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दवाएं हो रहीं फेल, आम इन्फेक्शन भी बन रहा जानलेवा! ICMR की 1.6 लाख मरीजों पर हुई स्टडी ने बढ़ाई टेंशन

Published: Thu, 03 Sep 2026 08:38 AM (IST)

आईसीएमआर की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक गंभीर समस्या बन गई है, जिससे मरीजों की मृत्यु दर बढ़ रही है।

एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस के कारण मृत्यु का खतरा (Picture Courtesy: Freepik)

एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस के कारण मृत्यु का खतरा (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की एक नई रिपोर्ट बहुत गंभीर समस्या की ओर इशारा कर रही है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, जो बैक्टीरिया सामान्य दवाओं या एंटीबायोटिक्स से नहीं मरते, उनसे मरीज की जान जाने का खतरा ज्यादा रहता है। ये रिपोर्ट द लांसेट रीजनल हेल्थ- साउथ-ईस्ट एशिया में पब्लिश हुई है, जिसमें देश के 20 बड़े अस्पतालों के आंकड़े शामिल हैं। 

1.6 लाख मरीजों पर स्टडी

इस रिपोर्ट में अप्रैल 2022 से 2025 के बीच अस्पतालों में भर्ती हुए लगभग 1.6 लाख मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें से 26,213 मरीज ई.कोली जैसे चार ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया से संक्रमित थे। लेकिन चिंता की बात ये है कि इनमें से 61.1% इन्फेक्शन कार्बापेनम रेजिस्टेंट थे।

आपको बता दें कि कार्बापेनम उन एंटीबायोटिक्स को कहा जाता है, जिन्हें कुछ समय पहले तक बहुत गंभीर संक्रमण के इलाज में आखिरी विकल्प की तरह माना जाता था, लेकिन अब इनका इस्तेमाल इतना बढ़ चुका है कि बैक्टीरिया इनके खिलाफ भी रेसिस्टेंट हो रहे हैं। 

रेजिस्टेंट इन्फेक्शन से ज्यादा मौतें

रिपोर्ट में पाया गया कि जो मरीज सामान्य बैक्टीरिया की तुलना में रेसिस्टेंट बैक्टीरिया से इन्फेक्टेड थे, उनमें मृत्यु दर भी काफी ज्यादा थी। E. coli बैक्टीरिया प्रतिरोध में मृत्यु दर 24.4% थी, जबकि सामान्य बैक्टीरिया से मृत्यु दर 17.3% थी। इसी तरह K. pneumoniae रेसिस्टेंट बैक्टीरिया में मृत्यु दर 31.2% रही, जबकि सामान्य इन्फेक्शन में यह 23.5% थी। 

सिर्फ नई दवा बनाना काफी नहीं

ICMR की सीनियर वैज्ञानिक और इस स्टडी की को-ऑथर डॉ. कामिनी वालिया का कहना है कि एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) अब कोई भविष्य का खतरा नहीं है। यह वर्तमान की समस्या है, जो अब भारतीयों की जान ले रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसका इलाज सिर्फ नई एंटीबायोटिक्स बनाना नहीं है, बल्कि समय पर जांच, इन्फेक्शन से बचाव और दवाओं का सही इस्तेमाल करना भी है। 

इलाज का खर्च दोगुना

एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस इन्फेक्शन के इलाज में एंटीबायोटिक्स का खर्च भी लगभग दोगुना ज्यादा हो गया है। ई. कोली रेसिस्टेंट बैक्टीरिया के इन्फेक्शन के इलाज का खर्च लगभग 420 डॉलर रहा, जबकि सामान्य में यह खर्च 211 डॉलर था। इसी तरह दूसरे रेसिस्टेंट बैक्टीरिया के इलाज का खर्च भी सामान्य बैक्टीरियल इन्फेक्शन की तुलना में ज्यादा रहा। ऐसा इसलिए, क्योंकि रेसिस्टेंट बैक्टीरिया के इलाज में कई एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए खर्च भी ज्यादा आता है। 

लंबे समय तक इलाज

समस्या सिर्फ ज्यादा खर्च तक सीमित नहीं है। AMR मरीजों को अस्पताल में ज्यादा दिन तक रुकना पड़ता है। बैक्टीरिया की पहचान और उनकी रेसिस्टेंट क्षमता का पता लगाने में कल्चर विकसित करने के कारण कुछ दिनों का समय लगता है। इसलिए सामान्य इन्फेक्शन की तुलना में ज्यादा लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है और इलाज भी लंबा चलता है। 


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