सिर्फ बॉडी ही नहीं, दिमाग को भी 'फिट' रखती है एक्सरसाइज; अल्जाइमर से बचाव में है मददगार
सैन फ्रांसिस्को विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया है कि व्यायाम न केवल शरीर बल्कि दिमाग को भी स्वस्थ रखता है। ...और पढ़ें

अल्जाइमर के खिलाफ आपके मस्तिष्क की सबसे मजबूत ढाल है व्यायाम (Image Source: Freepik)
HighLights
एक्सरसाइज दिमाग को अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों से भी सुरक्षित रखती है
उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क का 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' कमजोर हो जाता है
फिजिकल एक्टिविटी दिमाग की प्रोटैक्टिव लेयर की मरम्मत करती है
एएनआई, नई दिल्ली। हम सभी जानते हैं कि व्यायाम करना हमारे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हमारे दिमाग को अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचा सकता है? सैन फ्रांसिस्को विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नई जैविक प्रक्रिया की पहचान की है, जिसने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि शारीरिक गतिविधि से हमारे सोचने और याद रखने की क्षमता में सुधार क्यों होता है। यह शोध बताता है कि व्यायाम केवल शरीर ही नहीं, बल्कि दिमाग को भी जवां बनाए रखता है।

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उम्र के साथ कैसे कमजोर होता है दिमाग?
हमारे मस्तिष्क की सुरक्षा के लिए एक खास परत होती है जिसे ब्लड-ब्रेन बैरियर कहते हैं। यह रक्त वाहिकाओं का एक जटिल जाल है, जो सामान्य तौर पर खून में मौजूद हानिकारक पदार्थों को दिमाग में जाने से रोकता है।
लेकिन, जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, यह सुरक्षा कवच कमजोर पड़ने लगता है और इसमें रिसाव होने लगता है। इस रिसाव के कारण खून से हानिकारक प्रोटीन मस्तिष्क के ऊतकों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। यही हानिकारक प्रोटीन दिमाग में सूजन पैदा करते हैं, जो सीधे तौर पर बौद्धिक क्षमता में गिरावट और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़ा है।
व्यायाम कैसे करता है मस्तिष्क की मरम्मत?
यहीं पर व्यायाम एक जादू की तरह काम करता है! शोध के अनुसार, शारीरिक गतिविधि मस्तिष्क के इस अंतर्निहित रक्षा तंत्र (सुरक्षा कवच) को मजबूत करती है। जब हम व्यायाम करते हैं, तो हमारा शरीर लिवर को एक खास एंजाइम छोड़ने (स्रावित करने) के लिए प्रेरित करता है। यह एंजाइम उन हानिकारक प्रोटीनों को नष्ट कर देता है जो दिमाग को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके साथ ही, व्यायाम मस्तिष्क की इस सुरक्षात्मक परत की मरम्मत करके दिमाग को तेज करता है, जिससे बढ़ती उम्र के साथ मस्तिष्क के कमजोर होने की प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है।
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भविष्य के लिए एक नई उम्मीद
इस प्रक्रिया को और अच्छे से समझने के लिए शोधकर्ताओं ने चूहों पर भी अध्ययन किया। इस शोध में पाया गया कि जब शरीर में इस हानिकारक प्रोटीन की मात्रा को कम किया गया, तो चूहों के दिमाग में सूजन कम हो गई और उनकी याददाश्त में काफी सुधार हुआ। यह एक बेहद महत्वपूर्ण खोज है, क्योंकि इसके जरिए भविष्य में अल्जाइमर और उम्र के साथ होने वाली दिमागी समस्याओं के लिए नए और बेहतर उपचार ढूंढने में मदद मिल सकती है।