मौसम बदलने पर होने वाले जुकाम-बुखार को न लें हल्के में, ये मामूली इन्फेक्शन भी बन सकता है टीबी की वजह
एक स्टडी में पता चला है कि फ्लू के कारण टीबी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए फ्लू को मामूली समझने की भूल मुश्किल खड़ी कर सकता है। ...और पढ़ें

फ्लू को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी (Picture Courtesy: Freepik)
HighLights
फ्लू टीबी जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ाता है
फ्लू वायरस इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है
फ्लू वैक्सीन टीबी रोकने में सहायक हो सकती है
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बदलते मौसम में फ्लू एक आम समस्या मानी जाती है। शरीर में दर्द, बुखार और जुकाम इसके आम लक्षण माने जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं फ्लू सिर्फ कुछ दिनों की परेशानी नहीं है। यह टीबी जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ाता है।
एक नई मेडिकल स्टडी में यह बात सामने आई है कि फ्लू होने से व्यक्ति में टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानें क्या कहती है यह रिसर्च और इस समस्या का हल क्या है?
कैसे फ्लू के कारण बढ़ता है टीबी का खतरा?
मेडिकल जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में पब्लिश इस स्टडी के मुताबिक, फ्लू का वायरस हमारे शरीर के इम्यून पाथवे को कमजोर कर देता है, जो टीबी के बैक्टीरिया को रोकने का काम करता है। इस रिसर्च में फ्लू से इन्फेक्टेड वॉलुएंटीयर्स के ब्लड सैंपल की जांच की गई, जिसमें देखा गया कि एक इन्फेक्शन से हमारा इम्यून सिस्टम कैसे लड़ता है, जिससे यह पता चल सके कि हम दूसरे इन्फेक्शन से कैसे लड़ेंगे। यानी फ्लू का वायरस शरीर की टीबी से लड़ने की ताकत कम कर देता है।

क्या फ्लू की वैक्सीन रोक सकती है टीबी?
इस स्टडी में इस समस्या से बचाव के लिए सुझाव दिया गया है कि वैक्सीनेशन से फ्लू को रोका जाए, तो टीबी के मामलों में कमी आ सकती है। हालांकि, इसके लिए अभी क्लीनिकल ट्रायल्स की जरूरत है कि क्या सीजन फ्लू वैक्सीन टीबी के रिस्क को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।
क्या भारत के लिए यह एक प्रैक्टिकल सॉल्यूशन है?
भारत में फ्लू की एक वैक्सीन की कीमत लगभग दो हजार रुपए है। ऐसे में पूरे देश में टीबी रोकने के लिए फ्लू का टीका लगाना जेब पर भारी पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि इसका कोई खास सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ नहीं मिलेगा।
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(AI Generated Image)
फ्लू और टीबी का बढ़ता आंकड़ा
फ्लू दुनियाभर में हर साल लगभग एक अरब लोगों को प्रभावित करता है। यह एक बहुत बड़ा आंकड़ा है। वहीं, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, हर साल सांस से जुड़ी बीमारियों के कारण करीब 2.9-6.5 लाख लोगों की मौत होती है। भारत में भी फ्लू और टीबी के हर साल लाखों मामले सामने आते हैं।
वैक्सीन की जरूरत सबसे ज्यादा किसे है?
जिन्हें पहले से सांस से जुड़ी कोई समस्या या डायबिटीज है, उनमें इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। साथ ही, 65 साल की उम्र से ज्यादा के लोगों की भी इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। इनके लिए फ्लू की वैक्सीन ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है।