ब्रेस्टफीडिंग को लेकर कहीं आप भी तो नहीं मानतीं ये पुरानी बातें? डॉक्टर से जानें स्तनपान का सही तरीका
शिशु के लिए स्तनपान को अमृत माना गया है, पर इसे लेकर आज भी कई तरह की भ्रांतियां हैं या कहें लोगों में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कितनी बार स्तनपान कराना है, यदि दूध पर्याप्त नहीं आ रहा है तो किससे संपर्क करें, कामकाजी हैं तो ब्रेस्ट पंप की मदद से बच्चे को दूध पिलाने का सही तरीका आदि। मां बनने वाली हैं तो ये कुछ सवाल और जिज्ञासा होते हैं। यह जानते हुए भी कि मां का दूध शिशु के विकास का आधार तैयार करता है, स्तनपान को लेकर भ्रांतियां बनी हुई हैं।
यही कारण है जागरूकता कार्यक्रमों के बाद भी शिशु को स्तनपान कराने में ये प्रमुख बाधा बनी हुई हैं। बता दें कि मां का दूध न मिलने पर बच्चे में कुपोषण व सूखा जैसे रोग की आशंका बढ़ जाती है। केवल शिशु ही नहीं स्तनपान कराने वाली माताओं को भी इससे कई लाभ हैं। अधिकांश माताओं में मोटापे की समस्या भी नहीं रहती। यह उन्हें हड्डियों की कमजोरी से बचाता है।
नहीं रहेगा एडीएचडी का जोखिम
बच्चे को शुरुआती छह महीने तक स्तनपान कराया जाए, तो तीन से आठ साल की उम्र में उसे 'एडीएचडी' होने का खतरा बहुत कम रहता है। नार्वे की बर्गन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता की मानें तो मां का दूध शिशु के दिमागी विकास और उसके इम्यून सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
यदि माता अस्वस्थ हैं-
- मास्क पहनकर भी स्तनपान करा सकती हैं।
- सीधे स्तनपान नहीं करा सकें तो ब्रेस्ट पंप की मदद ले सकती हैं।
इन बातों का रहे ध्यान-
- शुरुआती दिनों में स्तनपान में समय लग सकता है।
- स्तनपान के लिए एक आरामदायक जगह चुनें। तनावमुक्त रहें।
- ऐसे कपड़े पहनें जिनसे स्तनपान कराना आसान हो उसमें कोई रुकावट न आए।
सुनिश्चित करें कि पीठ को सहारा मिल रहा हो और आप सहज महसूस कर रही हों। यदि बैठकर स्तनपान करा रही हैं, तो पैरों के नीचे एक स्टूल या सख्त तकिया रख लें। इससे स्तनपान कराते समय अधिक स्थिरता महसूस हो सकती है।
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भावनात्मक विकास के लिए जरूरी
शुरुआती दो साल में दिमाग जितनी तेजी से विकसित होता है, उतना जीवन के शेष समय में नहीं हो पाता। मां के दूध से शिशु को जो विशेष प्रकार की वसा, प्रोटीन व दूसरे पोषक तत्व मिलते हैं, यदि स्तनपान नहीं कराया गया तो जीवन भर उसकी भरपाई कठिन हो सकती है। मां का स्पर्श, उसकी आंखों से तालमेल ऐसी चीज हैं जो दिमाग के भावनात्मक व सामाजिक विकास वाले हिस्से को मजबूती देती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए स्तनपान को कम से कम पहले छह माह के लिए अनिवार्य माना है। बच्चे की सेहत के पूरे जीवनकाल के लिए यह सबसे सरल और शक्तिशाली निवेश होता है।
डॉ. शेफाली गुलाटी, प्रोफेसर, बाल न्यूरोलाजी विभाग, एम्स नई दिल्ली
लैक्टेसन विशेषज्ञ की लें मदद
कोलेस्ट्रम, बच्चे के जन्म के बाद मां के स्तन से निकलने वाला सबसे पहला दूध है। इसे लेकर आज भी भ्रांतियां हैं, जैसे यह दूध सही नहीं क्योंकि यह गाढ़ा होता है, रंग अलग है आदि। जबकि इस दूध में लाखों जीवित कोशिकाएं होती हैं जो शिशु को गंभीर संक्रमण से बचा सकती हैं। यह दूध आसानी से पच भी जाता है। एक और मिथक है कि स्तनपान करानेवाली मां को खूब खाना चाहिए, पर खूब खाने के बजाय संतुलित भोजन जरूरी है। कामकाजी वर्ग की महिलाओं के लिए स्तनपान कराना कठिन है तो इसके भी उपाय हैं। वे ब्रेस्ट पंप की मदद से बच्चे को दूध पिला सकती हैं। पर इसे निकालने, स्टोर करने के तरीके जानने चाहिए। जैसे, फ्रीजर में रखें तो कितनी देर और फ्रीज में रखा है तो कितनी देर में उसे खत्म करें। पहली बार मां बनने वाली हैं तो आप बच्चे के जन्म के बाद किसी लेक्टेशन संपर्क से स्तनपान से जुड़ी सारी जानकारी ले सकती हैं।
डॉ. अनीता गुप्ता, स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ, फोर्टिस ला फेम, दिल्ली