क्या 'ब्लू लाइट' चश्मे सच में आपकी आंखों को स्क्रीन से बचाते हैं? डॉक्टर ने बताई हकीकत
आज की डिजिटल लाइफ में मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट का इस्तेमाल हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। ...और पढ़ें

आंखों की सुरक्षा के लिए 'ब्लू लाइट' चश्में कितने फायदेमंद हैं? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल हमारा ज्यादातर समय मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट की स्क्रीन के सामने बीतता है। ऐसे में, आंखों की थकान और जलन आम बात हो गई है। इस समस्या से बचने के लिए आजकल 'ब्लू लाइट' रोकने वाले चश्मों का चलन बहुत बढ़ गया है।
हालांकि, क्या ये चश्मे वाकई हमारी आंखों के लिए एक सुरक्षा कवच हैं या यह सिर्फ एक ट्रेंड का हिस्सा हैं? आइए, ग्वालियर स्थित रतन ज्योति नेत्रालय के संस्थापक, निदेशक और सर्जन, डॉ. पुरेन्द्र भसीन से समझते हैं।

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ब्लू लाइट क्या है और आंखों में परेशानी क्यों होती है?
ब्लू लाइट एक प्रकार की हाई-एनर्जी रोशनी है। यह सिर्फ डिजिटल स्क्रीन से ही नहीं, बल्कि सूरज की रोशनी से भी निकलती है। जब हम लगातार घंटों तक स्क्रीन देखते रहते हैं, तो आंखों में सूखापन, जलन, थकान और सिरदर्द जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इस पूरी समस्या को डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है। ज्यादातर लोग यह मान बैठते हैं कि इन सभी परेशानियों की मुख्य वजह स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी ही है।
कंपनियों के दावे बनाम विज्ञान का सच
बाजार में मिलने वाले ब्लू लाइट चश्मों को लेकर यह दावा किया जाता है कि इनके खास लेंस नीली रोशनी को आंखों तक पहुंचने से रोकते हैं। कंपनियां कहती हैं कि इससे आंखों पर जोर कम पड़ता है और नींद भी बेहतर आती है, क्योंकि नीली रोशनी हमारे स्लीप हार्मोन पर असर डालती है। हालांकि, विज्ञान और रिसर्च इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। कई शोध बताते हैं कि:
- आंखों की थकान को दूर करने में ब्लू लाइट चश्मे बहुत ज्यादा असरदार नहीं हैं।
- आंखों में दर्द और सूखेपन की असली वजह नीली रोशनी नहीं, बल्कि लगातार बिना ब्रेक के स्क्रीन देखना, बैठते समय गलत पोस्चर रखना और स्क्रीन देखते समय पलकें कम झपकाना है।
इसलिए, केवल एक चश्मा पहन लेने से यह समस्या जड़ से खत्म नहीं हो सकती।
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क्या इन चश्मों का कोई फायदा नहीं है?
यह सच है कि कुछ लोगों को इन चश्मों को पहनने से थोड़ा आराम महसूस होता है। खासतौर पर वे लोग जो देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप पर काम करते हैं, उन्हें इससे हल्की राहत मिल सकती है या उनके नींद के पैटर्न में थोड़ा सुधार हो सकता है, लेकिन इन चश्मों को आंखों की संपूर्ण सुरक्षा का एकमात्र समाधान मान लेना सही नहीं होगा।
आंखों को सुरक्षित रखने के असली उपाय
डॉ. पुरेन्द्र भसीन के अनुसार, आंखों की सही देखभाल के लिए केवल चश्मे पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आदतों में सुधार करना ज्यादा असरदार है:
- 20-20-20 का नियम अपनाएं: यह आंखों को आराम देने का सबसे बेहतरीन तरीका है। हर 20 मिनट के काम के बाद, स्क्रीन से नजर हटाएं और कम से कम 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर रखी किसी चीज को देखें।
- लगातार पलकें झपकाएं: स्क्रीन देखते समय हम अक्सर पलकें झपकाना भूल जाते हैं। नियमित रूप से पलकें झपकाने से आंखों में नमी बनी रहती है और सूखापन नहीं आता।
- स्क्रीन की सही सेटिंग: अपनी स्क्रीन की चमक को संतुलित रखें और आंखों से स्क्रीन की दूरी सही बनाए रखें।
- भरपूर नींद लें: आंखों की थकान मिटाने के लिए शरीर को पर्याप्त और अच्छी नींद देना बहुत जरूरी है।
ब्लू लाइट चश्मे आपको थोड़ी राहत जरूर दे सकते हैं, लेकिन स्वस्थ आंखों के लिए सही आदतें और काम के बीच में ब्रेक लेना ही सबसे अचूक उपाय है।