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    सावधान! कहीं आपको भी तो नहीं टाइप 1.5 डायबिटीज? जानें यह टाइप 1 और 2 से कैसे अलग है

    Updated: Sun, 22 Feb 2026 08:26 PM (IST)

    टाइप 1.5 डायबिटीज के सही मैनेजमेंट और उपचार के लिए इसके बारे में जानना बेहद जरूरी है। आमतौर पर यह एडल्ट्स में ही होता है और धीरे-धीरे टाइप 2 डायबिटीज ...और पढ़ें

    टाइप 1.5 डायबिटीज: क्या आप भी हैं इसके शिकार? जानें लक्षण और बचाव (Picture Credit- Freepik)

    टाइप 1.5 डायबिटीज: क्या आप भी हैं इसके शिकार? जानें लक्षण और बचाव (Picture Credit- Freepik)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। लेटेंट ऑटोइम्युन डायबिटीज इन एडल्ट्स को टाइप 1.5 डायबिटीज कहा जाता है। इसके बारे में लोगों में ज्यादा जानकारी ना होने की वजह से कई बार इसे टाइप 1 डायबिटीज मानने की गलती कर बैठते हैं।

    यही वजह है कि इसके इलाज में भी देरी होती जाती है और खतरा बढ़ता जाता है। इस आर्टिकल में हम डायबिटीज के इसी टाइप के बारे में जानेंगे।

    दोनों ही टाइप के नजर आते हैं लक्षण

    टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण टाइप 1 और टाइप 2 दोनों से ही मिलते-जुलते हैं। टाइप 1 की तरह यह ऑटोइम्युन रिएक्शन तो है लेकिन वयस्कों को ही होता है और टाइप 2 की तरह धीरे-धीरे बढ़ता है। यही वजह है कि इसे टाइप 2 डायबिटीज समझने की भूल हो जाती है।

    तुरंत नहीं चाहिए इंसुलिन

    चूंकि, टाइप 1.5 डायबिटीज धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए इसमें तुरंत ही इंसुलिन की जरूरत नहीं पड़ती है। ज्यादातर को पांच साल के अंदर इंसुलिन लेना पड़ता है, वहीं टाइप 1 में ज्यादातर शुरुआत से ही इंसुलिन देने की जरूरत पड़ती है। 30 साल से अधिक उम्र के लोगों में टाइप 1.5 डायबिटीज के मामले ज्यादा देखे जाते हैं, जोकि टाइप 1 होने की उम्र से काफी ज्यादा है लेकिन टाइप 2 से काफी कम।

    ये होते हैं कारण

    • शोधकर्ताओं का मानना है कि टाइप 1.5 डायबिटीज तब होता है जब पैनक्रियाज में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर एंटीबॉडीज गलती से हमला करना शुरू कर देते हैं।
    • इंसुलिन की गैरमौजूदगी में ग्लूकोज खून में जमा होने लगता है, जैसा कि टाइप 1 डायबिटीज में होता है।

    ये होते हैं लक्षण

    • ज्यादा प्यास लगना
    • अचानक वजन कम हो जाना
    • अत्यधिक थकान महसूस होना
    • बार-बार पेशाब लगना
    • भूख बढ़ जाना
    • आंखों में धुंधलापन
    • घाव ठीक होने में जरूरत से ज्यादा वक्त लगना
    • स्किन पर खुजली या ड्राइनेस होना

    ये हैं इलाज के ऑप्शन

    • टाइप 1.5 डायबिटीज आमतौर पर ओरल दवाओं की मदद से मैनेज किया जाता है।
    • यह बीमारी के नियंत्रण और दवाओं के इस्तेमाल पर निर्भर करता है। टाइप 1.5 डायबिटीज में दिन में कई बार दवाएं लेने की जरूरत होती है।
    • कुछ डॉक्टर तुरंत ही इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं और कुछ डॉक्टर तब तक इसे लेने की सलाह नहीं देते हैं जब तक कि जरूरी नहीं हैं।

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    Disclaimer: लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो, तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।