पसीने के साथ बह तो नहीं रहे शरीर के जरूरी मिनरल्स? डॉक्टर ने बताया क्यों जरूरी हैं इलेक्ट्रोलाइट्स
गर्मी में शरीर को हाइड्रेटेड रखना और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि हाइपोनेट्रेमिया जैसी गंभीर समस्या से बचा जा सके। ...और पढ़ें

सादे पानी से नहीं बुझेगी शरीर की प्यास! (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
सीमा झा, नई दिल्ली। गर्मी के दिनों में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी जरूरी तो है ही, साथ ही इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी आवश्यक है, अन्यथा हाइपोनेट्रेमिया के रूप में एक बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। क्या है हाइपोनेट्रेमिया? क्या है इसका समाधान, किन बातों का रहे ध्यान, बता रही हैं सीमा झा...
इलेक्ट्रोलाइट्स क्यों हैं जरूरी?
गर्मी से बचना है तो रोजाना चार से पांच लीटर पानी पीना चाहिए। यदि आप ऐसा सोच रहे है तो यह एक धारणा है, पूरा सच नहीं। दरअसल, आपको पानी कितना लेना चाहिए यह आपकी शरीर की स्थिति और आपकी क्रियाशीलता पर निर्भर करता है। शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए आमतौर पर सादा पानी ही सबसे अच्छा विकल्प होता है।
दफ्तर में डेस्क पर बैठकर काम करना, हल्की-फुल्की सैर करना या घरेलू कामकाज करते हैं और संतुलित भोजन के साथ पानी लेते रहते हैं तो इससे आप गर्मी से आसान मुकाबला कर सकते हैं, पर आप रोजाना कसरत या अधिक मेहनत वाला काम करते हैं, बाहर धूप में अधिक समय बिताते हैं तो केवल पानी से हाइपोनेट्रिमिया का खतरा रहता है। इससे बचाव के लिए आपको पानी के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत पड़ती है। ध्यान रहे, इलेक्ट्रोलाइट्स को आप केवल पानी से रिप्लेस नहीं कर सकते।
बता दें कि हमारे सामान्य भोजन में भी इलेक्ट्रोलाइट मिल जाते हैं लेकिन अधिक पसीना आने की स्थिति या अधिक समय तक धूप में रहने या किसी अन्य परिस्थिति में आने के बाद इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन जरूरी हो जाता है, अन्यथा सेहत को गंभीर नुकसान हो सकता है। आप बेहोशी या कोमा की स्थिति में भी पहुंच सकते हैं।
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हाइपोनेट्रेमिया है कितना घातक?
हाइपोनेट्रेमिया ऐसी स्थिति है जो रक्त में सोडियम की असामान्य रूप से कम मात्रा के कारण उत्पन्न होती है। सोडियम शरीर की कोशिकाओं में और उसके आसपास पाए जाने वाले पानी की मात्रा को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है। हाइपोनेट्रेमिया किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या से लेकर अत्यधिक पानी पीने के कारण उत्पन्न होती है। ऐसा होने पर, शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है और कोशिकाएं फूलने लगती हैं। यह सूजन कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है और अधिकतम रूप से आपातकालीन परिस्थिति उत्पन्न कर सकती है।
साइकोजेनिक पालीडिप्सिया तो नहीं
प्यास न भी लगे तो खूब पानी पीना चाहिए या अधिक पानी से कोई नुकसान नहीं होता। यदि ऐसा सोचते हैं तो इसे आज ही बदल दें। हमारे पास ऐसे कई ऐसे मरीज आते हैं जो ऐसा ही सोचते हैं। उनमें से कई तो ऐसे होते हैं जो एक दिन में दस लीटर तक पानी पी लेते हैं। बता दें कि दिन भर अधिक पानी पीने की इच्छा एक मानसिक बीमारी है जिसे साइकोजेनिक पालीडिप्सिया कहा जाता है। ऐसे मरीजों में अक्सर नमक की मात्रा कम होती है। वे हमारे पास अक्सर बेहोशी की स्थिति में आते हैं। वास्तव में एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए दो से तीन लीटर पानी पीना काफी है। इसमें दूध, चाय, छाछ, लस्सी सब शामिल है। वहीं यदि कैल्शियम में सीरम कम है और हृदय की समस्या है, किडनी स्टोन है और आप अधिक पानी लेते हैं तो उन्हें अधिक नुकसान हो सकता है। सांस की समस्या और हाथ-पैरों में सूजन हो सकती है जो कई बार अधिक घातक भी हो सकती है। ऐसे में इन मरीजों को पानी के संबंध में भी अपने चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
- डॉ. सुशीला कटारिया, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, मेदांता, गुरुग्राम

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क्यों है हाइड्रेशन महत्वपूर्ण?
शरीर में पानी की कमी न होने से ऊर्जा, एकाग्रता और संपूर्ण स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। काम करना, चलना या छोटे-मोटे काम निपटाना जैसे रोजमर्रा के कार्यों के लिए अक्सर पानी ही काफी होता है, लेकिन जब आपको शारीरिक श्रम अधिक करनी पड़े, जिसमें पसीना आए तो शरीर को पूरी तरह से हाइड्रेटेड रखने के लिए सिर्फ पानी से ज्यादा की जरूरत पड़ सकती है। यहीं पर इलेक्ट्रोलाइट्स की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
इलेक्ट्रोलाइट्स क्या हैं?
इलेक्ट्रोलाइट्स ऐसे खनिज हैं जो शरीर में तरल संतुलन, मांसपेशियों के संकुचन और तंत्रिका क्रिया को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इनमें सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम शामिल होते हैं। यदि आप इनका सेवन करते रहें तो इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और शारीरिक क्रिया को बनाए रखने में उसे मदद मिलती है।

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कब नहीं लें इलेक्ट्रोलाइट?
जब शरीर से तरल पदार्थ की हानि न्यूनतम होती है। यानी जब आप सोडियम या पोटेशियम की महत्वपूर्ण मात्रा नहीं खो रहे हैं। इस तरह की स्थिति में आपके शरीर को सही ढंग से कार्य करने के लिए इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थों की अलग से आवश्यकता नहीं होती है।
कब लेना चाहिए इलेक्ट्रोलाइट?
लंबे समय तक पसीना आने पर, चाहे गर्मी, व्यायाम या बीमारी के कारण हो, शरीर से काफी मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। ऐसे में इलेक्ट्रोलाइट युक्त पेय पदार्थ उपयोगी साबित होते हैं।
- गर्म, उमस भरे दिन जिनमें बाहरी गतिविधियां शामिल हों
- एक घंटे से अधिक समय तक कसरत कर रहे हों
- कोई भी ऐसी स्थिति जिसमें बहुत ज्यादा और बार-बार पसीना आता हो
- उल्टी या दस्त हो जाए आदि।
इलेक्ट्रोलाइट की कमी के शुरुआती संकेत
- मांसपेशियों में ऐंठन या फड़कन
- सिरदर्द या चक्कर आना
- थकान या सुस्ती
- मतली या भ्रम
- दिल की अनियमित धड़कन
कैसे काम करते हैं इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स?
इलेक्ट्रोलाइट पेय पदार्थों में पानी में घुले खनिज पदार्थ, मुख्य रूप से सोडियम और पोटेशियम होते हैं। ये खनिज पदार्थ आपके शरीर को केवल पानी की तुलना में अधिक प्रभावी ढंग से तरल पदार्थों को अवशोषित करने और बनाए रखने में मदद करते हैं। इसका मतलब है कि आप तेजी से हाइड्रेट होते हैं और तनाव की स्थिति में भी लंबे समय तक हाइड्रेटेड रहते हैं।