Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    क्या आपका BMI आपको धोखा दे रहा है? मोटापे को मापने वाले इस फॉर्मूले पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

    Updated: Sat, 06 Jun 2026 04:00 PM (IST)

    हालिया अमेरिकी रिसर्च ने मोटापे को मापने के लिए इस्तेमाल होने वाले बीएमआई (BMI) की सटीकता पर सवाल उठाए हैं। ...और पढ़ें

    बीएमआई की सच्चाई: क्या यह आपको मोटापे के बारे में गलत जानकारी दे रहा है (Image Source: AI-Generated)

    बीएमआई की सच्चाई: क्या यह आपको मोटापे के बारे में गलत जानकारी दे रहा है (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. बीएमआई फैट और मांसपेशियों में अंतर नहीं करता

    2. नई रिसर्च में 50% 'ओवरवेट' लोग 'क्लिनिकल ओबेसिटी' पाए गए

    3. सटीक आकलन के लिए बीएमआई के साथ अन्य जांचें जरूरी

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम सभी मोटापे या वजन को मापने के लिए लंबे समय से 'बॉडी मास इंडेक्स' यानी बीएमआई (BMI) का इस्तेमाल करते आए हैं।

    व्यक्ति की लंबाई और वजन के आधार पर यह फॉर्मूला बताता है कि वह सामान्य है, उसका वजन ज्यादा है या वह मोटापे का शिकार है, लेकिन अमेरिका की एक हालिया रिसर्च ने इस चर्चित पैमाने पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीएमआई का आकलन पूरी तरह से सटीक नहीं है।

    आइए जानते हैं कि आखिर इस फॉर्मूले में क्या कमी है और नई रिसर्च क्या कहती है।

    BMI

    (Image Source: Magnific) 

    बीएमआई के आंकड़ों में क्या है सबसे बड़ी खामी?

    दरअसल, बीएमआई हमारे शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा फैट और मांसपेशियों या हड्डियों के वजन के बीच का फर्क नहीं समझ पाता है। इस तकनीकी खामी की वजह से कई बार ऐसा होता है कि बीएमआई के हिसाब से कोई इंसान एकदम 'सामान्य' दिखाई देता है, लेकिन हकीकत में उसके शरीर के अंदर खतरनाक चर्बी जमा हो सकती है।

    नई अमेरिकी रिसर्च में हुए चौंकाने वाले खुलासे

    हाल ही में अमेरिका के अंदर करीब 5,600 वयस्कों पर एक अहम स्टडी की गई। इस बार शोधकर्ताओं ने सिर्फ बीएमआई पर निर्भर रहने के बजाय, जांच में लोगों की कमर के साइज और शरीर की चर्बी को भी शामिल किया।

    इस अध्ययन के नतीजे बेहद हैरान करने वाले थे। रिसर्च में सामने आया कि जिन लोगों को बीएमआई के फॉर्मूले ने केवल 'ओवरवेट' बताया था, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत लोग असल में 'क्लिनिकल ओबेसिटी' की चपेट में थे। बीएमआई की इस चूक के कारण ये लोग बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद इलाज के लिए पहचाने नहीं जा सके।

    खबरें और भी

    'क्लिनिकल ओबेसिटी' सेहत के लिए क्यों है बड़ा खतरा?

    क्लिनिकल ओबेसिटी की स्थिति शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। इसमें शरीर की फालतू चर्बी अन्य अंगों और टिश्यू को प्रभावित करने लगती है।

    खासतौर पर पेट के हिस्से में जमा फैट शरीर में सूजन पैदा करने वाले हार्मोन और रसायन रिलीज करता है। यही एक्स्ट्रा चर्बी कई गंभीर बीमारियों की शुरुआत का कारण बन सकती है, जैसे:

    क्या बीएमआई का इस्तेमाल अब बंद कर देना चाहिए?

    जवाब है- नहीं। मोटापे की शुरुआती पहचान करने के लिए बीएमआई आज भी एक बेहद आसान और उपयोगी टूल है। यह पूरी तरह से बेअसर नहीं हुआ है।

    हालांकि, इस नई रिसर्च से यह साफ हो जाता है कि किसी भी इंसान की सेहत की पूरी और सही जानकारी के लिए केवल बीएमआई के भरोसे रहना ठीक नहीं है। मोटापे के सटीक आकलन के लिए बीएमआई के साथ-साथ अन्य मेडिकल जांचों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

    यह भी पढ़ें- नॉर्मल BMI के झांसे में न आएं! अब 'वेस्ट-टू-हाइट रेशियो' बताएगा सेहत की असली सच्चाई

    यह भी पढ़ें- मोटापा मापने का सटीक पैमाना नहीं है BMI, लैंसेट की हालिया रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा