फ्री और आसान AI टूल्स बने डॉक्टरों की पहली पसंद! चिकित्सा क्षेत्र के टूल्स पर भरोसा कम, सर्वे में खुलासा
एक रिपोर्ट में सामने आया है कि डॉक्टर मेडिकल एआई टूल्स की जगह फ्री के एआई को ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं जो कहीं न कहीं चिकित्सा जगत के लिए चिंता का वि ...और पढ़ें

"क्लिनिशियन ऑफ द फ्यूचर 2026" की रिपोर्ट (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
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अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। उपचार से पहले बीमारी से जुड़ी जानकारी जुटानी हो, मेडिकल जर्नल और शोध पत्र देखने हों, मरीज के लिए क्लीनिकल नोट तैयार करना हो या दवाओं से संबंधित जानकारी हासिल करनी हो, इन दिनों डॉक्टर तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का सहारा ले रहे हैं। चिंता यह है कि बड़ी संख्या में डॉक्टर ऐसे सामान्य एआई टूल का उपयोग कर रहे है, जो चिकित्सा क्षेत्र के लिए विकसित ही नहीं हैं।
एआई मरीजों के लिए खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई का उपयोग भविष्य की आवश्यकता है पर, इसके लिए सामान्य एआई के स्थान पर चिकित्सा क्षेत्र के लिए विकसित प्रमाणित एआई प्लेटफार्म का ही उपयोग किया जाना चाहिए। क्योंकि सामान्य एआई से मिली जानकारी पर पर भरोसा करना मरीजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
"क्लिनिशियन ऑफ द फ्यूचर 2026" की रिपोर्ट
यह चिंताजनक स्थिति वैश्विक कंपनी एल्सेवियर की हाल ही में जारी "क्लिनिशियन ऑफ द फ्यूचर 2026" की रिपोर्ट में सामने आई है। स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के बढ़ते उपयोग, डॉक्टरों की बदलती कार्यप्रणाली और भविष्य की जरूरतों का आकलन करने के लिए इस वैश्विक रिपोर्ट में भारत सहित 118 देशों के 2,757 डॉक्टरों और स्वास्थ्य पेशेवरों से राय ली गई। इनमें भारत के 538 डॉक्टर भी थे।
48 प्रतिशत डॉक्टर कर रहे काम में एआई टूल्स का इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार भारत के 48 प्रतिशत डॉक्टर एआई का उपयोग कर रहे हैं। इनमें 54 प्रतिशत सामान्य एआई टूल और 26 प्रतिशत चिकित्सा क्षेत्र के लिए विकसित विशेष क्लीनिकल डॉक्टरों प्लेटफार्म का उपयोग करते हैं। 20 प्रतिशत डॉक्टर ऐसे भी हैं जो आवश्यकता के अनुसार दोनों तरह के एआई टूल का उपयोग कर रहे हैं। सामान्य एआई टूल का उपयोग अधिक होने का कारण इसकी आसान उपलब्धता, कम लागत और सरल उपयोग है।
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नि:शुल्क एआई टूल्स बड़ी वजह
ज्यादातर सामान्य एआई टूल नि:शुल्क या कम शुल्क पर उपलब्ध हैं, इनके उपयोग के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता भी नहीं। जबकि चिकित्सा क्षेत्र के लिए विकसित विशेष क्लीनिकल एआई प्लेटफार्म प्रमाणित मेडिकल जर्नल, वैज्ञानिक शोध पत्र, क्लीनिकल गाइडलाइन और विश्वसनीय मेडिकल डाटाबेस आधारित होते हैं।
इनके उपयोग के लिए संस्थागत सदस्यता, लाइसेंस और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि इनका उपयोग अपेक्षाकृत कम है। इतना ही नहीं एनएमसी, आइसीएमआर और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सामान्य एआई और चिकित्सा-विशिष्ट एआई के उपयोग को लेकर अब तक कोई गाइडलाइन या नियामक व्यवस्था भी जारी नहीं की है।