विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सेहत में जादुई सुधार कर सकता है सिर्फ एक घंटे का 'डिजिटल डिटॉक्स', आज से ही शुरू करें 'नो-फोन' चैलेंज

Published: Sun, 10 May 2026 09:29 AM (IST)

मोबाइल के ब्लू लाइट रेडिएशन मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। शोध बताते हैं कि डिजिटल दुनिया से हटकर ...और पढ़ें

स्वास्थ्य के लिए रोज सिर्फ एक घंटे फोन से बनाएं बनाएं दूरी (Image Source: AI-Generated)

स्वास्थ्य के लिए रोज सिर्फ एक घंटे फोन से बनाएं बनाएं दूरी (Image Source: AI-Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। फोन या स्क्रीन देखने के दूसरे तरीके हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गए हैं। इनके बिना जीवन चल पाएगी ये सोचा भी नहीं जा सकता। ब्लू लाइट के रेडिएशन से हमारी मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। कई रिसर्च और रिपोर्ट में सामने आ चुका है कि हमें इस स्क्रीन टाइम को घटाना चाहिए। इसके लिए डिजिटल डिटाक्स के तरीके को फालो करना बेहतर है। इसमें आपको कुछ देर के लिए मोबाइल, लैपटाप या दूसरे गैजेट्स से दूरी बनानी होती है।

हम सिर्फ एक घंटे के डिजिटल डिटाक्स की बात कर रहे हैं। सिर्फ आपको एक घंटे के लिए फोन से दूरी बनाकर रखनी होती है। यह मानसिक तनाव, अवसाद और नींद की कमी को कम करता है। इसके साथ ही यह वास्तविक जीवन, शौक और अपनों के साथ समय बिताने का एक तरीका है। यह एकाग्रता बढ़ाता है और स्क्रीन-आधारित व्यसन से मुक्ति दिलाता है। जब दिमाग खाली होता है तो नए विचार और रचनात्मकता पनपते है, जो लगातार मनोरंजन से दब जाते हैं। हमारे ज्यादातर काम फोन से ही होते हैं और इस पर लंबे समय तक रील्स देखने की आदत भी लोगों को पड़ चुकी है। धीरे-धीरे इसकी आदत पड़ जाती है और हम बिना किसी कारण के भी फोन देखते रहते हैं।

Digital detox

(Image Source: AI-Generated)

सोशल मीडिया की लत से चाहिए आजादी?

कम समय के लिए आप किस तरह डिजिटल डिटाक्स को फालो कर सकते हैं। मोबाइल की लत लोगों को इस कदर है कि वो रात को देर तक सिर्फ रील्स देखते रहते हैं। शार्ट वीडियो के अलावा टीवी स्क्रीन पर घंटों बिताना भी इसमें शामिल है। इसके अलावा रोजमर्रा के ज्यादातर काम भी फोन से ही होते हैं। इसे पूरी तरह छोड़ पाना संभव नहीं है, लेकिन इस आदत को कंट्रोल करना डिजिटल डिटाक्स कहलाता है। अगर कुछ देर के लिए भी डिजिटल डिटाक्स को फालो करते हैं तो इससे भी दिमाग की कार्यक्षमता बेहतर होती है।

डिजिटल डिटाक्स के फायदे

अगर आप सिर्फ एक घंटे के लिए भी फोन या हमारे ज्यादातर काम फोन से ही होते दूसरी स्क्रीन से दूरी बनाते हैं तो इससे हमारी नींद में सुधार आता है । दिमाग के थक जाने के बावजूद फोन पर समय बिताने से मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ती है। रात में देर तक फोन देखने की आदत लगातार बनी रहे तो स्लीपिंग पैटर्न खराब होता है, इसलिए दिन में एक बार डिजिटल डिटाक्स पर फोकस जरूर करना है।

इससे दिमाग के स्वास्थ्य में भी सुधार आता है क्योंकि फोन की लत हमारे फोकस को बिगाड़ती है। जब हम गैजेट्स से दूर रहते हैं तो दिमाग को आराम मिलता है। इसके अलावा दिमाग में नई कोशिकाएं भी बनती हैं जिससे फोकस बढ़ता है और दूसरे फायदे भी होते हैं।

यह रूटीन काम में गुणवत्ता को बढ़ाता है। दरअसल, चीजों में ध्यान न लगाने की वजह से काम में उत्पादन बिगड़ता है, इसलिए रोजाना कम से कम एक घंटे के लिए डिजिटल डिटाक्स को फालो करना चाहिए।

No-Phone Challenge

(Image Source: AI-Generated)

कैसे करें इसकी शुरुआत?

  • ज्यादातर लोगों को ये पता ही नहीं होता है कि हमें डिजिटल डिटॉक्स को फालो कैसे करना है, इसलिए आपको इसकी शुरुआत सिर्फ एक घंटे के लिए करनी चाहिए।
  • इसकी शुरुआत आप रविवार या अपने वीकआफ से कर सकते हैं। धीरे- धीरे आदत बन जाए तो हफ्ते में 3 दिन एक घंटे के डिजिटल डिटाक्स को फालो करें।
  • फोन के नोटिफिकेशन्स को इस दौरान पूरी तरह से बंद कर दें। हो सके तो इंटरनेट की सर्विस ही रोक दें। इस दौरान पर जरूरी काल और मैसेज ही चालू रखें।
  • फोन की स्क्रीन को कलरफुल रखने की जगह डार्क मोड में रखें। ज्यादा लाइट से आंखों पर बुरा असर पड़ता है।

यह भी पढ़ें- क्या आपका बच्चा भी दिनभर स्क्रीन से चिपका रहता है? फोकस बढ़ाने के लिए अपनाएं ये 3 ट्रिक्स

यह भी पढ़ें- सुबह के पहले 60 मिनट तय करते हैं आपकी सेहत का हाल! आंख खुलते ही करें 3 काम और इन चीजों से रहें दूर