कुपोषण से तो बच गए भारतीय बच्चे, लेकिन अब घेर रहा है मोटापे का यह खतरनाक जाल! स्टडी में खुलासा
जहां बच्चों में कुपोषण खत्म होना एक खुशी की खबर मानी जानी चाहिए थी, वह और भी ज्यादा चिंता का विषय बन गई है। ...और पढ़ें

डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में कुपोषण हमेशा से एक बड़ी चिंता रही है, लेकिन अब यह तस्वीर बदलती जा रही है। जहां बच्चों में कुपोषण खत्म होना एक खुशी की खबर मानी जानी चाहिए थी, वह और भी ज्यादा चिंता का विषय बन गई है। हाल ही में जारी एक रिसर्च यह दावा कर रही है कि जो बच्चे बचपन में दुबले पतले हुआ करते थे वो कुछ ही सालों में मोटापे का शिकार हो रहे हैं।
डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में यह बात सामने आई है कि ज्यादातर बच्चों का बॉडी मास इंडेक्स उनके जन्म के शुरुआती पांच सालों में हेल्दी था। लेकिन उम्र बढ़ते ही इसमें तेजी से बदलाव देखा गया। इस रिसर्च में पाया गया कि 7 साल की उम्र के करीब 26% बच्चे दुबले थे, वहीं 5.2% बच्चे मोटापे का शिकार थे। जैसे ही उनकी उम्र बढ़ी तो 9 साल तक होते होते वजन 3 गुना यानी 14.6% तक बढ़ गया। बताते चलें कि यह रिसर्च द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया में पब्लिश की गई है।
5 साल के बच्चों में कम हुआ कुपोषण
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बीते तीन सालों में कुपोषण कम हुआ है। पोषण ट्रेकर में जो आंकड़े ट्रेक किए गए हैं, उनमें करीब 63 लाख बच्चों में बौनापन और कम वजन के मामले बहुत कम देखे गए हैं। साल 2023 मई में बौनेपन के केस 38% थे जो घटकर 30% हो गए हैं।
वहीं, कम वजन वाले बच्चे साल 2023 में 18% थे, उनका आंकड़ा अब घटकर 12% हो गया है। जबकि कुपोषण के मामलों में 4% तक की यानी 2023 में 7% से 2026 में 3% की कमी देखी गई। इसे लेकर ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि भारत में पांच साल से कम उम्र के करीब 30% बच्चे बौनेपन के शिकार हैं और 17.3% बच्चे लंबाई के अनुपात में कम वजन की समस्या झेल रहे हैं।
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अनहेल्दी खाने से बढ़ रहा बच्चों में मोटापा
यह रिसर्च बताती है कि देश में बच्चों के सामने खाने से जुड़ी चुनौती नहीं है बल्कि खाने से जुड़ी गलत आदतें इसके लिए जिम्मेदार हैं। फूड्स की क्वालिटी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के साथ कम एक्सरसाइज सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।