'धुआं नहीं तो खतरा नहीं'... अगर आप भी पान मसाला को लेकर ऐसा सोचते हैं, तो जरूर पढ़ें डॉक्टर की बात
भारत में तंबाकू का मतलब सिर्फ सिगरेट या बीड़ी का कश लगाना नहीं है, बल्कि यहां एक बहुत बड़ी आबादी पान मसाला, गुटखा और सुपारी जैसे उत्पादों की दीवानी है ...और पढ़ें

क्या पान मसाला भी उतना ही खतरनाक है जितनी स्मोकिंग? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में तंबाकू का मतलब सिर्फ सिगरेट या बीड़ी पीना नहीं है। हमारे देश में एक बहुत बड़ी आबादी पान मसाला, गुटखा और सुपारी खाने की शौकीन है। अक्सर लोगों के बीच यह चर्चा होती है कि पान मसाला खाना स्मोकिंग करने से ज्यादा सुरक्षित है, क्योंकि इसमें सिगरेट जैसा धुआं नहीं होता, लेकिन क्या यह सच है?
आइए, 31 मई को मनाए जाने वाले World No Tobacco Day के मौके पर विस्तार से जानते हैं इस बारे में।

(Image Source: AI-Generated)
धुआं नहीं होने का मतलब 'सुरक्षित' होना नहीं
आकाश हेल्थकेयर के रेस्पिरेटरी और स्लीप मेडिसिन विभाग के एचओडी और सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. अक्षय बधुराजा इस आम धारणा को तोड़ते हैं। उनका कहना है कि लोग सोचते हैं कि धुआं नहीं है तो खतरा भी कम होगा, लेकिन यह बिल्कुल सच नहीं है।
पान मसाला मुख्य रूप से सुपारी, चूना, कत्था और कई तरह के फ्लेवर्स से तैयार किया जाता है। जब इसमें तंबाकू और निकोटीन शामिल कर दिया जाता है, तो इसकी भयंकर लत लग जाती है, जो लंबे समय में कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाती है।
स्मोकिंग vs पान मसाला: दोनों के निशाने पर अलग-अलग अंग
डॉक्टर के अनुसार, सिगरेट और पान मसाला दोनों शरीर को अलग-अलग तरीके से डैमेज करते हैं, लेकिन दोनों ही बेहद खतरनाक हैं:
- स्मोकिंग का असर: सिगरेट का धुआं सीधे तौर पर फेफड़ों, हृदय और सांस की नली पर वार करता है। इससे फेफड़ों का कैंसर, सीओपीडी, दिल की बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
- पान मसाला और गुटखे का असर: यह मुंह, जीभ, गले और पाचन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसके लगातार सेवन से ओरल कैंसर और 'ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस' जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है, जिसमें मरीज का मुंह ठीक से खुलना ही बंद हो जाता है।
सिर्फ 'सुपारी' भी नहीं है सुरक्षित
डॉक्टर बताते हैं कि पान मसाले में मौजूद 'सुपारी' को भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इसे लगातार चबाने से मुंह के अंदर के टिश्यूज में बदलाव आने लगता है और कैंसर का खतरा पैदा हो जाता है। अगर इसके साथ तंबाकू भी मिला हो, तो यह जोखिम कई गुना ज्यादा भयानक हो जाता है।
खबरें और भी
इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल न करें इग्नोर
कई शोध बताते हैं कि भारत में मुंह के कैंसर के ज्यादातर मामलों के पीछे तंबाकू और सुपारी आधारित उत्पाद ही मुख्य वजह हैं। लोग अक्सर शुरुआत में इसके संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं और बीमारी जब गंभीर रूप ले लेती है, तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। इसके कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
- मुंह के अंदर सफेद या लाल रंग के धब्बे नजर आना।
- मुंह में बार-बार छाले होना।
- कुछ भी खाने पर तेज जलन या दर्द महसूस होना।
- मुंह खोलने में परेशानी या तकलीफ होना।

(Image Source: AI-Generated)
सिर्फ मुंह नहीं, दिल के लिए भी है खतरा
पान मसाले का नुकसान सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं रहता। इसमें मौजूद निकोटीन और अन्य खतरनाक रसायन आपके ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकते हैं और हृदय पर भी बुरा असर डालते हैं। ऐसे लोग जो पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या दिल के मरीज हैं, उनके लिए यह खतरा और भी अधिक होता है।
क्या है सही रास्ता और कैसे छोड़ें यह लत?
डॉक्टरों का साफ कहना है कि स्मोकिंग और पान मसाले की सीधी तुलना करना आसान नहीं है क्योंकि दोनों अलग-अलग अंगों को निशाना बनाते हैं, लेकिन पान मसाले को एक 'सुरक्षित विकल्प' मानना आपकी बहुत बड़ी भूल हो सकती है। दोनों ही आदतें सेहत के लिए बड़ा खतरा हैं।
- निकोटीन की लत के कारण शुरुआत में इसे छोड़ना थोड़ा मुश्किल जरूर लग सकता है, लेकिन यह नामुमकिन नहीं है।
- सही काउंसलिंग, परिवार के सहयोग और डॉक्टर की सलाह से इस लत से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है।
- डॉक्टरों की सख्त हिदायत है कि मुंह में कोई भी असामान्य बदलाव दिखे तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।
सेहत के नजरिए से सबसे सुरक्षित रास्ता यही है कि चाहे स्मोकिंग हो या पान मसाला- दोनों से ही दूरी बनाकर रखें।