खुद से बातें करना नॉर्मल आदत है या मेंटल इलनेस? एक्सपर्ट से समझें पूरी सच्चाई
खुद से बातें करना सामान्य आदत है या मानसिक बीमारी का संकेत, इस पर मनोचिकित्सक डॉ. परमजीत सिंह ने जानकारी दी है। ...और पढ़ें

अकेले में बड़बड़ाना मेंटल हेल्थ के लिए सही या गलत? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम सभी ने कभी न कभी खुद से बातें जरूर की हैं- कभी मन ही मन, कभी धीरे-धीरे बड़बड़ाते हुए, तो कभी किसी उलझन को सुलझाते समय, लेकिन ऐसे में अक्सर यह सवाल मन में आता है कि क्या इस तरह खुद से बात करना एक नॉर्मल आदत है, या फिर यह मेंटल हेल्थ से जुड़ी किसी समस्या का इशारा है?
दिल्ली के PSRI अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. परमजीत सिंह के अनुसार, हर बार खुद से बात करना घबराने वाली बात नहीं है। आइए समझते हैं कि कब यह आदत आपके लिए फायदेमंद है और कब आपको सतर्क होने की जरूरत है।

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क्या आप भी खुद से बातें करते हैं?
एक्सपर्ट का मानना है कि कई बार खुद से बात करना दिमाग को व्यवस्थित करने, भावनाओं को समझने और तनाव को कम करने का एक बेहतरीन तरीका होता है। हम अक्सर मुश्किल फैसले लेते समय खुद को समझाते हैं या काम करते वक्त खुद को निर्देश देते हैं। इसे 'सेल्फ-टॉक' कहा जाता है।
शोध बताते हैं कि अगर आप पॉजिटिव तरीके से खुद से बातें करते हैं, तो इससे आपका:
- आत्मविश्वास बढ़ता है।
- काम में फोकस बेहतर होता है।
- अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना आसान हो जाता है।
कब यह आदत बन जाती है चिंता का विषय?
खुद से बातें करना तब तक बिल्कुल सामान्य है, जब तक आप इसका इस्तेमाल खुद को मोटिवेट करने या विचारों को सुलझाने के लिए कर रहे हैं। लेकिन, आपको यह देखना होगा कि आप किस परिस्थिति में और किस तरीके से बात कर रहे हैं।
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अगर आपको कभी ऐसा महसूस हो कि आप किसी ऐसी आवाज से बात कर रहे हैं जो असल में वहां मौजूद ही नहीं है, या फिर आपको कोई अदृश्य आवाजें सुनाई देने लगें, तो यह मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेने का एक बड़ा संकेत हो सकता है।
इन 'रेड फ्लैग्स' को न करें इग्नोर
खुद से बातें करना अपने आप में कोई 'रेड फ्लैग' या खतरे की घंटी नहीं है। कई बार यह अकेलेपन, ओवरथिंकिंग या तनाव से निपटने का सिर्फ एक तरीका होता है। असली बात यह है कि इस आदत का आपकी जिंदगी पर क्या असर पड़ रहा है। अगर यह आपके रूटीन का हिस्सा है और कोई परेशानी नहीं दे रहा, तो चिंता की कोई बात नहीं।
लेकिन, अगर इसके साथ नीचे दी गई समस्याएं भी जुड़ जाएं, तो तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए:
- अगर यह आदत आपके रिश्तों, कामकाज या मानसिक शांति को खराब करने लगे।
- आपको अत्यधिक डर, उदासी, भ्रम या घबराहट महसूस हो।
- व्यवहार, नींद और मूड में अचानक बदलाव आने लगे।
- आप लोगों से कटने लगें और सामाजिक दूरी बना लें।
मेंटल हेल्थ को कैसे रखें दुरुस्त?
सही समय पर मदद लेने से किसी भी स्थिति को बेहतर तरीके से समझा और संभाला जा सकता है। डॉ. परमजीत सिंह के अनुसार, अपनी मेंटल हेल्थ को फिट रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- तनाव को सही तरीके से मैनेज करें।
- पर्याप्त और अच्छी नींद लें।
- नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
- भरोसेमंद लोगों से बातचीत करें और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करें।
अगर आपके मन में लगातार उलझन या तनाव बना रहता है, तो खुद को अकेला महसूस करने के बजाय किसी पेशेवर की मदद लेने में बिल्कुल न हिचकिचाएं। सही समय पर लिया गया एक कदम आपकी मानसिक शांति को वापस लौटा सकता है।