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    सावधान! धीरे-धीरे जान ले रही है यह जिद्दी बीमारी, 20 सालों में 90% बढ़ गए मरीज; पढ़ें पूरी रिपोर्ट

    Updated: Fri, 15 May 2026 08:11 AM (IST)

    दुनिया में 2020 तक 1.71 अरब वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित थे, जिसमें निम्न और मध्य आय वाले देशों में अनियंत्रित मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। ...और पढ़ें

    दुनिया में एक तिहाई आबादी 2020 में हाइपरटेंशन से ग्रस्त (Image Source: AI-Generated)

    दुनिया में एक तिहाई आबादी 2020 में हाइपरटेंशन से ग्रस्त (Image Source: AI-Generated) 

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    प्रेट्र, नई दिल्ली। दुनिया में एक बड़ी आबादी उच्च रक्तचाप हाइपरटेंशन की चपेट में है। 2020 में लगभग 33 प्रतिशत या 1.71 अरब विश्व के वयस्कों को हाइपरटेंशन था, जिसमें उच्च आय वाले देशों में 40 करोड़ और निम्न एवं मध्य आय वाले देशों में 1.32 अरब लोग शामिल हैं, एक नए विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है।

    इनमें से लगभग 20 प्रतिशत लोगों का हाइपरटेंशन 2020 में नियंत्रित था, जबकि उच्च आय वाले देशों में इस स्थिति को नियंत्रित करने की दर निम्न और मध्य आय वाले देशों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक थी, 40.2 प्रतिशत बनाम 13.6 प्रतिशत।

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    (Image Source: AI-Generated) 

    जिद्दी और घातक मौन महामारी

    अमेरिका के टुलाने विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि हाइपरटेंशन एक जिद्दी और घातक मौन महामारी है, जिसका बोझ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों पर पिछले 20 वर्षों में बढ़ा है, विशेष रूप से उन देशों में जो इसे संबोधित करने के लिए सबसे कम सक्षम हैं। टीम ने 119 देशों में 60 लाख से अधिक लोगों को शामिल करते हुए 287 जनसंख्या आधारित अध्ययनों से डाटा एकत्र किया और हाइपरटेंशन की प्रचलन, जागरूकता, उपचार और नियंत्रण में बदलावों का अध्ययन किया। भारत में उच्च रक्तचाप की व्यापकता काफी अधिक है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2019-2020) के अनुसार, भारत में 24% पुरुषों और 21% महिलाओं में हाइपरटेंशन पाया गया था।

    वैश्विक हाइपरटेंशन प्रवृत्तियों का विश्लेषण

    उन्होंने कहा कि 2000 में 70 प्रतिशत लोग जिनका हाइपरटेंशन नियंत्रित नहीं था, वे निम्न और मध्य आय वाले देशों में रहते थे और 2020 तक यह हिस्सा बढ़कर 83 प्रतिशत हो गया। 2000 से 2020 के बीच उच्च आय वाले देशों में जागरूकता 57.7 प्रतिशत से बढ़कर 69.2 प्रतिशत, उपचार 42.9 प्रतिशत से बढ़कर 66.3 प्रतिशत और नियंत्रण 16.4 प्रतिशत से बढ़कर 40.2 प्रतिशत हो गया। निम्न और मध्य आय वाले देशों में अधिक मामूली वृद्धि देखी गई। इस मामले में जागरूकता 29.1 प्रतिशत से 46.1 प्रतिशत, उपचार 20.7 प्रतिशत से 30.8 प्रतिशत, और नियंत्रण 6.4 प्रतिशत से 13.6 प्रतिशत तक हुआ। टीम ने कहा कि यह अध्ययन अब तक के वैश्विक उच्च रक्तचाप प्रवृत्तियों का सबसे व्यापक विश्लेषण है।

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    निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हाइपरटेंशन में ज्यादा वृद्धि

    अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलाजी के जर्नल में प्रकाशित निष्कर्षों से पता चलता है कि 2000-2020 के दौरान उच्च आय वाले देशों में हाइपरटेंशन के प्रचलन में थोड़ी कमी आई है, लेकिन निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हाइपरटेंशन वाले लोगों की लगभग 90 प्रतिशत वृद्धि हुई है। अध्ययन में पाया गया कि लैटिन अमेरिका, कैरेबियन और उप सहारा अफ्रीका में 2020 तक हाइपरटेंशन का सबसे अधिक प्रचलन पाया गया, जबकि हाइपरटेंशन से ग्रस्त लोगों की सबसे बड़ी संख्या पूर्वी एशिया और प्रशांत में थी, इसके बाद दक्षिण एशिया का स्थान था। शोधकर्ताओं ने पाया कि हाइपरटेंशन की प्रचलन में समय के साथ असमानता बढ़ी है।

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