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    नींद की कमी से कमजोर हो रहा है दिमाग का 'ब्लड-ब्रेन बैरियर', पढ़ें क्या कहती है नई रिसर्च

    Updated: Sat, 20 Jun 2026 08:35 AM (IST)

    एक नए अध्ययन के अनुसार, नींद में बार-बार खलल पड़ने से दिमाग का 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती ह ...और पढ़ें

    नींद में बार-बार खलल पड़ना दिमाग के लिए खतरनाक (Image Source: AI-Generated)

    नींद में बार-बार खलल पड़ना दिमाग के लिए खतरनाक (Image Source: AI-Generated)

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    प्रेट्र, नई दिल्ली। हम सभी जानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए एक सुकून भरी नींद लेना कितना जरूरी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ठीक से न सो पाना आपके दिमाग को कितनी गहराई तक नुकसान पहुंचा सकता है?

    हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नींद में बार-बार खलल पड़ने से हमारे दिमाग के 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' को भारी नुकसान पहुंचता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह रिसर्च क्या कहती है।

    sleep deprivation blood brain barrier

    (Image Source: AI-Generated)

    दिमाग का 'सिक्योरिटी गार्ड' है ब्लड-ब्रेन बैरियर

    'ब्लड-ब्रेन बैरियर' को आप अपने दिमाग का एक बेहद चुस्त सिक्योरिटी गार्ड या एक खास फिल्टर मान सकते हैं। यह दिमाग की रक्त वाहिकाओं के चारों ओर कोशिकाओं की एक परत होती है।

    इसका काम क्या है?

    यह बहुत ही चुनिंदा चीजों को ही अंदर जाने देता है। यह दिमाग तक जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व तो पहुंचाता है, लेकिन खतरनाक बैक्टीरिया, विषैले पदार्थों और ज्यादातर दवाइयों को बाहर ही रोक देता है। इस तरह यह हमारे दिमाग को गंभीर नुकसान से बचाता है।

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    नींद में खलल पड़ने से क्या होता है असर?

    'लैबमेड डिस्कवरी' पत्रिका में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, जब हमारी नींद पूरी नहीं होती या उसमें बाधा आती है, तो इस बैरियर को नुकसान पहुंचता है। शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया है कि इस बैरियर के डैमेज होने का सीधा संबंध हमारी सोचने-समझने की क्षमता में कमी से है। इसके कारण अल्जाइमर जैसी बीमारी और दिमाग की नसों को प्रभावित करने वाली कई अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

    कैसे कमजोर पड़ता है यह बैरियर?

    शोधकर्ताओं ने बताया कि जब ब्लड-ब्रेन बैरियर को नुकसान पहुंचता है, तो दो मुख्य परेशानियां होती हैं:

    • बढ़ी हुई पारगम्यता: कोशिकाओं के बीच की जगह से पानी, आयन और छोटे अणुओं की आवाजाही जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है।
    • सफाई में रुकावट: दिमाग से बेकार पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया में बाधा आती है।
    • इस नुकसान के पीछे मुख्य रूप से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, न्यूरोइन्फ्लेमेशन और आंत के माइक्रोबायोम का असंतुलन जैसे कारण शामिल पाए गए हैं।

    सोने-जागने का बिगड़ा हुआ चक्र भी है जिम्मेदार

    हमारे शरीर की एक अपनी घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहते हैं। जब सोने और जागने के इस प्राकृतिक चक्र का तालमेल बिगड़ जाता है, तो यह भी ब्लड-ब्रेन बैरियर को तोड़ने का काम करता है। इसके अलावा, नींद से जुड़ी एक खास बीमारी- ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण भी इस बैरियर को नुकसान पहुंचने के प्रमाण मिले हैं।

    याददाश्त पर सीधा असर

    दिमाग का वह हिस्सा जो हमारी याददाश्त से जुड़ा होता है, उसे 'हिप्पोकैंपस' कहते हैं। अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अगर हिप्पोकैंपस में ब्लड-ब्रेन बैरियर टूटता है, तो यह साफ तौर पर हमारी याद रखने और सोचने-समझने की क्षमता में कमी का संकेत हो सकता है।

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