Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    डायबिटीज के लिए सिर्फ HbA1c टेस्ट पर निर्भर रहना हो सकता है गलत? AIIMS के डॉक्टर से जानें सच्चाई

    Updated: Wed, 25 Feb 2026 08:14 AM (IST)

    हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'द लॅसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया' के एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने डायबिटीज की जांच के लिए प्रचलित एचबीए1सी टेस्ट ...और पढ़ें

    क्या है डायबिटीज की जांच का सही तरीका? (Picture Courtesy: Freepik)

    क्या है डायबिटीज की जांच का सही तरीका? (Picture Courtesy: Freepik)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    सीमा झा, नई दिल्ली। क्या आप भी शुगर के लक्षण नजर आने के बाद एचबीए1सी जांच रिपोर्ट सामान्य रेंज से कम आने पर प्रसन्न हो जाते हैं। खानपान में सजगता नहीं  बरतते, मधुमेह को ध्यान में रखकर जीवनशैली में बदलाव नहीं कर पाते तो यह खतरनाक हो सकता है।

    इसके उलट सामान्य से अधिक जांच रिपोर्ट पर चिंतित होना भी सही नहीं, क्योंकि एचबीए1सी रिपोर्ट में यह उतार-चढ़ाव कई कारणों से हो सकता है। आइए इस बारे में जानें डॉ. राजेश खड़गावत (एंडोक्राइनोलाजिस्ट, एम्स, नई दिल्ली) से। 

    क्या हैं इसके कारण?

    इसमें सबसे महत्वपूर्ण कारक एनीमिया यानी रक्त लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य कम हो सकता है। इस जांच के बाद की जाने वाली समीक्षाओं में यह बताया गया है कि भारतीयों में हीमोग्लोबिन की ग्लाइकेशन प्रक्रिया यानी शुगर का मोग्लोबीन से जुड़ना अन्य से अलग हो सकता है यानी एचबीए1सी का बढ़ा हुआ स्तर उनका भी हो सकता है, जो वास्तव में मधुमेह के शिकार नहीं हैं। 

    बता दें कि एचबीए1सी जांच पर पूरी तरह निर्भर होने के दो बड़े नुकसान हो सकते हैं- पहला किसी स्वस्थ व्यक्ति को डायबिटिक मान लेने से उन्हें व्यर्थ दवाइयां दी जा सकती हैं, मानसिक तनाव हो सकता है। दूसरा, जो वास्तव में मरीज हैं उनका पता नहीं भी चल सकता है। यदि समय पर बीमारी पकड़ में न आए तो उसकी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। खासकर जो मधुमेह के टाइप- 2 के मरीज हैं उनके लिए कई तरह की जांच की जरूरत होती है। 

    एचबीए1सी जांच क्या कहती है 

    एचबीए । सी टेस्ट से पिछले कुछ महीनों में रक्त में शुगर स्तर औसतन कितना रहा है, इसका पता चलता है। आमतौर पर 6.5 प्रतिशत या उससे ज्यादा एचबीए । सो को डायबिटीज माना जाता है, पर आपके चिकित्सक केवल इस संख्या के आधार पर इलाज शुरू कर देते हैं तो यह सही नहीं है।

    खबरें और भी

    यह है समाधान

    एचबीए1सी जांच को पूरी तरह नहीं नकार सकते, पर योग्य चिकित्सक मधुमेह के निर्णय का आधार केवल इसी टेस्ट को नहीं मानते। वे आपसे फस्टिंग ब्लड शुगर व ओरल ग्लूकोज टालरेंस टेस्ट यानी ओजीटीटी जांच करवाने को कह सकते हैं। इसके साथ-साथ शुगर के कुछ विशेष लक्षण होते हैं, उनको भी विशेष रूप से ध्यान में रखा जाता है।

    यदि यह कहें कि शुगर की जांच केवल जांच में आने वाले नंबर के बजाय व्यक्ति की पूरी स्थिति को देखकर करनी चाहिए तो गलत नहीं। ऐसे में शुगर के लक्षण यानी भूख अधिक लगना, प्यास अधिक लगना, वजन कम होना या थकान आदि महसूस करें तो संपूर्ण जांच यानी फस्टिंग शुगर, आयरन, होमोग्लोबिन, लिपिड प्रोफाइल, किडनी जांच आदि के साथ चिकित्सक से मिलें ।