दिल्ली वालों सावधान! डरा रहे हैं डेंगू के बढ़ते केस, जानिए मच्छर के काटने के कितने दिन बाद दिखते हैं लक्षण
क्या आप दिल्ली में रहते हैं? अगर हां, तो मच्छरों से सावधान हो जाइए। हाल ही में एमसीडी की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके आंकड़े काफी डराने वाले हैं।

दिल्ली में अगस्त महीने में टूटे डेंगू के रिकॉर्ड (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के ताजा आंकड़े बताते हैं कि इस साल अगस्त में डेंगू के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं, जो जुलाई की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। अगर 29 अगस्त तक की बात करें, तो राजधानी में कुल 311 डेंगू, 119 मलेरिया और 22 चिकनगुनिया के केस सामने आ चुके हैं। बता दें, अप्रैल में भी डेंगू के 52 केस मिले थे। अच्छी खबर यह है कि अब तक इनमें से किसी भी बीमारी से कोई मौत नहीं हुई है।
इस बीच, एमसीडी मच्छरों पर लगाम लगाने के लिए तेजी से काम कर रही है। अब तक ढाई करोड़ से ज्यादा घरों का मुआयना किया गया, जिनमें से सवा लाख घरों में मच्छरों का लार्वा मिला। करीब पौने छह लाख घरों में दवा का छिड़काव किया गया है और 90 हजार से ज्यादा लोगों को कानूनी नोटिस भी थमाए गए हैं। आइए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि डेंगू कैसे फैलता है और क्या हैं इसके लक्षण।
क्या है डेंगू और इसके शुरुआती लक्षण?
डेंगू एक वायरल बुखार है जो ट्रॉपिकल रीजन में संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। बता दें, यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में सीधे नहीं फैलती, बल्कि संक्रमित मच्छर इसे फैलाते हैं। एक बार जब आप किसी एक प्रकार के डेंगू वायरस से ठीक हो जाते हैं, तो आपको उस वायरस से इम्युनिटी मिल जाती है, लेकिन अन्य तीन प्रकार के वायरस से आपको फिर भी संक्रमण हो सकता है।
मच्छर काटने के 4 से 10 दिन बाद इसके लक्षण दिखने शुरू होते हैं। कई बार लोग इसे साधारण फ्लू समझ लेते हैं। इसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
- 104 डिग्री फारेनहाइट तक तेज बुखार
- तेज सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द
- मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द
- उल्टी या पेट खराब होना
- ग्रंथियों में सूजन और त्वचा पर लाल चकत्ते
ज्यादातर लोग एक या दो हफ्ते में ठीक हो जाते हैं, लेकिन थकान कई हफ्तों तक बनी रह सकती है।
कब बन जाता है यह जानलेवा?
ज्यादातर लोग एक-दो हफ्ते में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ हफ्तों तक शरीर में कमज़ोरी रह सकती है। असली खतरा तब शुरू होता है जब बुखार उतरने के एक-दो दिन बाद कुछ गंभीर लक्षण नजर आने लगते हैं। जब खून की नसें लीक होने लगती हैं और ब्लड में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से गिरने लगती है, तो इसे 'सीवियर डेंगू' या 'डेंगू शॉक सिंड्रोम' कहते हैं। इसके गंभीर संकेतों में शामिल हैं:
- पेट में असहनीय दर्द होना और बार-बार उल्टी आना।
- नाक या मसूड़ों से खून आना।
- उल्टी, पेशाब या मल में खून दिखाई देना।
- सांस लेने में कठिनाई, बहुत ज्यादा थकान और लगातार चिड़चिड़ापन।
- त्वचा के नीचे खून का रिसाव होना, जो दिखने में खरोंच या नील जैसा लगता है।
गर्भवती महिलाओं को डेंगू होने पर समय से पूर्व डिलीवरी होने, बच्चे के जन्म के समय कम वज़न या भ्रूण को नुकसान पहुंचने का भारी जोखिम रहता है।
डेंगू होने पर क्या करें और क्या नहीं?
डॉक्टर आपकी ट्रैवल हिस्ट्री और ब्लड टेस्ट के आधार पर डेंगू की पुष्टि करते हैं। इसका कोई खास इलाज नहीं है, लेकिन लक्षणों को आराम देने के तरीके जरूर मौजूद हैं:
- पानी की कमी न होने दें: खूब लिक्विड डाइट लें, क्योंकि डेंगू में डिहाइड्रेशन का बड़ा खतरा होता है। अगर मुंह और होंठ सूख रहे हैं, पेशाब कम आ रहा है, आंसू नहीं बन रहे हैं या हाथ-पैर ठंडे पड़ रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
- सही पेन किलर दवा चुनें: बुखार और बदन दर्द कम करने के लिए केवल एसिटामिनोफेन का ही यूज करें।
- इन दवाओं से बिल्कुल बचें: इबुप्रोफेन (जैसे Advil, Motrin), एस्पिरिन, और नेप्रोक्सन जैसी दवाइयां भूलकर भी न लें। ये शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग के खतरे को बहुत ज्यादा बढ़ा देती हैं।
गंभीर मामलों में मरीज को फौरन अस्पताल ले जाना पड़ता है, जहां नसों के जरिए ग्लूकोज, इलेक्ट्रोलाइट्स, ब्लड प्रेशर की निगरानी और जरूरत पड़ने पर डोनर के जरिए खून चढ़ाया जाता है।
बचाव ही है सबसे बड़ा हथियार
डेंगू से सुरक्षित रहने का सबसे कारगर तरीका मच्छरों से दूरी बनाना ही है।
- पानी जमा न होने दें: मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में अंडे देते हैं। हर हफ्ते जानवरों के पानी के बर्तन, पुराने टायर और फूलदान का पानी जरूर बदलें और उन्हें साफ रखें।
- मच्छरों को दूर रखें: घर में खिड़की-दरवाजों पर जालियां लगाकर रखें या AC वाले कमरों में रहें। डेंगू के मच्छर मुख्य रूप से सुबह और शाम को एक्टिव रहते हैं, लेकिन यह रात में भी काट सकते हैं।
- सही कपड़े और रिपेलेंट: बाहर जाते समय फुल-स्लीव वाले कपड़े, पैंट और मोजे पहनें। त्वचा पर कम से कम 10% DEET वाला रिपेलेंट लगाएं। टेंट और कपड़ों के लिए पर्मेथ्रिन का इस्तेमाल करें।
- वैक्सीनेशन की सुविधा: जिन इलाकों में डेंगू बहुत आम बीमारी है, वहां 6 से 16 साल के बच्चों के लिए 'क्यूडेंगा' नाम की एक वैक्सीन मौजूद है। इसकी दो खुराक कम से कम तीन महीने के अंतर पर दी जाती हैं। साल 2027 तक भारत में भी इसके लॉन्च होने की उम्मीद है।
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Source: Mayo Clinic
