सोशल मीडिया की नेगेटिविटी आपके दिमाग को कैसे बना रही है बीमार?
सोशल मीडिया पर दिनभर नेगेटिव कंटेंट देखने के कारण दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। इसके कारण एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद न आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ...और पढ़ें

नेगेटिव कंटेंट डाल रहा है आपके दिमाग पर असर (Picture Courtesy: AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में हम सुबह उठते ही सबसे पहले अपना फोन चेक करते हैं। स्क्रॉल करते हुए हमारी नजर कभी किसी राजनीतिक विवाद पर पड़ती है, कभी किसी हादसे की खबर पर, तो कभी नफरत भरे कमेंट्स पर।
जाने-अनजाने हम दिन भर इस नेगेटिविटी के घेरे में रहते हैं। हो सकता है कि आपको लगे कि यह सिर्फ एक पोस्ट है, लेकिन आपका दिमाग इसे एक खतरे की तरह देखता है। आइए समझते हैं कि सोशल मीडिया की यह नेगेटिविटी आपके मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह प्रभावित कर रही है।
बढ़ता स्ट्रेस हार्मोन
जब हम लगातार हिंसा, दुख भरी खबरें या गुस्से वाली बहसें देखते हैं, तो हमारा दिमाग कोर्टिसोल हार्मोन रिलीज करने लगता है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली नकारात्मकता दिमाग को यह संकेत देती है कि हम किसी खतरे में हैं, जिससे हम हर वक्त तनाव और घबराहट महसूस करते हैं।
डूमस्क्रॉलिंग की लत
क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप बुरी खबरें देख रहे हैं और चाहकर भी रुक नहीं पा रहे? इसे डूमस्क्रॉलिंग कहते हैं। हमारा दिमाग बुरी खबरों को ज्यादा अहमियत देता है ताकि हम सतर्क रह सकें। हालांकि, सोशल मीडिया पर यह एक एंडलेस साइकिल बन जाता है, जिससे नींद की कमी, सिरदर्द और मानसिक थकान होने लगती है।
खबरें और भी

(AI Generated Image)
सोशल कंपेरिजन और हीन भावना
नेगेटिविटी सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं है। दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखकर खुद को कम करके आंकना भी एक नकारात्मक अनुभव है। जब हम अपनी तुलना दूसरों के फिल्टर वाली जिंदगी से करते हैं, तो हमारे भीतर लो-सेल्फ एस्टीम और जलन पैदा होती है। यह धीरे-धीरे डिप्रेशन का रूप ले सकती है।
रेज बेटिंग
आजकल सोशल मीडिया पर रेज बेटिंग का भी खूब ट्रेंड है, जिसमें जानबूझकर ऐसा कंटेंट बनाया जाता है जिससे आपको गुस्सा आए और आप उस पोस्ट पर कमेंट करें। एंग्जमेंट बढ़ाने के लिए लोग ऐसा कंटेंट बना रहे हैं, लेकिन इसके कारण आपको गुस्सा आता है, बीपी बढ़ता है और स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होता है।
दिमाग पर होने वाले अन्य गंभीर असर-
- फोकस में कमी- लगातार बदलती और नकारात्मक जानकारी हमारे अटेंशन को कम कर देती है। हम किसी एक काम पर पूरी तरह फोकस नहीं कर पाते।
- सहानुभूति का खत्म होना- जब हम रोज बहुत सारी हिंसा या दुखद कंटेंट देखते हैं, तो हमारा दिमाग उनकी तरफ सुन्न हो जाता है। हम दूसरों के दुख के लिए संवेदनहीन होने लगते हैं।
- चिड़चिड़ापन- सोशल मीडिया की बहसें और नफरत भरे शब्द हमारे व्यवहार में भी दिखने लगते हैं। हम छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं।