जौ, बाजरा और रागी को भुलाने से बढ़ रहा बीमारियों का ग्राफ, हम खा रहे हैं जरूरत का सिर्फ 10% साबुत अनाज
एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीय केवल जरूरत का 10% साबुत अनाज का ही सेवन करते हैं। ...और पढ़ें

साबुत अनाज छोड़ने से शरीर में घर कर रही हैं गंभीर बीमारियां (Image Source: AI-Generated)
HighLights
साबुत अनाज के कम सेवन से डायबिटीज व मोटापे में वृद्धि
देश में साबुत अनाज का औसत दैनिक सेवन लगभग 42 ग्राम है
साबुत अनाज खाने वालों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा 26% कम
प्रेट्र, नई दिल्ली। भारतीय केवल 10 प्रतिशत की सिफारिश की गई साबुत अनाज की मात्रा का सेवन कर रहे हैं, जो देश में गैर संक्रामक बीमारियों में तेज वृद्धि का कारण बन रहा है, एक श्वेत पत्र में यह जानकारी दी गई है।
शोध बताते हैं कि प्रतिदिन 3-5 साबुत अनाज खाने वालों में टाइप 2 मधुमेह का जोखिम लगभग 26% कम होता है और यह वजन व कमर की चर्बी को नियंत्रित करने में सहायक है। साबुत अनाज (जैसे जौ, बाजरा, रागी) का कम सेवन इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाता है, जिससे डायबिटीज का खतरा और फास्टिंग ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है। इसके विपरीत, प्रसंस्कृत अनाज के सेवन से डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।

(Image Source: AI-Generated)
भारतीयों की थाली से गायब हुए जरूरी मिनरल्स
साबुत अनाज में मौजूद उच्च फाइबर और पोषक तत्व पाचन को धीमा करते हैं, जिससे वजन और ब्लड शुगर को प्रबंधित करने में मदद मिलती है। भारतीयों में मेटाबोलिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए साबुत अनाजों के साथ अवसरः साक्ष्य मानचित्रण शीर्षक वाले इस श्वेत पत्र में बताया गया है कि 20 से अधिक बाजरा की किस्मों के उपलब्ध होने के बावजूद रिफाइंड विकल्पों की ओर बढ़ता रुझान हमारी थाली से जरूरी विटामिन और मिनरल्स की कमी हो रही है। श्वेत पत्र के अनुसार, भारत में साबुत अनाज का औसत दैनिक सेवन लगभग 42 ग्राम है, जो कुल दैनिक अनाज सेवन 432 ग्राम का केवल 10 प्रतिशत है, जबकि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पोषण संस्थान (आइसीएमआर-एनआइएन) प्रतिदिन 125 ग्राम की सिफारिश की गई है।
साबुत अनाज के प्रभाव का हो अध्ययन
इसमें यह भी बताया गया है कि प्रसंस्करण के दौरान चोकर और अंकुर को हटाने से अनाज से महत्वपूर्ण पोषक तत्व जैसे विटामिन बी1 और बी6, फोलेट, जिंक, फास्फोरस, मैग्नीशियम, नियासिन, सेलेनियम और आयरन हटा दिए जाते हैं, जिससे ये कैलोरी में उच्च लेकिन पोषण की दृष्टि से कमजोर हो जाते हैं। इसने फोर्टिफाइड साबुत अनाज के आटे, डिजिटल रेसिपी टूल, सामुदायिक पायलट प्रोजेक्ट, महिलाओं और कमजोर जनसंख्या के लिए पोषण विशेषज्ञ परामर्श और विभिन्न आयु समूहों में साबुत अनाज के प्रभावों पर निरंतर शोध की सिफारिश की। यह संकेत देते हुए कि पोषण को कल्याणकारी अतिरिक्त के रूप में नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की आवश्यकता के रूप में देखा जाना चाहिए।
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गैर संक्रामक बीमारियों में तेज वृद्धि
विशेषज्ञों द्वारा संचालित इस साक्ष्य मानचित्रण अभ्यास को प्रोटीन फूड्स एंड न्यूट्रिशन डेवलपमेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (पीएफएनडीएआइ) ने आइटीसी के सहयोग से जारी किया। भारत में 20 से अधिक बाजरा की किस्में उपलब्ध हैं, जिससे इस अंतर को पाटने के लिए कृषि संसाधन मौजूद हैं। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में ऐसा करने की नीति की इच्छा और सार्वजनिक जागरूकता की कमी है। श्वेत पत्र में कहा गया है कि मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों जैसी गैर संक्रामक बीमारियों में भारत में तेज वृद्धि हो रही है, जो मुख्य रूप से फाइबर से भरपूर पोषक तत्वों से भरपूर साबुत अनाज से रिफाइंड विकल्पों की ओर बढ़ने के कारण है।