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    टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में बढ़ रहा है डिमेंशिया का खतरा, लैंसेट की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    Updated: Tue, 17 Mar 2026 08:06 AM (IST)

    द लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों में कमी आई है, लेकिन डिमेंशिया से मृत्यु दर तेजी से ब ...और पढ़ें

    टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए डिमेंशिया बेहद खतरनाक (Image Source: AI-Generated)

    टाइप-2 डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए डिमेंशिया बेहद खतरनाक (Image Source: AI-Generated) 

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    रॉयटर, नई दिल्ली। हाल ही में हुए एक बड़े वैज्ञानिक शोध ने टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए एक नई चिंताजनक स्थिति को उजागर किया है। एक तरफ जहां डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छी खबर है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़ा खतरा भी मंडरा रहा है।

    क्या कहता है नया शोध?

    मशहूर मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी' में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में अब दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों में कमी आ रही है, लेकिन चिंता का विषय यह है कि ऐसे मरीजों में 'डिमेंशिया' (मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी जिसमें याददाश्त कमजोर हो जाती है) से होने वाली मृत्यु दर में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है।

    Cognitive Decline

    (Image Source: AI-Generated) 

    नई दवाएं दिल के लिए तो ढाल हैं, पर दिमाग के लिए नहीं

    शोधकर्ताओं ने बताया कि आजकल ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए बाजार में कई नई और बेहतरीन दवाएं मौजूद हैं।

    • इन आधुनिक दवाओं में जीएलपी-1 (GLP-1) श्रेणी की दवाएं (जैसे एली लिली की टूलिसिटी या मौनजारो, और नोवो नार्डिस्क की विक्टोजा या ओजेपिंक) शामिल हैं।
    • इसके अलावा एसजीएलटी-2 (SGLT-2) श्रेणी की दवाएं (जैसे बोहिंगर इंगेलहाइम की जार्डियंस और एस्ट्राजेनेका की फारक्सिगा) भी काफी प्रभावी हैं।

    ये दवाएं शुगर को तो कंट्रोल करती ही हैं, साथ ही दिल को भी जबरदस्त सुरक्षा प्रदान करती हैं। आधुनिक इलाज और इन नई दवाओं की बदौलत डायबिटीज से होने वाली हृदय संबंधी समस्याओं को बहुत हद तक सुलझा लिया गया है, लेकिन समस्या यह है कि इन नई चिकित्सा पद्धतियों को इंसान के दिमाग की सुरक्षा को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है।

    27 लाख मरीजों पर हुआ अध्ययन

    इस शोध का दायरा बहुत बड़ा था। वैज्ञानिकों ने साल 2000 से लेकर 2023 के बीच, 10 अलग-अलग देशों के लगभग 27 लाख (2.7 मिलियन) टाइप-2 डायबिटीज मरीजों के आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण किया। इस अध्ययन में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि पिछले कुछ दशकों में डायबिटीज, कैंसर और दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों के ग्राफ में कुल मिलाकर भारी गिरावट आई है।

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    सावधानी ही है बचाव

    इन बीमारियों से राहत मिलने के बावजूद, आंकड़ों ने यह भी दिखाया कि डिमेंशिया और कुछ अन्य कारणों से होने वाली मौतों के अनुपात में वृद्धि हुई है। इस शोध से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को अब सिर्फ अपने ब्लड शुगर या दिल की चिंता नहीं करनी है, बल्कि अपने दिमागी स्वास्थ्य के प्रति भी पहले से ही अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

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