40 से कम उम्र की महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है यह कैंसर? डॉक्टर से बताई इसकी असली वजह
ओवेरियन कैंसर अब सिर्फ बड़ी उम्र की बीमारी नहीं रही। अब यह कम उम्र की महिलाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। आइए जानते हैं इस गंभीर बीमारी के कुछ शुरु ...और पढ़ें

महिलाओं की मेंटल हेल्थ को कैसे प्रभावित कर रहा है यह कैंसर? जानें यहां (Image Credit : Canva)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि ओवेरियन कैंसर सिर्फ बड़ी उम्र की महिलाओं को ही होता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। 40 साल से कम उम्र की महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे ज्यादा डरने वाली बात यह है कि ज्यादातर मामलों में इस बीमारी का पता बहुत देर से चलता है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है। इसलिए समय रहते लक्षणों की पहचान करना जरूरी है।
डॉक्टर कनिका बत्रा मोदी (एसोसिएट डायरेक्टर और क्लिनिकल लीड, गाइनेकोलॉजी ऑन्कोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत) का कहना है कि हाल के सालों में 20 और 30 उम्र की महिलाओं में भी ओवेरियन कैंसर के लक्षण नजर आए हैं।
डॉक्टर आगे बताती हैं कि हाल ही में 33 साल की एक महिला उनके पास मां बनने का सपना लेकर आई थी। उसे सिर्फ ब्लोटिंग, थकान और पेट से जुड़ी परेशानी महसूस हो रही थी। ये लक्षण इतने आम थे कि किसी को भी गंभीर बीमारी का शक नहीं होता, लेकिन जांच के बाद पता चला कि उसे ओवेरियन कैंसर है।
क्यों देर से पता चलता है?
ओवेरियन कैंसर के लक्षण शुरू में बहुत सामान्य होते हैं, जैसे ब्लोटिंग, जल्दी पेट भर जाना, पीरियड्स का अनियमित होना और पेट से जुड़ी समस्याएं। महिलाएं इन लक्षणों को अक्सर स्ट्रेस, गैस, हार्मोन की समस्या या पीसीओएस समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। फिलहाल ओवेरियन कैंसर की पहचान करने के लिए कोई स्क्रीनिंग टेस्ट मौजूद नहीं है, इसलिए यह बीमारी जल्दी पकड़ में नहीं आती।
ओवेरियन कैंसर के क्या कारण हैं?
कुछ मामलों में यह जेनेटिक कारणों से भी जुड़ा होता है। अगर परिवार में पहले से ही किसी को कैंसर है, तो बच्चों में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। BRCA म्यूटेशन या लिंच सिंड्रोम जैसे हेरेडिटरी कैंसर सिंड्रोम युवा पीढ़ी में ओवेरियन कैंसर का कारण बनता है। कई बार महिलाओं को खुद नहीं पता होता कि उनमें यह खतरा मौजूद है।
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अब जांच और काउंसलिंग के जरिए लोगों को बचाव करने में मदद मिलती है। डॉक्टर का कहना है कि कुछ मामलों में लगातार स्ट्रेस, शरीर में सूजन और बिगड़ती लाइफस्टाइल भी कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है। खासतौर पर यह शहरी लोगों में ज्यादा असर डाल सकता है।
महिलाओं की मेंटल हेल्थ भी होती है प्रभावित

(Image Credit : Jagran)
कम उम्र में इसकी चपेट में आने से यह सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि महिलाओं को इमोशनली रूप से भी प्रभावित करती है। डॉक्टर ने बताया कि उनके कई मरीज इस बीमारी के साथ-साथ फर्टिलिटी, बॉडी इमेज और जीवन में हुए अचानक बदलाव को लेकर परेशान रहती हैं।
युवा महिलाओं में कम होने वाली इस बीमारी की वजह से उन्हें कम उम्र में ही मेनोपॉज, कीमोथेरेपी से होने वाली थकान और घर-परिवार को अपनी बीमारी समझाने में होने वाली मुश्किलों जैसे हालातों का सामना करना पड़ता है। आजकल कई मामलों में ऐसे ऑपरेशन और थैरेपी भी किए जा रहे हैं जिनसे फर्टिलिटी को बचाया जा सकता है।
महिलाओं के लिए जरूरी टिप्स
अगर लगातार ब्लोटिंग, बिना वजह वजन कम होना या पेल्विक दर्द महसूस हो रहा है, तो तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें। अगर परिवार में ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर का इतिहास है, तो जेनेटिक काउंसलिंग जरूर लें।