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नींद की कमी और चिंता कर रही है आपके शरीर को अंदर से कमजोर, पढ़ें क्या कहती है नई स्टडी

Published: Sat, 03 Jan 2026 09:10 AM (IST)

क्या आप अक्सर रातों को करवटें बदलते रहते हैं या छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज्यादा चिंता करते हैं? अगर हां, ...और पढ़ें

अनिद्रा और चिंता का कमजोर इम्यून सिस्टम से संबंध, बीमारियों का खतरा (Image Source: Freepik)

अनिद्रा और चिंता का कमजोर इम्यून सिस्टम से संबंध, बीमारियों का खतरा (Image Source: Freepik) 

HighLights

  1. अनिद्रा और चिंता इम्यून कोशिकाओं को कम करती है

  2. 'नेचुरल किलर सेल्स' की संख्या में गिरावट देखी गई

  3. कमजोर इम्यून सिस्टम बीमारियों का खतरा बढ़ाता है

प्रेट्र, नई दिल्ली। अनिद्रा या चिंता का संबंध इम्यून कोशिकाओं की कम संख्या से हो सकता है, जिससे इम्यून सिस्टम की प्रभावशीलता कम हो जाती है । एक अध्ययन में युवा महिलाओं पर यह पाया गया है। चिंता और अनिद्रा को इम्यून सिस्टम को कमजोर करने और बीमारियों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए जाना जाता है। नींद न आने से मस्तिष्क पर असर पड़ता है, जिससे चिंता और तनाव (हार्मोन का बढ़ना) बढ़ता है। तनाव और चिंता की वजह से सोने में और मुश्किल होती है, जिससे नींद का चक्र बिगड़ जाता है।

सऊदी अरब के विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि इनमें से किसी एक के लक्षणों का अनुभव करने से 'नेचुरल किलर सेल्स' की संख्या कम हो जाती है, ये कोशिकाएं रोगाणुओं या संक्रमित कोशिकाओं जैसे खतरों को नष्ट करती हैं। यह अध्ययन जो जर्नल फ्रंटियर्स इन इम्यूनोलाजी में प्रकाशित हुआ, ने 60 युवतियों का परीक्षण किया, जिन्होंने प्रश्नावली भरी और अनिद्रा या चिंता के लक्षणों की रिपोर्ट की। प्रतिभागियों के ब्लड के नमूनों का विश्लेषण किया गया, ताकि किलर कोशिकाओं की संख्या का पता लगाया जा सके।

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(Image Source: Freepik) 

नेचुरल किलर कोशिकाओं की कुल संख्या कम

परिणामों से पता चला कि अनिद्रा के लक्षणों का अनुभव करने वाली युवा महिलाओं में नेचुरल किलर कोशिकाओं की कुल संख्या कम थी। चिंता के लक्षणों का अनुभव करने वालों में शरीर में प्रवाहित होने वाली नेचुरल किलर कोशिकाओं की संख्या भी कम पाई गई।

शोध लेखकों ने लिखा, परिणामों से पता चला कि 75 प्रतिशत प्रतिभागियों ने विभिन्न गंभीरता स्तरों पर जीएडी - 7 (जनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसआर्डर) के लक्षणों का अनुभव किया और 50 प्रतिशत अधिक ने अनिद्रा की रिपोर्ट की। दिलचस्प बात यह है कि जीएडी - 7 के लक्षणों वाले छात्रों में सामान्य छात्रों की तुलना में प्रवाहित होने वाली एनके (नेचुरल किलर) कोशिकाओं का प्रतिशत और संख्या कम थी।

इसके अलावा, अनिद्रा से पीड़ित छात्रों में उच्च जीएडी - 7 स्कोर का कुल पेरिफेरल एनके कोशिकाओं के अनुपात के साथ नकारात्मक संबंध पाया गया। मध्यम और गंभीर चिंता के लक्षणों वाले प्रतिभागियों में शरीर में प्रवाहित होने वाली नेचुरल किलर कोशिकाओं का प्रतिशत काफी कम था, जबकि न्यूनतम या हल्के चिंता के लक्षणों वाले छात्रों में नेचुरल किलर कोशिकाओं में कोई महत्वपूर्ण कमी नहीं देखी गई।

यह बीमारियों के प्रति संवेदनशील बना सकता है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना और उचित नींद लेना अत्यंत आवश्यक है। बता दें, इस शोध में 60 युवतियों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने इन प्रतिभागियों से प्रश्नावली भरवाई और उनके ब्लड के नमूनों का विश्लेषण किया।

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(Image Source: Freepik) 

कैंसर की रोकथाम में सहायक

अनिद्रा के लक्षणों वाले छात्रों में उच्च चिंता स्कोर का कुल पेरिफेरल नेचुरल किलर कोशिकाओं की संख्या के साथ संबंध पाया गया। शोधकर्ताओं ने कहा कि किलर कोशिकाओं की कम संख्या इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकती है, जिससे बीमारियों, कैंसर और मानसिक विकारों, जिसमें अवसाद भी शामिल है, का जोखिम बढ़ सकता है। टीम ने कहा कि ये निष्कर्ष चिंता और अनिद्रा के शारीरिक परिणामों को बेहतर समझने में मदद कर सकते हैं और इम्यून से संबंधित विकारों और कैंसर की रोकथाम में सहायक हो सकते है।

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