दोपहर की एक छोटी-सी झपकी भी है रात भर की नींद जितनी असरदार, पढ़ें क्या कहती है नई स्टडी
दोपहर की छोटी झपकी को अक्सर समय की बर्बादी माना जाता है, लेकिन एक नई स्टडी बताती है कि यह दिमाग के लिए 'रीसेट बटन' का काम करती है। जर्मनी और स्विट्जरल ...और पढ़ें

रात भर के आराम के बराबर दोपहर की छोटी-सी नींद (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप दोपहर में सोने को 'वक्त की बर्बादी' मानते हैं या काम के बीच में नींद की झपकी लेने पर खुद को गिल्टी फील करते हैं? अगर हां, तो यह आर्टिकल खास आपके लिए है। दरअसल, विज्ञान ने साबित कर दिया है कि दोपहर की एक छोटी-सी नींद सिर्फ आराम नहीं, बल्कि आपके दिमाग के लिए 'रीसेट बटन' दबाने जैसा है (Power Nap Benefits)।
जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रीबर्ग और स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ जिनेवा के शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन में पाया है कि दोपहर की एक झपकी भी आपके दिमाग को उतना ही तरोताजा कर सकती है, जितना कि रात की लंबी नींद। यह आपके दिमाग को नई यादें बनाने और सीखने के लिए फिर से तैयार कर देती है।

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दिन भर में कैसे 'भर' जाता है दिमाग?
शोधकर्ताओं ने समझाया कि जब हम दिन भर जागते हैं, तो हमारा दिमाग लगातार काम करता रहता है। नई जानकारी, विचार और अनुभव हमारे दिमाग की नसों के बीच के संपर्क को मजबूत करते हैं, जिन्हें 'साइनैप्स' कहा जाता है।
हालांकि, ये मजबूत संपर्क सीखने के लिए जरूरी हैं, लेकिन एक सीमा के बाद ये 'संतृप्त' हो जाते हैं। इसका मतलब है कि दिमाग इतना भर जाता है कि वह नई जानकारी को सीखने या याद रखने की क्षमता खोने लगता है। ठीक यहीं पर नींद अपना काम करती है। नींद इस एक्स्ट्रा एक्टिविटी को कंट्रोल करती है और बिना किसी महत्वपूर्ण याद को मिटाए, दिमाग को फिर से संतुलित कर देती है।
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यादों के लिए जगह बनाना
स्टडी के लीडर, डॉ. क्रिस्टोफ निसेन (मेडिकल सेंटर-यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रीबर्ग) ने इसे "साइनैप्टिक रीसेट" का नाम दिया है। डॉ. निसेन ने बताया, "हमारा अध्ययन दिखाता है कि यह 'रीसेट' केवल एक दोपहर की झपकी से भी हो सकता है। यह दिमाग में नई यादें बनाने के लिए जगह खाली कर देता है। हमारे नतीजे बताते हैं कि सोने की छोटी अवधि भी दिमाग की नई जानकारी को स्टोर करने की क्षमता को बढ़ा देती है।"

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कैसे किया गया अध्ययन?
इस अध्ययन में 20 स्वस्थ युवाओं को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने इन युवाओं को दो ग्रुप में बांटा:
- पहला ग्रुप जिसने दोपहर में औसतन 45 मिनट का नैप लिया
- दूसरा ग्रुप जो दोपहर में पूरी तरह जागता रहा
वैज्ञानिकों ने 'ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन' और 'EEG' जैसी आधुनिक और सुरक्षित तकनीकों का इस्तेमाल किया। इससे उन्होंने यह जांचा कि दिमाग के कनेक्शन्स कितने मजबूत या लचीले हैं।

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नींद ने बढ़ाया सीखने का हुनर
'न्यूरोइमेज' जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के नतीजे चौंकाने वाले थे:
- दिमाग की मरहम-पट्टी: जिन लोगों ने झपकी ली, उनके दिमाग में साइनैप्टिक कनेक्शन की अत्यधिक मजबूती कम हो गई थी। शोधकर्ताओं ने इसे नींद का 'रेस्टोरेटिव इफेक्ट' बताया।
- सीखने की बेहतर क्षमता: झपकी लेने वालों के दिमाग में नए कनेक्शन बनाने की क्षमता उन लोगों की तुलना में काफी बेहतर थी जो जागते रहे थे। इसका मतलब है कि उनका दिमाग नई चीजें सीखने के लिए ज्यादा तैयार था।
यह अध्ययन साफ तौर पर बताता है कि नींद, चाहे वह छोटी ही क्यों न हो, हमारे दिमाग की प्लास्टिसिटी को बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है।