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    सावधान! 'गुड गर्ल' वाला बर्ताव कहीं छुपा हुआ ADHD तो नहीं? नई स्टडी का दावा

    Updated: Fri, 26 Jun 2026 02:00 PM (IST)

    अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर को ज्यादातर लड़कों से जोड़कर देखा जाता है। ...और पढ़ें

    लड़कियों में ADHD के लक्षणों पर नई स्टडी (Image Source: AI Generated)

    लड़कियों में ADHD के लक्षणों पर नई स्टडी (Image Source: AI Generated)

    HighLights

    1. लड़कियों में ADHD के लक्षण अक्सर अनदेखे रहते हैं

    2. बचपन के ADHD से युवावस्था में गंभीर बीमारियां संभव

    3. सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी ADHD जोखिम बढ़ाती है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर को ज्यादातर लड़कों से जोड़कर देखा जाता है, इसी वजह से लड़कियों में अगर लक्षण होते भी हैं तो उन्हें अनदेखा कर देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लड़कियों में इसके लक्षण छिपे हुए होते हैं, जिनपर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। अगर कोई लड़की एकदम अच्छे से व्यवहार कर रही है तो समझा जाता है कि उसका व्यवहार सामान्य है। हाल ही में, इसी समस्या पर एक स्टडी ने खास ध्यान दिया है कि ADHD के लक्षण लड़कियों में अनदेखा करने के नुकसान क्या हो सकते हैं। 

    लड़कियों में ADHD के लक्षणों पर नई स्टडी 

    नेचर मेंटल हेल्थ में पब्लिश हुई नई स्टडी लड़कियों में ADHD डिसऑर्डर को लेकर बड़ा खुलासा करती है। इसके मुताबिक सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की जिन महिलाओं में ADHD के लक्षण बचपन में दिखाई दिए, उनमें युवावस्था तक आते-आते डायबिटीज और दिल के दौरे जैसी क्रोनिक बीमारियों का खतरा भी ज्यादा देखा गया। 

    इस स्टडी में 18-32 की उम्र की करीब 120,000 महिलाओं के रिकॉर्ड शामिल हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि ADHD और खराब आर्थिक-सामाजिक स्थिति महिलाओं की बढ़ती उम्र में दो या दो से ज्यादा शारीरिक और मानसिक बीमारियों का कारण बनीं। यह स्टडी कहती है कि ADHD केवल बचपन से जुड़ा बिहेवरियल डिसऑर्डर नहीं है, बल्कि एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन है जिससे शरीर और दिमाग दोनों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।  

    खराब सामाजिक-आर्थिक स्थिति और ADHD 

    यह रिसर्च सेहत और कमजोर सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बीच सीधा कनेक्शन बताती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बहुत सारे ऐसे कारक हैं जो इसके लिए जिम्मेदार हैं। इनमें व्यक्ति की आय, शिक्षा, घर, नौकरी और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच शामिल है। दरअसल, जो बच्चे ऐसे वातावरण में पलते हैं जहां मूलभूत सुविधाओं की कमी है, उनमें तनाव, कुपोषण, बचपन के खराब अनुभव ज्यादा देखे जाते हैं। इसी वजह से ADHD डिसऑर्डर का खतरा भी उनमें बढ़ जाता है। 

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    क्या है ADHD?

    अटेंशन-डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर एक मानसिक बीमारी है जो दिमाग के काम करने के तरीके को प्रभावित करती है। इसके लक्षणों में फोकस कम कर पाना, एक जगह स्थिर न बैठ पाना, बिना सोचे-समझे काम करना और अटेन्शन की कमी शामिल है। 

    मेंटल हेल्थ की बीमारियों का रहता है ज्यादा खतरा 

    यह रिपोर्ट बताती है कि बचपन में ADHD के लक्षणों के चलते महिलाओं में क्रोनिक बीमारियों के साथ ही मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इनमें ये बीमारियां शामिल हैं: 

    1. पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर 

    2. बॉर्डर लाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर 

    3. एंग्जायटी डिसऑर्डर 

    4. डिप्रेशन 

    5. क्रोनिक बीमारियां जैसे- कैंसर, डायबिटीज, COPD और दिल की बीमारी। 

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    Source: Nature Mental Health