हर उम्र का वर्कआउट है अलग: 20s में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग तो 50 के बाद योग और वॉकिंग से मिलता है फायदा
डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के अनुसार, उम्र के हिसाब से एक्सरसाइज की तीव्रता और अवधि अलग-अलग होती है। सही व्यायाम से स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं, जबकि अधिक एक् ...और पढ़ें

हर उम्र के लिए अलग वर्कआउट प्लान (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
डब्ल्यूएचओ ने उम्र के अनुसार व्यायाम की गाइडलाइन दी है
बच्चों से बुजुर्गों तक के लिए अलग-अलग वर्कआउट जरूरी
सही व्यायाम से स्वास्थ्य सुधरता है, अधिक से बचें
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कई बार ऐसा देखा है कि एक्सरसाइज करने के बाद भी थकान या शरीर में दर्द की शिकायत लोग करते हैं। ऐसा गलत एक्सरसाइज करने या फिर उम्र के अनुसार एक्सरसाइज ना करने से भी हो सकता है। एक्सरसाइज की तीव्रता और उसे कितनी देर करना है उसका संबंध उम्र से भी है और इसे लेकर डब्लूएचओ की एक गाइडलाइन भी है। इस आर्टिकल में एज ग्रुप के अनुसार एक्सरसाइज के टाइम शेड्यूल के बारे में हम जानेंगे।
5 से 17 साल के बच्चे
हर दिन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज रफ्तार एरोबिक एक्टिविटी करने की सलाह इस एज ग्रुप के बच्चों को दी जाती है। हड्डियों को मजबूत बनाने वाली एक्टिविटी भी शामिल की जानी चाहिए जैसे रस्सी कूदना, रनिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग।
18 साल से 64 साल
150 से 300 मिनट की मीडियम गति की एरोबिक एक्टिविटी या फिर 75 से 150 मिनट की तेज गति की एरोबिक एक्टिविटी की जा सकती है। डब्लूएचओ के अनुसार हफ्ते में दो दिन मसल्स को मजबूती देने वाली एक्टिविटिज शामिल की जानी चाहिए।
65 साल और उससे अधिक
इस उम्र के लोग 18 से 64 साल वाली गाइडलाइन के अनुसार एक्सरसाइज कर सकते हैं। हफ्ते में दो दिन मसल्स स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। बैलेंस बनाने के लिए आपको हर दिन की अपनी एक्सरसाइज में ऐसे मूवमेंट शामिल करने चाहिए, जो आपको गिरने से बचाने में मदद करें।
खबरें और भी
क्रॉनिक बीमारी या डिसेबिलिटी
ऐसे लोगों के लिए डब्लूएचओ की सलाह है कि वो बाकी एज ग्रुप की तरह एक्सरसाइज कर सकते हैं, लेकिन एक्सपर्ट की निगरानी में।
एक्सराइज करने के ये होते हैं फायदे
- इम्यून सिस्टम बेहतर होता है
- हार्ट और ब्रेन हेल्थ में सुधार होता है
- गिरने और बैलेंस खोने का खतरा कम हो जाता है
- रात को अच्छी नींद आती है
इन बातों से पता चलता है आप ज्यादा एक्सरसाइज कर रहे हैं
- एक्सरसाइज में परफॉर्मेंस बढ़ने की बजाय कम होने लगे
- हर समय थकान महसूस हो
- चिड़चिड़ापन आ जाए
- नींद आने में परेशानी हो
- बार-बार इंजरी या सूजन की समस्या हो रही हो
- ओवरयूज इंजरी का खतरा बढ़ जाए
- बार-बार सर्दी-जुकाम हो रहा हो
- वजन कम होने लगे