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    बच्चों के हाथ में 2 घंटे से ज्यादा मोबाइल देना क्यों है खतरे की घंटी?

    Updated: Sun, 14 Jun 2026 10:49 AM (IST)

    क्या आपका बच्चा भी दिनभर स्मार्टफोन से चिपका रहता है? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए किसी 'अलार्म' से कम नहीं है। ...और पढ़ें

    बच्चों का स्क्रीन टाइम बन रहा है मानसिक बीमारी का जाल (Image Source: AI-Generated)

    बच्चों का स्क्रीन टाइम बन रहा है मानसिक बीमारी का जाल (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. दो घंटे से अधिक इंटरनेट उपयोग मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक

    2. 12-13 साल के बच्चे इंटरनेट के दुष्प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील

    3. ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के लिए इंटरनेट प्रतिबंध लागू किया

    द कन्वर्सेशन, मेलबर्न। आजकल हर बच्चे के हाथ में मोबाइल दिखना आम बात हो गई है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह स्क्रीन टाइम उनके दिमाग पर क्या असर डाल रहा है? पूरी दुनिया में बच्चों और किशोरों पर इंटरनेट और सोशल मीडिया के बुरे प्रभावों को लेकर एक गंभीर बहस छिड़ गई है। हाल ही में 'मेडिकल जर्नल ऑफ ऑस्ट्रेलिया' में छपी एक नई रिसर्च ने माता-पिता की इस चिंता को और भी पुख्ता कर दिया है।

    screen time effects on children

    (Image Source: AI-Generated) 

    2 घंटे से ज्यादा का इस्तेमाल है खतरनाक

    मेलबर्न में 1,195 छात्रों पर एक लंबी रिसर्च की गई, जिसमें बच्चों को 12 से 18 साल की उम्र तक ट्रैक किया गया। पारिवारिक और व्यक्तिगत कारणों को ध्यान में रखते हुए किए गए इस अध्ययन में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। जो बच्चे और किशोर दिन भर में दो घंटे से ज्यादा समय इंटरनेट मीडिया पर बिताते हैं, उनमें डिप्रेशन, एंग्जायटी, खुद को नुकसान पहुंचाने की आदत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले किशोरों में सिर्फ एक साल के अंदर ही मानसिक परेशानियां विकसित होने की आशंका अधिक थी।

    12-13 साल के बच्चे सबसे ज्यादा संवेदनशील

    अगर आपको लगता है कि सभी उम्र के बच्चों पर इसका असर एक जैसा होता है, तो ऐसा नहीं है। रिसर्च के मुताबिक, 12 से 13 साल के बच्चों पर इसका सबसे बुरा प्रभाव पड़ता है। 14 से 16 साल या 17 से 18 साल के किशोरों की तुलना में, इस कम उम्र के बच्चों में खराब मानसिक स्वास्थ्य, डिप्रेशन और आत्म-हानि का जोखिम लगभग दोगुना पाया गया।

    क्या कहते हैं आंकड़े?

    इस अध्ययन में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया का दुष्प्रभाव लड़कों के मुकाबले लड़कियों पर ज्यादा दिखाई देता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, 12 से 13 साल की 100 किशोरियों में अत्यधिक इंटरनेट इस्तेमाल के कारण लगभग 11 अतिरिक्त मामलों में गंभीर डिप्रेशन के लक्षण देखे गए।

    खबरें और भी

    यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पहले 2022 में ब्रिटेन की एक स्टडी में भी यह बात सामने आई थी कि इंटरनेट का उपयोग बढ़ने से 11-13 साल की लड़कियों और 14-15 साल के लड़कों में जीवन को लेकर संतुष्टि घटने लगती है।

    क्या है सही उम्र और दुनिया क्या कर रही है?

    विशेषज्ञ मानते हैं कि इंटरनेट मीडिया इस्तेमाल करने की कोई 'सुरक्षित उम्र' तय नहीं की जा सकती, लेकिन यह साफ है कि कम उम्र के बच्चे इसके दुष्प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसी खतरे को देखते हुए, ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट मीडिया प्रतिबंध कानून लागू किया था। अब ब्रिटेन समेत कई अन्य देश भी ऑस्ट्रेलिया की तरह बच्चों की इंटरनेट तक पहुंच सीमित करने पर विचार कर रहे हैं।

    माता-पिता के लिए कानून बना मददगार

    ऑस्ट्रेलिया में दो हजार से ज्यादा अभिभावकों पर एक सर्वे किया गया, जिसके नतीजे काफी सकारात्मक रहे:

    • 59 प्रतिशत माता-पिता ने माना कि सरकार के इस नए कानून ने उन्हें अपने बच्चों के लिए नियम तय करने में मदद की है।
    • 39 प्रतिशत अभिभावकों ने इंटरनेट मीडिया अकाउंट बनाने की सही उम्र को लेकर अपनी पुरानी सोच बदली और माना कि इसके लिए 16 साल की आयु ही सबसे उपयुक्त है।

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