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    छोटी-छोटी बातों पर आता है गुस्सा? आपकी अधूरी नींद हो सकती है इस न्यूरोलॉजिकल बदलाव की वजह

    Updated: Wed, 20 May 2026 01:28 PM (IST)

    क्या आप भी अक्सर अपनी रातों की नींद कुर्बान कर रहे हैं, तो इससे आपके दिमाग को काफी गंभीर नुकसान पहुंच सकते हैं। ...और पढ़ें

    क्या आप ले रहे हैं 7-8 घंटे की नींद? (Picture Courtesy: Freepik)

    क्या आप ले रहे हैं 7-8 घंटे की नींद? (Picture Courtesy: Freepik)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात तक स्क्रीन स्क्रॉल करने की आदत और काम का बढ़ता प्रेशर नींद की कमी का सबसे बड़ा कारण हैं। अक्सर लोग काम या बिंज वॉचिंग के लिए बिना सोचे अपनी नींद कुर्बान कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं इसका आपके दिमाग पर क्या असर हो रहा है? 

    इस बारे में डॉ. नेहा पंडिता (सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी एंड यूनिट हेड, फॉर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा) बताती हैं कि नींद ऐसा समय है, जब हमारा दिमाग अपनी मरम्मत करता है और खुद को रीबूट करता है। इसलिए अगर आप पूरी नींद नहीं ले रहे हैं, तो इससे आपके दिमाग पर कई गंभीर प्रभाव हो सकते हैं। 

    दिमाग की सफाई ठप होना

    जब हम गहरी नींद में होते हैं, तो हमारा दिमाग खुद को साफ करता है। इस प्रक्रिया के दौरान दिमाग में दिनभर जमा होने वाले टॉक्सिन्स, जैसे कि बीटा-एमाइलॉयड, को बाहर निकाला जाता है। अगर नींद पूरी न हो, तो ये टॉक्सिन्स दिमाग में जमा होने लगते हैं, जो आगे चलकर अल्जाइमर जैसी गंभीर और भूलने वाली न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का कारण बन सकते हैं।

    भावनाओं पर कंट्रोल खोना और चिड़चिड़ापन

    दिमाग का एक हिस्सा जिसे प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स  कहते हैं, हमारे लॉजिकल फैसलों और भावनाओं को कंट्रोल करता है। नींद की कमी के कारण इस हिस्से की एक्टिविटी कम हो जाती है। वहीं, डर और गुस्से को नियंत्रित करने वाला हिस्सा अमिग्डाला हाइपरएक्टिव हो जाता है। यही वजह है कि नींद पूरी न होने पर इंसान छोटी-छोटी बातों पर चिढ़ जाता है, तनाव महसूस करता है और उसकी भावनाओं पर उसका नियंत्रण नहीं रहता।

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    Sleep Deprivation Signs

    (AI Generated Image)

    याददाश्त का कमजोर होना और सुस्ती

    नींद की एक अहम अवस्था होती है REM स्लीप। यह फेज हमारी यादों को सहेजने और नई चीजें सीखने के लिए जिम्मेदार होता है। जब हम कम सोते हैं, तो हमारे न्यूरॉन्स के बीच का संपर्क कमजोर हो जाता है। इसके चीजें याद रखने में परेशानी होती है, फोकस करना मुश्किल हो जाता है, फैसले लेने की क्षमता प्रभावित होती है और रिएक्शन टाइम धीमा हो जाता है, जिससे ड्राइविंग या मशीनरी चलाते समय एक्सीडेंट्स का खतरा बढ़ जाता है।

    न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का बढ़ता खतरा

    जो लोग पहले से मिर्गी या माइग्रेन से पीड़ित हैं, उनके लिए नींद की कमी एक बड़े ट्रिगर का काम करती है। कम सोने से मिर्गी के दौरे आने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और गंभीर सिरदर्द भी बढ़ जाता है।

    हार्मोनल गड़बड़ी

    शुरुआत में, दिमाग खुद को जगाए रखने के लिए डोपामाइन का स्तर बढ़ाता है, लेकिन लंबे समय तक भूखे रहने या न सोने से डोपामाइन, सेरोटोनिन और नोराड्रेनालाईन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का बैलेंस पूरी तरह बिगड़ जाता है।

    इससे मूड डिसऑर्डर और डिप्रेशन का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा, शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर और शरीर में सूजन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं, जो सीधे तौर पर ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाती हैं।