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    बचपन में होने वाले इन्फेक्शन बन सकते हैं उम्रभर का सिरदर्द? न्यूरोलॉजिस्ट ने दी बड़ी चेतावनी

    Updated: Sat, 28 Feb 2026 08:18 AM (IST)

    डॉ. मनोज खनाल के अनुसार बचपन के शुरुआती संक्रमण भविष्य में गंभीर न्यूरोलॉजिकल डिजीज का कारण बन सकते हैं। ...और पढ़ें

    क्या बचपन की बीमारियों और बुढ़ापे के अल्जाइमर में है कोई कनेक्शन? (Image Source: AI-Generated)

    क्या बचपन की बीमारियों और बुढ़ापे के अल्जाइमर में है कोई कनेक्शन? (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, शालीमार बाग के न्यूरोलॉजी डायरेक्टर, डॉ. मनोज खनाल के अनुसार, गर्भावस्था, नवजात अवस्था और बचपन के शुरुआती दिनों में होने वाले संक्रमण भविष्य में बड़े खतरे का संकेत हो सकते हैं।

    हाल ही में सामने आए साक्ष्यों से पता चलता है कि जीवन के शुरुआती चरणों में होने वाले बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण आगे चलकर कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल, न्यूरोडेवलपमेंटल और मानसिक बीमारियों का जोखिम काफी हद तक बढ़ा देते हैं।

    ये संक्रमण न सिर्फ बच्चे के दिमागी विकास को रोक सकते हैं, बल्कि दिमाग की संरचना को नुकसान पहुंचाकर लंबे समय तक रहने वाली सूजन का कारण भी बन सकते हैं। आइए इसे जीवन के अलग-अलग पड़ावों और इसके पीछे के विज्ञान के जरिए समझते हैं।

    viral infections in kids

    (Image Source: AI-Generated) 

    उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर इन्फेक्शन का असर

    इन्फेक्शन बच्चे को किस उम्र में हुआ है, इससे भविष्य में होने वाली बीमारियों का प्रकार तय होता है:

    • जन्म से पहले (गर्भावस्था के दौरान): अगर गर्भावस्था में मां को साइटोमेगालोवायरस, सिफलिस, रूबेला या HIV जैसे संक्रमण हो जाएं, तो गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग की बनावट में गंभीर खामियां आ सकती हैं। इसके कारण 'माइक्रोसिफेली' (सिर का छोटा रह जाना), 'हाइड्रोसिफेलास' या 'सेरेब्रल पाल्सी' जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। कई बार ऐसे संक्रमण जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखते, वे भी आगे चलकर बहरेपन या विकास में देरी का कारण बन जाते हैं।
    • जीवन का पहला साल: जन्म के पहले साल में होने वाली गंभीर सांस की बीमारियां, पेट और आंतों के संक्रमण, तेज बुखार या कान के संक्रमण बेहद खतरनाक हो सकते हैं। ये भविष्य में मानसिक बीमारियों, हृदय रोगों, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और अस्थमा या एक्जिमा जैसी एलर्जी वाली बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं।
    • शुरुआती चार साल: जीवन के पहले चार वर्षों में होने वाले संक्रमण सीधे तौर पर बच्चे के दिमागी विकास को प्रभावित करते हैं। इसके कारण बच्चे का स्कूल में प्रदर्शन खराब हो सकता है और ऑटिज्म या बौद्धिक अक्षमता जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    दिमाग को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं ये इन्फेक्शन?

    डॉ. खनाल ने इन बीमारियों के पीछे मुख्य रूप से तीन वैज्ञानिक कारण बताए हैं:

    • दिमाग में सूजन: संक्रमण के दौरान शरीर में साइटोकिन्स (जैसे IL-6 और TNF-alpha) नामक रसायन निकलते हैं, जो विकसित हो रहे बच्चे के दिमाग को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
    • मॉलिक्यूलर मिमिक्री: कई बार संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर जो एंटीबॉडीज बनाता है, वे कन्फ्यूज हो जाती हैं। वे वायरस के बजाय नर्वस सिस्टम के स्वस्थ हिस्सों पर ही हमला कर देती हैं, जिससे संक्रमण के बाद कई दिमागी बीमारियां जन्म लेती हैं।
    • इम्यून सिस्टम की प्राइमिंग: बचपन के संक्रमण दिमाग में मौजूद 'माइक्रोग्लिया' नामक खास कोशिकाओं में बदलाव कर देते हैं। यही बदलाव आगे चलकर दिमाग में हानिकारक सूजन पैदा करते हैं।

    neurological health

    (Image Source: AI-Generated)

    बीमारियों को ट्रिगर करने वाले प्रमुख वायरस

    कुछ खास वायरस भविष्य में होने वाली बीमारियों का सीधा कारण बन सकते हैं:

    • एंटरोवायरस: यह मिर्गीऔर ऑटिज्म का खतरा बढ़ाता है।
    • हर्पीस सिम्प्लेक्स वायरस: यह 'एन्सेफलाइटिस' और लंबे समय तक रहने वाली दिमागी कमजोरी का कारण बनता है।
    • इन्फ्लूएंजा: इसका सीधा संबंध अल्जाइमर, ALS और पार्किंसंस जैसी बीमारियों से पाया गया है।
    • एपस्टीन-बार वायरस: यह वायरस 'मल्टीपल स्केलेरोसिस' नाम की गंभीर बीमारी से बहुत मजबूती से जुड़ा है।

    बढ़ती उम्र की बीमारियां और संक्रमण

    बचपन के संक्रमणों का असर बुढ़ापे तक देखा जा सकता है। अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का शुरुआती जीवन के संक्रमणों से स्पष्ट संबंध है।

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    छह प्रमुख बीमारियां- अल्जाइमर, एमायोट्रॉफिक लेटरल स्केलेरोसिस, डिमेंशिया, मल्टीपल स्केलेरोसिस, पार्किंसंस और वैस्कुलर डिमेंशिया- का संबंध कई तरह के वायरल संक्रमणों से पाया गया है। उदाहरण के लिए, अल्जाइमर का गहरा संबंध वायरल एन्सेफलाइटिस से है। वहीं, 'वैस्कुलर डिमेंशिया' अक्सर इन्फ्लूएंजा, निमोनिया, आंतों के संक्रमण और वैरिसेला जोस्टर वायरस से जुड़ा होता है।

    इसके अलावा, बचपन में होने वाली मिर्गी भी सीधे तौर पर 'सेंट्रल नर्वस सिस्टम' के संक्रमण से जुड़ी होती है। साथ ही, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) भी आमतौर पर इन्हीं संक्रमणों से जुड़े होते हैं।

    डॉ. खनाल यह भी स्पष्ट करते हैं कि इन बीमारियों के पीछे केवल संक्रमण ही जिम्मेदार नहीं हैं। जेनेटिक्स और सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी इन बीमारियों के होने या न होने में एक बड़ी भूमिका निभाती हैं।

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