अगर फास्टिंग शुगर 94 है, तब भी आप हो सकते हैं डायबिटीज के शिकार! डॉक्टर ने समझाया कैसे
अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि सिर्फ फास्टिंग शुगर पर भरोसा करना डायबिटीज की पहचान में धोखा दे सकता है। ...और पढ़ें

क्या आपका 'नॉर्मल' ब्लड शुगर आपको धोखा दे रहा है? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। "आपका शुगर बिल्कुल नॉर्मल है।" - अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार कहते हैं कि मेडिकल के क्षेत्र में यह वाक्य सबसे ज्यादा भ्रामक और गुमराह करने वाला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि अक्सर हम सिर्फ एक टेस्ट के आधार पर यह मान लेते हैं कि हमें डायबिटीज नहीं है, लेकिन अंदर की सच्चाई इससे काफी अलग हो सकती है।

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डॉक्टर ने शेयर की 48 वर्षीय मरीज की कहानी
इस बात को समझाने के लिए डॉ. सुधीर कुमार ने एक 48 साल के मरीज का उदाहरण सामने रखा है। उनके मुताबिक, यह मरीज पिछले 6 महीनों से पैरों में जलन की शिकायत से परेशान था, जो रात के समय और भी ज्यादा बढ़ जाती थी। कई डॉक्टरों ने उनकी जांच की और उन्हें 'इडियोपैथिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी' (नसों की ऐसी बीमारी जिसका कारण पता न हो) बता दिया।
“Your sugar is normal.”
— Dr Sudhir Kumar MD DM (@hyderabaddoctor) March 20, 2026
This is one of the most misleading statements in medicine.
▶️A 48-year-old patient presented with burning feet for 6 months, which worsened during nights.
▶️He was evaluated by multiple doctors and given a diagnosis of “Idiopathic peripheral…
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनका फास्टिंग ब्लड शुगर 94 mg/dL था। इस एक नंबर को देखकर डॉक्टरों ने मान लिया कि उन्हें डायबिटीज नहीं है और इस बीमारी को खारिज कर दिया गया, लेकिन जब मरीज की गहराई से जांच की गई और 'HbA1c' टेस्ट कराया गया, तो परिणाम 7.1% निकला। असल में उस मरीज को डायबिटीज के कारण होने वाली नसों की बीमारी थी, जिसे Diabetic Neuropathy कहते हैं।
सिर्फ फास्टिंग शुगर पर भरोसा करना सबसे बड़ी गलती
डॉक्टर का कहना है कि इस मामले से एक बहुत बड़ी समस्या सामने आती है। हम फास्टिंग ब्लड शुगर पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने लगे हैं, जो कि बिल्कुल सही नहीं है:
- फास्टिंग शुगर केवल उस समय की स्थिति बताता है जब टेस्ट कराया गया हो। यह पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
- शरीर को शुरुआती नुकसान खाना खाने के बाद अचानक बढ़ने वाले शुगर से होता है।
- जो बातें फास्टिंग शुगर के टेस्ट में छिप जाती हैं, उन्हें HbA1c टेस्ट साफ तौर पर उजागर कर देता है।
कई मरीजों में खाली पेट शुगर 'नॉर्मल' होने के बावजूद, उनकी नसों को पहले से ही नुकसान पहुंच चुका होता है।
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एक कड़वा सच जो जानना जरूरी है
डॉक्टर का साफ कहना है कि यह बात थोड़ी विवादित लग सकती है, लेकिन सच है कि शुरुआती डायबिटीज की पहचान करने के लिए फास्टिंग ब्लड शुगर सबसे कम असरदार टेस्ट है। हकीकत तो यह है कि जब तक आपका फास्टिंग शुगर बढ़ना शुरू होता है, तब तक शरीर के अंदर नुकसान होना काफी पहले ही शुरू हो चुका होता है।
क्या है डॉक्टर की सलाह?
अगर किसी व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के नसों की समस्या हो रही है या ऐसे लक्षण दिख रहे हैं जिनका कारण समझ नहीं आ रहा है, तो उन्हें सिर्फ एक नंबर यानी फास्टिंग ब्लड शुगर के भरोसे नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में हमेशा HbA1c और खाना खाने के बाद का ब्लड शुगर भी जरूर चेक कराना चाहिए।