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    सिर्फ हाथ कांपना नहीं है पार्किंसंस का लक्षण! डॉक्टर ने बताए इस बीमारी के छिपे हुए संकेत

    Updated: Fri, 10 Apr 2026 12:59 PM (IST)

    हाथ कांपने के अलावा पार्किंसंस डिजीज के और भी लक्षण होते हैं, जिनके बारे में पता होना जरूरी है। ...और पढ़ें

    पार्किंसंस के लक्षणों की समय पर पहचान है जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

    पार्किंसंस के लक्षणों की समय पर पहचान है जरूरी (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पार्किंसंस डिजीज का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में सबसे पहला ख्याल कांपते हुए हाथों का आता है। ज्यादातर लोग इस बीमारी को इसी लक्षण से जोड़कर देखते हैं। हालांकि, यह इस बीमारी का सबसे जाना-माना लक्षण है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह हमेशा सबसे पहला संकेत नहीं होता? 

    इस बारे में डॉ. संजय पांडेय (हेड ऑफ डिपार्टमेंट, न्यूरोलॉजी, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) बताते हैं कि कई मरीजों में कंपकंपी बिल्कुल भी नहीं होती। पार्किंसंस एक मल्टी-सिस्टम डिसऑर्डर है, जो हमारे शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करता है। इसलिए इसके और भी कई लक्षण होते हैं, जिन्हें बुढ़ापा या थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    धीमी गति और लिखावट में बदलाव

    पार्किंसंस के शुरुआती और सबसे अहम लक्षणों में से एक है ब्रेडिकिनेसिया यानी मूवमेंट का धीमा हो जाना। इसमें मरीज को रोजमर्रा के साधारण काम जैसे कपड़े पहनना, बटन लगाना या चलने में परेशानी महसूस होने लगती है।

    इसका एक दिलचस्प संकेत लिखावट में मिलता है। अगर अक्षरों का आकार पहले के मुकाबले काफी छोटा होने लगे, तो इसे माइक्रोग्राफिया कहा जाता है, जो इस बीमारी का एक बड़ा संकेत है।

    Parkinsons disease symptoms

    (AI Generated Image)

    शरीर की अकड़न और आवाज का धीमा होना

    मांसपेशियों में खिंचाव या अकड़न भी इसका एक अहम लक्षण है। अक्सर लोग इसे जोड़ों का दर्द या बढ़ती उम्र की समस्या मानकर अनदेखा कर देते हैं। इसके अलावा, व्यक्ति की आवाज में बदलाव आने लगता है और वह पहले की तुलना में काफी धीमी या नरम आवाज में बात करने लगता है। चेहरे के हाव-भाव कम हो जाना भी एक शुरुआती संकेत है, जिसे लोग अक्सर पहचान नहीं पाते।

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    वो लक्षण जो दिखाई नहीं देते

    पार्किंसंस केवल शरीर की मूवमेंट को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि इसके कई नॉन-मोटर सिम्टम्स भी होते हैं।

    • सूंघने की शक्ति कम होना- गंध का एहसास कम हो जाना एक बहुत ही शुरुआती संकेत हो सकता है।
    • पेट और नींद की समस्याएं- लगातार कब्ज रहना और नींद में खलल पड़ना भी इसके दायरे में आते हैं।
    • मेंटल हेल्थ- भारतीय अध्ययनों के अनुसार, आधे से ज्यादा मरीज इस बीमारी के दौरान डिप्रेशन या एंग्जायटी का अनुभव कर सकते हैं। 
    • बैलेंस बिगड़ना- जैसे-जैसे बीमारी आगे बढ़ती है, शरीर का बैलेंस बिगड़ने लगता है और मरीज के गिरने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, ये लक्षण बाद के चरणों में ज्यादा दिखाई देते हैं, लेकिन ये बीमारी के बढ़ने के संकेत है।

    भले ही पार्किंसंस को आज पूरी तरह जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन अगर इन लक्षणों को शुरुआत में ही पहचान कर सही समय पर डॉक्टरी सलाह ली जाए, तो मरीज के जीवन की गुणवत्ता को कई सालों तक बेहतर बनाए रखा जा सकता है।