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दिमाग में चल रही हो उथल-पुथल, तो सही प्लेलिस्ट बदल सकती है आपका मूड; जानिए कैसे काम करती है म्यूजिक थेरेपी

Updated: Sun, 16 Aug 2026 12:27 PM (IST)

एक प्याली चाय, एकल यात्रा, प्रियजनों से बातें या प्रकृति के बीच कुछ पल ठहर जाना... मन को सुकून मिल जाए, ऐसी कई गतिविधियों की सूची में अलग रंग भरती है ...और पढ़ें

जानिए कैसे संगीत बदल सकता है आपकी मनोदशा (Image Source: AI-Generated)

जानिए कैसे संगीत बदल सकता है आपकी मनोदशा (Image Source: AI-Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

सीमा झा, नई दिल्ली। जेल से रिहा होने के बाद राजू पहले जैसा नहीं रहा। फिल्म 'गाइड' का यह किरदार जिंदगी के उतार-चढ़ाव से बुरी तरह थक चुका था। 'यहां कौन है तेरा, मुसाफिर जाएगा कहां, दम लेने घड़ी भर यह छैया पाएगा कहां' नेपथ्य में बजने वाला यह गीत उसकी मनोदशा को गहरे उभार रहा था। पर यह गीत स्वयं में एक दर्शन है। यह उन सबके लिए है जो समय से आगे निकलने की अंधी दौड़ में फंसे हैं। उन्हें भी चाहिए वही घनी छांव, जहां ठहरकर उनके मन को मिले आराम।

सुकून, शांति या एकांत जैसे शब्द पहले से अधिक सुने जा रहे हैं। इंटरनेट मीडिया पर हैशटेग से इसका सहज अनुमान लगा सकते हैं। सुकून की यह छांव प्लेलिस्ट में भी तलाशी जा रही है। दफ्तर जाते समय या शाम घर लौटने के बाद; दिन की शुरुआत के समय या रोजमर्रा की चिंताओं से राहत पाने के लिए लोग इसे एक छोटे ब्रेक की तरह प्रयोग कर रहे हैं।

एप्स की लोरी

दिन भर काम करने के बाद थककर चूर हो जाना और फिर रात की गहरी मीठी नींद, जो कभी स्वाभाविक सी चीज हुआ करती थी अब दुर्लभ हो गई है। अच्छी नींद पाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। प्रीमियम स्तर के मैट्रेस से लेकर डाटा संचालित स्लीप टैकर्स तक के प्रयोग हो रहे हैं। वेकफिट मैट्रेस के इंडियन स्लीप स्कोर बोर्ड के अनुसार, इन दिनों 85 प्रतिशत भारतीय सोते समय फोन प्रयोग करते हैं। पर्सनल एआइ साउंड और स्लीपिंग ऐप जैसे काम, नींद, हेडस्पेस की मांग बढ़ती जा रही हैं। इनको असरदार बनाती हैं एक खास तरह की धुन, आवृत्तियों के प्रयोग। दरअसल, कम डेसिबल व विशेष आवृत्ति से तैयार धुन उस लोरी की तरह हैं, जो तुरंत तनाव से राहत दिलाने व नींद लाने का माद्दा रखती हैं।

शास्त्रीय गायन के गहरे प्रभाव

न्यूरोलाजिस्ट डॉ. विनय गोयल के अनुसार, इन दिनों डिजिटल डिमेंशिया बढ़ रहा है। आप रोजाना शास्त्रीय संगीत सुनें या वाद्य यंत्र बजाएं तो भूलने का यह खतरा कम हो सकता है। स्टेनफोर्ड स्कूल आफ मेडिसिन का शोध भी बताता है कि शास्त्रीय संगीत सुनने से नई सूचनाएं ग्रहण करने में आसानी होती है। इन दिनों म्यूजिक थेरेपी यानी संगीत की मदद से मानसिक सेहत से जुड़ी परेशानियां दूर करने में भी मदद मिल रही है।

म्यूजिक थेरेपी करने से पूर्व व्यक्ति के म्यूजिक बैकग्राउंड यानी वह किस तरह का संगीत सुनता है, इसका पता लगाया जाता है। इसके बाद निश्चित अवधि व समय की 'सांगीतिक खुराक' दी जाती है। यह खास आवृत्ति व टोन वाली धुन से तैयार की जाती है। वहीं, आइआइटी मंडी के अध्ययन के अनुसार, भारतीय शास्त्रीय संगीत सुनने से ब्रेन ऐक्टिविटी बेहतर होती है। जैसे राग जोगिया से एकाग्र होने में मदद मिलती है। इंटरव्यू या किसी परीक्षा से पूर्व राग दरबारी सुनना लाभदायक है।

तो इसलिए संगीत है मूड चेंजर

कोई धुन सुनने के बाद दिमाग का आडिटरी कार्टेक्स तुरंत इसे प्रोसेस करता है। इसके बाद भावनाओं की देखरेख करने वाला हिस्सा अमिगडाला और स्मृति का संग्रहण करने वाला हिस्सा हिप्पोकेंपस दोनों सक्रिय हो जाते हैं। तब कोई गीत प्रसन्नता या उदासी महसूस कराता है और मूड तुरंत बदल जाता है।

प्लेलिस्ट चुनते समय रखें ध्यान

  • शास्त्रीय संगीत, पियानो, एंबिएंट गिटार जैसी हल्की-फुल्की धुनें मन के भटकाव को रोक सकते हैं।
  • प्लेलिस्ट में नियमित रूप से नए ट्रैक जोड़ें और पुराने हटा दें।
  • लगातार एक ही गाना सुनने से समय के साथ उनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है।
  • म्यूजिक एप्स में मौजूद उन सुविधाओं का उपयोग करें, जो मनोदशा के आधार पर गाने सुझाती हैं।
  • मूड बदलने वाली प्लेलिस्ट आपको भावनाएं नियंत्रित करने और तनाव कम करने में मदद कर सकती है।

बुझते मन को मिले रोशनी

आत्मविश्वास की कमी और सेल्फ वेलिडेशन यानी सम्मान या प्रशंसा पाने की इच्छा मन पर भारी दबाव पैदा कर रही है। ओवरथिंकिंग एक नई परेशानी है। इन सबके लिए म्यूजिक थेरेपी अच्छा विकल्प है। रोजाना बांसुरी, सितार सुनने की आदत डालें। तेज व शोर पैदा करने वाले संगीत से दूरी बनाएं तो आप स्वयं को रोजमर्रा के तनाव से राहत दिला सकते हैं।

- डॉ. शांभवी दास, निदेशक, मनोनाद सेंटर ऑफ म्यूजिक थेरेपी

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