हर काम को कल पर टालना सिर्फ आलस नहीं, हो सकता है Adult ADHD! ये लक्षण दिखने पर करवाएं टेस्ट
ADHD सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है, वयस्क भी इससे डायग्नोस हो सकते हैं। वयस्कों में ADHD के लक्षण बच्चों से काफी अलग होते हैं। ...और पढ़ें

बच्चों जैसे ही होते हैं वयस्कों में भी ADHD के लक्षण? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आमतौर पर लोग ADHD (Attention-Deficit/Hyperactivity Disorder) को सिर्फ बच्चों से जोड़कर देखते हैं। लेकिन अब भारतीय युवाओं और वयस्कों में इसके काफी मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह पूछना जरूरी हो जाता है कि ऐसा क्यों हो रहा है और Adult ADHD के लक्षण कैसे होते हैं।
ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब हमने डॉ. मीनाक्षी जैन (सीनियर कंसल्टेंट, साइकायट्री, अमृता अस्पताल, फरीदाबाद) से जानने की कोशिश की। आइए जानें इस बारे में वो क्या बताती हैं।
क्या होता है Adult ADHD?
Adult ADHD कोई ऐसी स्थिति नहीं है जो अचानक वयस्क होने पर विकसित होती है, बल्कि यह बचपन से चली आ रही न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है। वयस्कों में, हाइपरएक्टिविटी शारीरिक रूप से उछल-कूद के बजाय रिलैक्स न कर पाने या बेचैनी के रूप में दिखाई देती है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अध्ययनों के डेटा बताते हैं कि भारत में वयस्कों में इसके 2–5% मामले हो सकते है, जो कि एक बड़ा आंकड़ा है।
ADHD डायग्नोसिस क्यों बढ़ रहा है?
- बदलता वर्कस्टाइल- आज की नौकरियां मल्टीटास्किंग और लंबे समय तक फोकस की मांग करती हैं। यह वर्क-कल्चर ADHD के छिपे हुए लक्षणों को बाहर लाता है।
- डिजिटल अवेयरनेस- सोशल मीडिया और इंटरनेट के कारण लोग अब लक्षणों को पहचान रहे हैं। जिसे पहले आलस समझा जाता था, अब उसे एक क्लिनिकल कंडीशन के रूप में देखा जा रहा है।
- मेंटल हेल्थ जागरुकता- भारतीय युवाओं में अब मेंटल हेल्थ से जुड़ी सलाह लेने को लेकर हिचकिचाहट कम हुई है।
ADHD के लक्षण, जिन्हें हम अक्सर पहचान नहीं पाते
वयस्कों में ADHD के लक्षण बच्चों जैसे नहीं होते। इसलिए कई बार लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।
- प्रोक्रास्टिनेशन- काम को आखिरी वक्त तक टालना।
- टाइम मैनेज न करना- समय का अंदाजा न होना और अक्सर देर से पहुंचना।
- अधूरे काम- एक काम पूरा किए बिना दूसरे पर कूद जाना।
- इम्पल्सिव बर्ताव- बातचीत के बीच में टोकना या बिना सोचे-समझे फैसले लेना।
- भावनात्मक उतार-चढ़ाव- छोटी बातों पर बहुत चिड़चिड़ापन या ओवरवेल्म महसूस करना।
इसका इलाज क्या है?
ADHD के इलाज के लिए दवाओं के साथ बिहेवियरल थेरेपी भी जरूरी होती है।
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- दवाएं- स्टिमुलेंट्स और नॉन स्टिमुलेंट दवाएं न्यूरोट्रांसमीटर को संतुलित करने में मदद करती हैं, जिससे ध्यान लगाना आसान हो जाता है।
- कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी- यह थेरेपी व्यक्ति को ऑर्गेनाइज्ड होने, टाइम मैनेजमेंट करने और नेगेटिव सोच के पैटर्न को बदलने में मदद करती है।
- लाइफस्टाइल में बदलाव- एक फिक्स रूटीन बनाना, नियमित एक्सरसाइज, पूरी नींद और डिजिटल डिटॉक्स इसमें रामबाण साबित होते हैं।