Gen-Z में क्यों बढ़ रही बेचैनी? एक्सपर्ट्स से जानें 'डिजिटल एंग्जायटी' से बचने का अचूक इलाज
आजकल जेन-जी में एंग्जायटी की समस्या काफी ज्यादा बढ़ती जा रही है। एक्सपर्ट बताती हैं कि डिजिटल वर्ल्ड इस बैचेनी का सबसे बड़ा कारण है। ...और पढ़ें

जेन-जी में बढ़ती बेचैनी: डिजिटल एंग्जायटी से कैसे पाएं छुटकारा (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
सोशल मीडिया FOMO और भविष्य का डर एंग्जायटी का मुख्य कारण
डिजिटल डिटॉक्स और तुलना से बचें, मानसिक शांति मिलेगी
ध्यान और आध्यात्मिक जीवनशैली बेचैनी कम करने में सहायक
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इन दिनों लोगों का रहन-सहन और सोच काफी ज्यादा बदल चुकी है। काम का प्रेशर और अन्य जिम्मेदारियां अक्सर लोगों को स्ट्रेस का शिकार बना देती हैं, लेकिन इन दिनों युवाओं यानी जेन-जी के अंदर तनाव और बेचैनी ज्यादा देखने को मिल रहा है।
खासकर 1990 के दशक के आखिर से 2010 के बीच जन्मी यह पीढ़ी कई वजहों से स्ट्रेस का शिकार हो रही है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के बीच पली-बढ़ी यह जनरेशन डिजिटल दुनिया के एक ऐसे 'चक्रव्यूह' में फंसती जा रही है, जिसने अनजाने में उनकी मानसिक शांति छीन ली है। आइए सीनियर साइकोलॉजिस्ट मोनिका शर्मा से जानते हैं क्यों युवाओं में बढ़ रही एंग्जायटी और कैसे करें इसे हैंडिल-
युवाओं में क्यों बढ़ रही बेचैनी?
विशेषज्ञों की मानें, तो जेन-जी की यह एंग्जायटी किसी एक वजह से नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई कारण हैं, जो निम्न हैं-
- सोशल मीडिया और 'FOMO': सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अक्सर दूसरों की सफलता और परफेक्ट लाइफ दिखाता है। इससे युवा अपनी तुलना दूसरों से करने से लगते हैं, जिससे FOMO यानी कुछ छूट जाने का डर पैदा होता है।
- भविष्य का डर: युवाओं पर करियर और समाज का काफी प्रेशर होता है। जिम्मेदारी, नौकरी जाने का डर और बदलती दुनिया युवाओं में 'एंटिसिपेटरी एंग्जायटी' यानी भविष्य की चिंता को बढ़ा रही है।
- सूचनाओं का भारी बोझ: दुनिया भर में चल रहे युद्ध, महामारी और आर्थिक संकट की निगेटिव खबरें लगातार फोन स्क्रीन पर आती रहती हैं, जिससे दिमाग पर बोझ और डर महसूस होने लगता है।
एंग्जायटी से कैसे पाएं राहत?
इस एंग्जायटी से निटपने के लिए सिर्फ दवाइयों के भरोसे रहना काफी नहीं है। मन को शांत करने और अपनी लाइफस्टाइल को थोड़ा आध्यात्मिक (Spiritual) बनाने में है। इसके लिए आप कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं-
- सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली दुनिया पूरी तरह सच नहीं होती। इसलिए अपनी तुलना दूसरों से करना बंद करें।
- पूरा टाइम मोबाइल-लैपटॉप में लगे रहने से एंग्जायटी होना स्वाभाविक है। इसलिए दिन में कुछ घंटे फोन और इंटरनेट से पूरी तरह दूर रहें। अपने परिवार, दोस्तों या खुद के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं।
- बाहरी दुनिया के शोर और एंग्जायटी को खत्म करने के लिए रोज कुछ देर ध्यान करें। इससे अंदर से शांति मिलती है और भविष्य का डर कम होता है।
यह भी पढ़ें- युद्ध और संकट की खबरों से डर रहे हैं बच्चे? पेरेंट्स इन 4 तरीकों से दूर करें उनका तनाव