सिर्फ आम बीमारियां ही नहीं, महिलाओं में 'ब्रेस्ट कैंसर' का भी बड़ा कारण बन रहा है मोटापा
एक नए अध्ययन के अनुसार, मोटापा स्तन कैंसर का एक प्रमुख कारण बन सकता है, क्योंकि यह रक्त में इंसुलिन जैसे ग्रोथ फैक्टर का स्तर बढ़ाता है। ...और पढ़ें

अगर आपका भी वजन है ज्यादा तो हो जाएं सतर्क (Image Source: Magnific)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। मोटापा कई बीमारियों का कारण बन रहा है। एक नए अध्ययन के अनुसार मोटापा ब्रेस्ट कैंसर का भी कारण बन सकता है। मोटापे से ग्रस्त लोगों में अक्सर रक्त में इंसुलिन जैसे ग्रोथ फैक्टर का स्तर अधिक होता है। ये हार्मोन कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने और फैलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
मोटापे के प्रारंभिक चरण के प्री-मैलिग्नेंट स्तन घावों से आक्रामक स्तन कैंसर में संक्रमण के लिए एक विशिष्ट आणविक प्रक्रिया से जुड़ा हो सकता है। जिन महिलाओं का वजन अधिक होता है, उनमें ठीक हो चुके स्तन कैंसर के वापस आने की संभावना सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक होती है।
अमेरिका के ओक्लाहोमा स्वास्थ्य परिसर के विज्ञानियों समेत शोधकर्ताओं ने कहा कि मोटे मरीजों के ट्यूमर केवल पारंपरिक आक्रामक मार्गों की बढ़ी हुई सक्रियता को नहीं दर्शाते, बल्कि इनमें एक विशिष्ट तनाव अनुकूलन फेनोटाइप भी पाया गया। मोटापे को लेकर ट्यूमर एक मौलिक रूप से भिन्न आक्रामक कार्यक्रम का पालन कर सकते हैं, जो मेटाबालिक तनाव अनुकूलन, सूजन और ट्यूमर माइक्रोएनवायरनमेंट के पुनर्निर्माण द्वारा संचालित होता है। मेटाब\लिक तनाव अनुकूलन का तात्पर्य शरीर के उन शारीरिक समायोजनों से है जो कोशिका ऊर्जा, पोषक तत्व या आक्सीजन स्तर में व्यवधानों को पार करने के लिए होते हैं।
नए पाए गए स्तन घावों में डीसीआइएस का किस्सा 25 फीसद
टीम ने कहा कि डक्टल कार्सिनोमा इन सीटू (डीसीआइएस), जिसे अक्सर स्टेप 0 कहा जाता है, सभी नए पाए गए स्तन घावों में से लगभग 25 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है और आक्रामक डक्टल कार्सिनोमा (आइडीसी) विकसित करने का जीवन भर का जोखिम बढ़ाता है। हालांकि, सभी डीसीआइएस घाव आइडीसी में विकसित नहीं होते।
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ओक्लाहोमा स्वास्थ्य परिसर के प्रसूति और स्त्री रोग, कोशिका जीवविज्ञान और पैथोलाजी विभाग में कार्यरत और सह शोधकर्ता बेथनी एन. हैनाफान ने कहा कि हमारा अध्ययन यह उजागर करता है कि डीसीआइएस से आक्रामक रोग (शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने वाली बीमारी) में संक्रमण केवल ट्यूमर कोशिकाओं द्वारा संचालित नहीं होता। इसके बजाय आक्रमण में एपिथेलियल, स्ट्रोमल, और इम्यून सेल जनसंख्याओं के बीच व्यापक सहयोग शामिल होता है, और मोटापा इन सभी घटकों को प्रभावित करता है, साथ ही उनके बीच के सिग्नलिंग इंटरएक्शन पर भी असर डालता है। मोटापा स्तन कैंसर के लिए बड़ा और बढ़ता हुआ रिस्क फैक्टर है।
डीसीआइएस एक क्लिनिकल चुनौती
शोधकर्ताओं ने कहा कि यह अज्ञात है कि मोटापा प्रारंभिक चरण के प्री-मैलिग्नेंट स्तन घावों से आक्रामक स्तन कैंसर के विकास को कैसे प्रभावित करता है। ओक्लाहोमा यूनिवर्सिटी के पैथोलाजी विभाग की मुख्य शोधकर्ता एलिजाबेथ ए. वेलबर्ग ने कहा कि डीसीआइएस में एक क्लिनिकल चुनौती यह है कि कौन से घाव आक्रामक स्तन कैंसर में विकसित होने की सबसे अधिक संभावना रखते हैं। वेलबर्ग ने कहा कि मोटे और गैर मोटे मरीजों में डीसीआइएस व आइडीसी घावों से एपिथेलियल, स्ट्रोमल और इम्यून घटकों के स्पैटियल ट्रांसक्रिप्टोमिक प्रोफाइलिंग का उपयोग करते हुए अध्ययन ने यह जांचा कि मोटापा स्तन कैंसर आक्रमण से संबंधित आणविक विशेषताओं को कैसे बदलता है।
कैंसर के बढ़ने में एसयूएलएफ2 की अहम भूमिका
उन्होंने कहा, इसके विपरीत, मोटे लोगों को एक विशिष्ट तनाव अनुकूलन फेनोटाइप द्वारा विशेषता दी गई, जो मेटाबालिक समायोजन, आक्सीडेटिव तनाव प्रतिक्रिया और सूजन सिग्नलिंग के लिए समृद्ध थी।
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