हाथ-पैर की अकड़न को न समझें मामूली, डॉक्टर ने बताया युवाओं में क्यों बढ़ रहा है पार्किंसंस का खतरा
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युवाओं में भी बढ़ रहा है पार्किंसंस का खतरा: भूलकर भी न करें इन 5 शुरुआती संकेतों की अनदेखी (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आमतौर पर जब भी हम 'पार्किंसंस' बीमारी का नाम सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में किसी बुजुर्ग व्यक्ति की तस्वीर उभरती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह बीमारी अब तेजी से युवाओं को भी अपना शिकार बना रही है?
गुरुग्राम स्थित मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS) के चेयरमैन डॉ. प्रवीण गुप्ता के अनुसार, अगर समय रहते इस बीमारी के लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो मरीज की जिंदगी को काफी हद तक सामान्य और बेहतर बनाया जा सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि युवाओं में इसके क्या लक्षण हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

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क्या है पार्किंसंस डिजीज?
डॉ. गुप्ता बताते हैं कि पार्किंसंस नसों और दिमाग से जुड़ी एक बीमारी है। इसमें हमारे दिमाग के उन हिस्सों में 'डोपामिन' नाम के एक जरूरी केमिकल की कमी होने लगती है, जो शरीर के मूवमेंट और बैलेंस को कंट्रोल करते हैं। युवाओं में इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जिस वजह से अक्सर वे इसे कोई आम समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर भारी पड़ सकती है।
कम उम्र में पार्किंसंस के 5 बड़े संकेत
अगर आप युवा हैं और शरीर में नीचे दिए गए बदलाव महसूस कर रहे हैं, तो सावधान हो जाएं:
- हाथों में हल्का कंपन: अगर खाली बैठे या आराम करते समय आपके हाथों या उंगलियों में बिना किसी वजह के हल्का कंपन महसूस हो, तो इसे महज थकान या कमजोरी समझने की गलती न करें। यह पार्किंसंस का पहला संकेत हो सकता है।
- मांसपेशियों में अकड़न: सुबह सोकर उठने के बाद या काफी देर तक एक ही जगह पर बैठे रहने के बाद अगर शरीर या मांसपेशियों में बहुत ज्यादा जकड़न महसूस होती है, तो यह चिंता का विषय है। इससे आपके रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी मुश्किल हो सकते हैं।

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- चलने-फिरने में परेशानी और संतुलन बिगड़ना: चलते समय लड़खड़ाना, शरीर का बैलेंस न बन पाना, चलते-चलते अचानक छोटे कदम लेना या मन में बार-बार गिरने का डर बना रहना इस बीमारी की शुरुआत हो सकती है।
- लिखावट में बदलाव: यह एक ऐसा लक्षण है जिस पर अक्सर किसी का ध्यान नहीं जाता। अगर आपकी हैंडराइटिंग पहले के मुकाबले अचानक छोटी होती जा रही है और अक्षर असमान बन रहे हैं, तो यह भी पार्किंसंस की तरफ इशारा करता है।
- चेहरे पर हाव-भाव की कमी: अगर किसी व्यक्ति के चेहरे पर एक्सप्रेशंस कम होने लगें और वह हर समय बहुत गंभीर या उदास दिखने लगे, तो यह उसका स्वभाव नहीं, बल्कि दिमाग में हो रहे न्यूरोलॉजिकल बदलावों का नतीजा हो सकता है।
युवाओं में क्यों बढ़ रहा है यह खतरा?
डॉ. गुप्ता के अनुसार, सिर्फ बढ़ती उम्र ही नहीं बल्कि आज के युवाओं का लाइफस्टाइल भी इस बीमारी को बुलावा दे रही है। इसके मुख्य कारण हैं:
- तेज रफ्तार वाली भागदौड़ भरी जिंदगी
- हद से ज्यादा मानसिक तनाव
- नींद पूरी न होना
- बढ़ता प्रदूषण
- कुछ मामलों में जेनेटिक कारण भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं।
बचाव और सही इलाज
डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि पार्किंसंस अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। हालांकि, मेडिकल साइंस में अभी तक इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का कोई परमानेंट इलाज मौजूद नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह से कंट्रोल जरूर किया जा सकता है।
मैनेजमेंट के तरीके:
- सही समय पर ली गई दवाएं
- नियमित फिजियोथेरेपी
- लाइफस्टाइल में बदलाव (जैसे - रोज एक्सरसाइज करना)
- संतुलित और पौष्टिक डाइट
- तनाव को कंट्रोल करना
क्या करें?
अगर आपको या आपके परिवार में किसी भी युवा को ऊपर बताए गए 5 लक्षणों में से कोई भी संकेत दिखाई देता है, तो बिना देर किए किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। याद रखें, बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ लेना ही इससे जीतने का सबसे सही और प्रभावी तरीका है।