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    पुरानी चैट्स पढ़कर क्यों मिलता है सुकून? साइकोलॉजिस्ट ने बताई इसकी असली वजह

    Updated: Wed, 20 May 2026 07:00 AM (IST)

    उदासी हो या फिर किसी खास की बहुत याद सता रही हो... ऐसे में अक्सर हमारा हाथ फोन की तरफ जाता है और उंगलियां खुद-ब-खुद पुरानी चैट्स को खंगालने लगती हैं। ...और पढ़ें

    क्यों दुख में पुरानी यादों का सहारा ढूंढता है हमारा दिमाग? (Image Source: AI-Generated)

    क्यों दुख में पुरानी यादों का सहारा ढूंढता है हमारा दिमाग? (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी गौर किया है कि जब हम दुखी होते हैं, अकेलापन महसूस करते हैं या किसी अपने की बहुत याद आती है, तो हमारी उंगलियां खुद-ब-खुद फोन के पुराने चैट्स की तरफ क्यों चली जाती हैं? आज के डिजिटल युग में यह कई लोगों की आदत बन चुकी है।

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सिर्फ एक 'आदत' नहीं है? मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसके पीछे हमारे दिमाग और भावनाओं का एक बहुत गहरा मनोवैज्ञानिक खेल छिपा है (Why people read old chats when sad)। आइए समझते हैं कि हमारा दिमाग ऐसा क्यों करता है।

    Psychology of reading old chats

    (Image Source: AI-Generated) 

    दुख में दिमाग क्यों ढूंढता है पुराने चैट्स का सहारा?

    जब हम तनाव में होते हैं या भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ जाते हैं, तो हमारा दिमाग खुद को सुरक्षित महसूस कराने की कोशिश करता है। वह उन जगहों या पलों की तरफ भागता है जहां उसे कभी प्यार, अपनापन और सुरक्षा का एहसास हुआ था।

    एशियन हॉस्पिटल की कंसल्टेंट और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, डॉ. दीपिका शर्मा बताती हैं कि इंसान के दिमाग में यादें और भावनाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी होती हैं। जब हम पुराने मैसेज पढ़ते हैं, तो दिमाग उन चैट्स से जुड़ी भावनात्मक यादों को फिर से जगा देता है।

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    एक्सपर्ट के मुताबिक, पुरानी यादों में गोते लगाने से दिमाग के 'रिवॉर्ड पाथवे' एक्टिव हो सकते हैं। इससे डोपामाइन जैसे 'फील-गुड' केमिकल पर असर पड़ता है, जिससे हमें कुछ समय के लिए सुकून और दर्द से थोड़ी राहत महसूस होती है।

    ब्रेकअप के बाद क्यों बढ़ जाती है पुराने मैसेज पढ़ने की लत?

    रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का मानना है कि ब्रेकअप या रिश्ते में दूरी आने के बाद लोग सबसे ज्यादा पुरानी बातें पढ़ते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हमारा दिमाग अचानक खत्म हुए इस इमोशनल कनेक्शन को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता।

    डॉ. शर्मा के अनुसार:

    • कई लोग पुराने चैट्स के सहारे उस टूटे हुए कनेक्शन को पकड़े रहने की कोशिश करते हैं।
    • कुछ लोग यह समझने के लिए मैसेज खंगालते हैं कि आखिर रिश्ते में क्या बदल गया या क्या गलत हुआ।
    • कुछ लोग इसमें छिपे संकेत तलाशते हैं या 'क्लोजर' पाना चाहते हैं।
    • वहीं, कई लोग सिर्फ उन बीते हुए खूबसूरत पलों को दोबारा जीना चाहते हैं।

    Why do I read old text messages when sad

    (Image Source: AI-Generated)

    सिर्फ शब्द नहीं, आप फिर से जीते हैं वो भावनाएं

    हमारे दिमाग में सामान्य यादों के मुकाबले 'भावनात्मक यादें' बहुत मजबूती से दर्ज होती हैं। दिमाग के एमिगडाला और हिप्पोकैम्पस जैसे हिस्से भावनाओं और यादों को प्रोसेस करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

    डॉ. शर्मा बहुत ही खूबसूरती से इसे समझाते हुए कहती हैं, "जब कोई व्यक्ति पुराने चैट्स पढ़ता है, तो वह सिर्फ लिखे हुए शब्द नहीं पढ़ रहा होता, बल्कि वह उन भावनाओं को दोबारा जी रहा होता है।" हालांकि, यह कुछ पल का सुकून तो देता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा ऐसा करने पर आप जीवन में आगे बढ़ने से रुक सकते हैं।

    डिजिटल दौर ने कैसे धीमी कर दी है 'हीलिंग'?

    एक्सपर्ट मानते हैं कि पहले के समय में यादें वक्त के साथ धीरे-धीरे धुंधली पड़ जाती थीं, लेकिन आज सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के कारण पुरानी बातें कभी मिटती नहीं हैं। पुराने मैसेज, तस्वीरें और वॉइस नोट्स हमेशा बस एक 'क्लिक' की दूरी पर होते हैं। बार-बार इन यादों के सामने आने से हमारी 'इमोशनल हीलिंग' काफी धीमी हो जाती है।

    कब बन सकती है यह आदत खतरे की घंटी?

    कभी-कभार पुराने दिन याद करना या चैट्स पढ़ना बिल्कुल सामान्य है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, आपको सतर्क हो जाना चाहिए अगर:

    • आप लगातार अतीत में ही खोए रहने लगें।
    • बार-बार फोन चेक करने की बेचैनी हो।
    • आप अपने वर्तमान रिश्तों से दूरी बनाने लगें।
    • पुरानी बातें पढ़कर आपकी उदासी घटने की बजाय बढ़ने लगे।
    • इसका असर आपकी नींद, काम और मानसिक स्थिति पर पड़ने लगे।

    अगर ये लक्षण दिख रहे हैं, तो यह मानसिक तनाव, एंग्जाइटी या डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। ऐसे में किसी विशेषज्ञ की सलाह लेना बहुत जरूरी है।

    इस दुख से बाहर निकलने के लिए क्या करें?

    अतीत के पन्नों में उलझे रहने के बजाय, एक्सपर्ट्स कुछ सकारात्मक कदम उठाने की सलाह देते हैं:

    • अपनों का साथ: अकेलेपन में दोस्तों और परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं।
    • फिजिकल एक्टिविटी: एक्सरसाइज या खेलकूद में खुद को व्यस्त रखें।
    • जर्नलिंग करें: अपने विचारों और भावनाओं को एक डायरी में लिखें।
    • मदद लें: जरूरत महसूस होने पर किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करने में झिझकें नहीं।

    याद रखें, "पुरानी बातों को याद करना गलत नहीं है, लेकिन भावनात्मक रूप से आगे बढ़ने के लिए नए अनुभवों और वर्तमान जीवन को भी अपनाना बेहद जरूरी है।"

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