किस उम्र में कौन-सा टेस्ट? 20-40 के लिए डॉक्टर की पूरी हेल्थ चेकअप गाइड
डॉ. आर.एस. मिश्रा ने उम्र के अनुसार आवश्यक स्वास्थ्य जांचों पर प्रकाश डाला है। 20-40 की उम्र में ब्लड प्रेशर, बीएमआई, ग्लूकोज, लिपिड प्रोफाइल, थायरॉइड ...और पढ़ें

उम्र के अनुसार कराएं ये जरूरी हेल्थ टेस्ट (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
नियमित स्वास्थ्य जांच और वैक्सीनेशन गंभीर बीमारियों से बचाते हैं
20 की उम्र में बीएमआई, ब्लड प्रेशर, ग्लूकोज जांच जरूरी
30-40 की उम्र में कैंसर, हार्ट अटैक स्क्रीनिंग पर ध्यान दें
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रोज की भागदौड़ और घर-ऑफिस की चिंता में लोग अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में लोग कई बार शरीर में दिखने वाले गंभीर लक्षणों को आम समस्या मानकर इग्नोर कर देते हैं, जो बाद में हानिकारक साबित होता है।
इसलिए सेहतमंद रहने और समय रहते किसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए सही समय पर जांच बेहद जरूरी है। ऐसे में डॉ. आर.एस. मिश्रा (मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी, साकेत में प्रिंसिपल डायरेक्टर और इंटरनल मेडिसिन के एचओडी) से जानते हैं कुछ ऐसे टेस्ट्स के बारे में, जिन्हें 20,30 और 40 साल की उम्र में जरूर कराना चाहिए।
क्या कहते हैं डॉक्टर
डॉक्टर बताते हैं कि नियमित हेल्थ चेकअप और सही वैक्सीनेशन लंबे समय तक खुद को हेल्दी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समय पर पहचान होने से कई गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है या लक्षणों के सामने आने से पहले ही उनका पता लगाया जा सकता है। इसलिए 20, 30 और 40 साल की उम्र में जरूरी टेस्ट कराने बेहद जरूरी है।
20 की उम्र में जरूरी टेस्ट
यह सेहत के लिहाज से सबसे जरूरी समय माना जाता है। ऐसे में 20 साल की उम्र में एनुअल चेकअप में ब्लड प्रेशर, बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), कंप्लीट ब्लड काउंट, फास्टिंग ग्लूकोज और लिपिड प्रोफाइल शामिल होने चाहिए। साथ ही धूम्रपान, शराब और तनाव जैसे लाइफस्टाइल से जुड़े फैक्टर्स की जांच भी जरूरी है।
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वहीं, महिलाओं को 21 साल की आयु से सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए पैप स्मीयर टेस्ट कराना चाहिए। एडल्ट वैक्सीनेशन भी उतना ही जरूरी है। इसलिए एचपीवी वैक्सीन, टीडीएपी (टेटनस, डिप्थीरिया, पर्टुसिस) और एनुअल इन्फ्लूएंजा वैक्सीन जरूर लगवाएं।
30 की उम्र के लिए जरूरी टेस्ट
इस उम्र तक आते- आते मेटाबॉलिक रिस्क बढ़ने के साथ ही डायबिटीज, हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी समस्याओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में इस दौरान जांच और भी ज्यादा अहम हो जाती है। खासकर अगर आपके परिवार में इन समस्याओं का इतिहास रहा हो।
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थायरॉइड फंक्शन टेस्ट विशेष रूप से महिलाओं के लिए जरूरी है। मेंटल हेल्थ, नींद की गुणवत्ता और वेट मैनेजमेंट पर जोर दिया जाना चाहिए। सर्वाइकल कैंसर की जांच और ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता भी इस उम्र में जरूरी है। वहीं, वैक्सीनेशन में एनुअल इन्फ्लूएंजा, हर 10 साल में टीडीएपी बूस्टर और हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाना शामिल होना चाहिए, अगर पहले टीका नहीं लगवाया है।
40 की उम्र में कराएं ये टेस्ट
40 की उम्र तक आते- आते लॉन्ग टर्म बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में एनुअल चेकअप जांच में ब्लड शुगर (फास्टिंग और एचबीए1सी), लिपिड प्रोफाइल, लिवर और किडनी के फंक्शन की जांच और ईसीजी शामिल होनी चाहिए। पर्सनल रिस्क के आधार पर कोलोरेक्टल कैंसर की जांच कराई जा सकती है।
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महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी करानी चाहिए और पुरुष अपने डॉक्टर से प्रोस्टेट जांच के बारे में चर्चा कर सकते हैं। आंखों और दांतों की जांच भी महत्वपूर्ण है। वैक्सीनेशन में हर साल इन्फ्लूएंजा, दिशा-निर्देशों के अनुसार 40-50 वर्ष की आयु के बाद दाद (हर्पीस जोस्टर) का टीका और हाई रिस्क वाले लोगों को न्यूमोकोकल वैक्सीन (निमोनिया के लिए लगवाना चाहिए।
क्यों जरूरी है नियमित जांच?
डॉक्टर बताते हैं कि नियमित हेल्थ चेकअप और वयस्कों के लिए समय पर वैक्सीनेशन, कई गंभीर समस्याओं से बचने में मदद करता है। एक एक्टिव और जागरूक दृष्टिकोण से बीमारियों का बोझ काफी हद तक कम हो सकता है और स्वस्थ, लंबे जीवन को बढ़ावा मिल सकता है।