधे ब्लड शुगर को बढ़ाती हैं।
  • खाने के बाद 10 मिनट टहलें- दोपहर या रात के खाने के तुरंत बाद कम से कम 10 मिनट की वॉक जरूर करें।
  • रात का खाना जल्दी खाएं- सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले अपना डिनर कर लें।
  • 12 घंटे की फास्टिंग- रात के खाने और अगले दिन के नाश्ते के बीच कम से कम 12 घंटे का अंतर रखें।
  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें- हफ्ते में 2 से 3 बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें, इससे मांसपेशियां इंसुलिन का बेहतर इस्तेमाल कर पाती हैं।
  • स्ट्रेस और स्लीप मैनेजमेंट- रोजाना 7-8 घंटे की गहरी नींद लें और तनाव को कम करने के लिए मेडिटेशन या प्राणायाम करें।