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    क्या वाकई डायबिटीज और वेट लॉस की दवाओं से कम हो सकता है कैंसर का रिस्क? स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

    Updated: Sun, 28 Jun 2026 01:32 PM (IST)

    हालिया अध्ययन से पता चला है कि डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली GLP-1 दवाएं कैंसर के खतरे को कम कर सकती हैं। ...और पढ़ें

    क्या कैंसर से बचा सकती हैं डायबिटीज और वजन घटाने वाली दवाएं? (Image Source: AI-Generated)

    क्या कैंसर से बचा सकती हैं डायबिटीज और वजन घटाने वाली दवाएं? (Image Source: AI-Generated)

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    रॉयटर्स, नई दिल्ली। आजकल डायबिटीज और वजन कम करने के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं काफी चर्चा में हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये दवाएं कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी बचाव कर सकती हैं?

    जी हां, हाल ही में हुए कई अध्ययनों में यह दावा किया गया है कि 'जीएलपी-1' नामक दवाओं का वर्ग कुछ विशेष प्रकार के कैंसर के खतरे को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। आइए इस नई रिसर्च के अहम पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।

    क्या कहती है रिसर्च?

    अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की एक हालिया बैठक में कैंसर और इन दवाओं के संबंध पर दो दर्जन से ज्यादा अलग-अलग अध्ययन पेश किए गए। इन रिपोर्ट्स के आधार पर एक बड़ी बात निकलकर सामने आई है- जो मरीज जीएलपी-1 वर्ग की दवाएं ले रहे थे, उनमें इन दवाओं का इस्तेमाल न करने वालों की तुलना में कैंसर होने और बीमारी के खतरनाक स्तर तक बढ़ने का जोखिम काफी कम पाया गया।

    ये दवाएं शरीर में कैसे करती हैं बचाव?

    हालांकि, इन अध्ययनों का मुख्य फोकस इस बात पर नहीं था कि जीएलपी-1 दवाएं कैंसर के उपचार पर सीधा असर कैसे डालती हैं, लेकिन विशेषज्ञों को इसके काम करने के तरीके को लेकर कुछ अहम सुराग जरूर मिले हैं।

    यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया की डॉ. एलिजाबेथ सुसैन मैकडोनाल्ड के शब्दों में, "क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन एक ऐसी बायोलॉजिकल प्रक्रिया है, जो कई तरह के कैंसर को बढ़ावा देने में शामिल होती है।" एक अन्य शोधकर्ता का मानना है कि ये खास दवाएं मरीजों के सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने में तीन तरह से योगदान दे सकती हैं:

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    • शरीर की सूजन को कम करके।
    • इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करके।
    • ट्यूमर पर सीधा असर डालकर।

    राहत देने वाले आंकड़े

    डॉ. मैकडोनाल्ड ने इन अध्ययनों के कुछ बेहद सकारात्मक आंकड़े भी साझा किए, जो इस प्रकार हैं:

    • स्तन कैंसर के खतरे में 35% की गिरावट: 11 हजार महिलाओं पर हुए एक विस्तृत अध्ययन में देखा गया कि जीएलपी-1 दवाएं लेने वाली महिलाओं में, इसे न लेने वाली महिलाओं के मुकाबले स्तन कैंसर का खतरा 35 प्रतिशत तक कम था।
    • कई अन्य कैंसर से भी बचाव: 12 हजार मरीजों पर किए गए एक दूसरे बड़े अध्ययन में भी यह बात पुख्ता हुई है कि इन दवाओं का सेवन फेफड़ों, स्तन, कोलोरेक्टल और लिवर के कैंसर के जोखिम को कम करने से जुड़ा हुआ है।

    दवाओं से जुड़े सामान्य साइड इफेक्ट्स

    भले ही कैंसर से बचाव के मामले में ये नतीजे बहुत उम्मीद जगाने वाले हैं, लेकिन इन जीएलपी-1 दवाओं के उपयोग से जुड़े कुछ सामान्य दुष्प्रभाव भी सामने आए हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है:

    • जी मिचलाना
    • अग्नाशय में सूजन की समस्या
    • मसल लॉस

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