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    कैंसर के इलाज में बड़ी कामयाबी: IIT बॉम्बे ने खोजा टी-सेल्स को सुरक्षित रखने का नया तरीका

    Updated: Sat, 07 Feb 2026 10:05 AM (IST)

    कैंसर के खिलाफ लड़ाई में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नई उम्मीद जगाई है। अक्सर इलाज के दौरान सबसे बड़ी चुनौती शरीर के रक्षक सैनिकों यानी 'इम्यून सेल्स' को ...और पढ़ें

    कैंसर इलाज को और भी कारगर बनाएगी IIT बॉम्बे की यह नई तकनीक (Image Source: Freepik)

    कैंसर इलाज को और भी कारगर बनाएगी IIT बॉम्बे की यह नई तकनीक (Image Source: Freepik) 

    HighLights

    1. IIT बॉम्बे ने कैंसर के इलाज में नया तरीका विकसित किया है

    2. प्रयोगशाला में इम्यून सेल्स को सुरक्षित रिकवर करने की तकनीक

    3. टी-सेल थेरेपी की सफलता दर बढ़ाने में सहायक होगी

    आईएएनएस, नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने कैंसर के उपचार की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने प्रयोगशाला में तैयार की गई 'इम्यून सेल्स' को सुरक्षित रूप से रिकवर करने के लिए एक बेहद सरल और प्रभावी विधि विकसित की है। यह नई तकनीक विशेष रूप से टी-सेल आधारित कैंसर उपचार के लिए बहुत मददगार साबित हो सकती है।

    Improving Immunotherapy

    (Image Source: Freepik) 

    क्या होती है टी-सेल थेरेपी?

    कैंसर से लड़ने के लिए इम्यूनोथेरेपी, जैसे कि 'कार टी-सेल' (CAR-T) का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले मरीज के खून से टी-सेल्स (जो एक खास तरह की इम्यून सेल्स हैं) को निकाला जाता है। इसके बाद, प्रयोगशाला में इन सेल्स को मॉडिफाई किया जाता है और उनकी संख्या बढ़ाई जाती है। अंत में, इन शक्तिशाली सेल्स को वापस मरीज के ब्लडस्ट्रीम (रक्त प्रवाह) में डाल दिया जाता है, ताकि वे कैंसर की कोशिकाओं से लड़ सकें और उन्हें खत्म कर सकें।

    सेल्स को जीवित रखना सबसे बड़ी चुनौती

    चूँकि इन टी-सेल्स को शरीर के बाहर विकसित किया जाता है, इसलिए इन्हें बहुत सावधानी से इकट्ठा करना पड़ता है। यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि जब इन्हें मरीज के शरीर में वापस भेजा जाए, तो ये जीवित हों और पूरी तरह से अपना काम कर सकें। इस थेरेपी की सफलता इसी बात पर निर्भर करती है कि हम इन सेल्स को विकसित करने के बाद उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस कैसे प्राप्त करते हैं।

    शोधकर्ताओं ने क्या नया किया?

    प्रोफेसर प्रकृति तयालिया और उनकी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने शरीर के अंदर के प्राकृतिक वातावरण की हूबहू नकल करने के लिए एक विशेष तकनीक अपनाई। टीम ने 'इलेक्ट्रोस्पिनिंग' नामक प्रक्रिया का उपयोग करके एक खास तरह का ढांचा तैयार किया, जो इन सेल्स को बेहतर तरीके से रिकवर करने में मदद करता है।

    खबरें और भी

    प्रोफेसर तयालिया ने इस बारे में कहा कि "सेल रिकवरी सुनने में तो बहुत आसान लगती है, लेकिन असल में यह इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।" उन्होंने बताया कि अगर हमारे पास पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ कोशिकाएं नहीं होंगी, तो हम न तो उनका सही परीक्षण कर पाएंगे और न ही उनका उपयोग मरीज के इलाज के लिए कर पाएंगे। IIT बॉम्बे की यह नई खोज कैंसर उपचार को और अधिक सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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