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आपका शरीर अंदर से कितना बूढ़ा हो चुका है? अब सिर्फ एक 'स्कोर' से पता चलेगी आपके शरीर और दिमाग की असली ताकत

Updated: Sun, 30 Aug 2026 03:06 PM (IST)

बुढ़ापे और शारीरिक क्षमता को मापने के लिए अब 'इंट्रिंसिक कैपेसिटी' नाम का पैमाना अपनाया जा रहा है, जो दिमाग ...और पढ़ें

शरीर के काम करने की क्षमता नापने का नया पैमाना (Picture Courtesy: Freepik)

शरीर के काम करने की क्षमता नापने का नया पैमाना (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बढ़ती उम्र के साथ सेहत का ध्यान रखना जितना जरूरी होता है, उतना ही मुश्किल भी। हालांकि, अब वैज्ञानिक बुढ़ापे और शारीरिक क्षमता को समझने के लिए एक नया पैमाना अपना रहा है, जिसे इंट्रिंसिक कैपेसिटी कहा जाता है। 

दरअसल, ये पैमाना दिमाग और शरीर की काम करने की क्षमता का ओवरऑल स्कोर तैयार करता है। अब तक मेडिकल साइंस में ऐसा कोई पैमाना नहीं था, जो बुढ़ापे को सीधे तौर पर मापने में मदद करे। इंट्रिंसिक कैपेसिटी के जरिए यह देखना मुमकिन होगा कि व्यक्ति का शरीर और दिमाग एक साथ मिलकर कितनी बेहतर तरीके से काम कर पा रहे हैं। 

कैसे चीजों को मिलाकर बनता है इंट्रिंसिक स्कोर?

इंट्रिंसिक कैपेसिटी का स्कोर किसी एक चीज पर निर्भर नहीं होता, बल्कि ये कई चीजों को साथ मिलाकर बनता है। इसमें 5 चीजों पर ध्यान दिया जाता है। पहली सोचने-समझने की समझना, यानी व्यक्ति का दिमाग फैसले लेने में कितना सक्षम है और कितना एक्टिव है। दूसरा है शरीर की ताकत और चाल, जिसमें मांसपेशियों की मजबूती और चलने-फिरने की रफ्तार देखी जाती है। 

तीसरा नजर और सुनने की क्षमता है यानी आंखो की रोशनी और सुनने की क्षमता कितनी मजबूत है। चौथा है व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य और मूड और आखिरी है एनर्जी और स्ट्रेस झेलने की क्षमता। इन चीजों को मिलाकर इंट्रिंसिक स्कोर बनता है। हालांकि, बुजुर्गों के स्वास्थ्य की इनमें से कुछ जांचें पहले भी की जाती थीं, लेकिन इस पैमाने में इन्हें एक साथ देखा जाता है।  

बीमारी से पहले ही मिल सकेंगे शुरुआती संकेत

फिलहाल डॉक्टर्स के पास जाकर इंट्रिंसिक कैपेसिटी मापने के लिए कोई अलग से टेस्ट करवाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि भविष्य में बुजुर्ग मरीजों में इन सभी क्षमताओं को समय-समय पर ट्रैक किया जाए।

कई बार ऐसा होता है कि किसी बीमारी के पूरी तरह सामने आने से पहले ही व्यक्ति की क्षमताओं में गिरावट दिखने लगती है। अगर इन संकेतों को वक्त पर पकड़ लिया जाए, तो समय रहते सही इलाज या बचाव के कदम उठाए जा सकते हैं। 

फ्रांस और अमेरिका में चल रही खास स्टडी

दुनियाभर में इंट्रिंसिक कैपेसिटी को लेकर अलग-अलग स्टडीज की जा रही हैं। फ्रांस में हुई एक स्टडी में बुजुर्गों से नियमित आधार पर सवाल पूछे जाते हैं और उनके जवाबों के आधार पर उनकी सेहत का आंकलन किया जाता है और उन्हें सलाह दी जाती है। 

इस प्रक्रिया में अगर किसी बुजुर्ग के स्कोर में गिरावट आती है, तो उसे तुरंत डॉक्टर या ट्रेंड नर्स के पास देखभाल और सलाह के लिए भेजा जाता है। अमेरिका और फ्रांस में चल रही ये स्टडी बुजुर्गों की सेहत की देखभाल का पूरा तरीका बदल सकती है।