आंतों में इन दो तरह की गांठ से 5 गुना तक बढ़ जाता है कैंसर का खतरा, नई रिसर्च में डराने वाला खुलासा
नई स्टडी से पता चला है कि आंतों में एडेनोमा और सेरेटेड पॉलीप्स दोनों की एक साथ मौजूदगी से कैंसर का खतरा पांच गुना बढ़ जाता है। ...और पढ़ें

आंतों में होने वाली यह वृद्धि 5 गुना तक बढ़ा सकती है कैंसर का खतरा (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एएनआई, वॉशिंगटन। कैंसर एक बेहद जटिल बीमारी है और अब तक इसका कोई एक विशिष्ट कारण सामने नहीं आ पाया है। हालांकि, हाल ही में हुए एक शोध ने आंत के कैंसर (जिसे कोलोरेक्टल कैंसर भी कहा जाता है) के एक बड़े खतरे को उजागर किया है। हमारे शरीर की आंतों की भीतरी परत पर कभी-कभी टिश्यूज की असामान्य वृद्धि होने लगती है, जिसे 'पॉलीप्स' कहते हैं। वैसे तो शुरुआत में ये वृद्धि हानिरहित और सौम्य होती है, लेकिन अगर इन पर ध्यान न दिया जाए, तो ये धीरे-धीरे कैंसर का रूप ले सकती हैं।

(Image Source: AI-Generated)
दो तरह के पॉलीप्स का संयोजन है खतरे की घंटी
आंतों में पनपने वाले पॉलीप्स कई तरह के हो सकते हैं, लेकिन इनमें से दो विशेष प्रकार ऐसे हैं जो समय के साथ कैंसर में बदलने की क्षमता रखते हैं:
- एडेनोमा: यह एक बहुत ही सामान्य और धीमी गति से बढ़ने वाला ट्यूमर है। यह शरीर के ग्रंथियों वाले 'एपिथेलियल' टिश्यूज से पैदा होता है।
- सेरेटेड पॉलीप्स: यह आंत या मलाशय की भीतरी परत पर होने वाली एक असामान्य वृद्धि है। इसके किनारे आरी के दांतों की तरह दिखाई देते हैं।
अध्ययन से यह बात सामने आई है कि सेरेटेड पॉलीप्स, एडेनोमा की तुलना में कहीं अधिक तेजी से कैंसर में विकसित हो सकते हैं।
क्या कहती है नई रिसर्च?
'क्लीनिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी' जर्नल में प्रकाशित, फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी और फ्लिंडर्स मेडिकल सेंटर के एक महत्वपूर्ण अध्ययन में 8,400 से ज्यादा कोलोनोस्कोपी रिकॉर्ड्स की गहन जांच की गई।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों की आंतों में 'एडेनोमा' और 'सेरेटेड पॉलीप्स' दोनों एक साथ मौजूद थे, उनमें एडवांस कैंसर विकसित होने का जोखिम बहुत अधिक था। यह जोखिम केवल एक प्रकार के पॉलीप वाले व्यक्ति की तुलना में पांच गुना अधिक पाया गया। चिंता की बात यह है कि सेरेटेड पॉलीप्स वाले लगभग आधे मरीजों की जांच में एडेनोमा भी पाया गया, जो इस उच्च जोखिम वाले संयोजन को अपेक्षा से कहीं अधिक आम बनाता है।
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बचाव ही है सबसे सही इलाज
उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर में पॉलीप्स होने की संभावना भी आम हो जाती है। असल चुनौती इन पॉलीप्स को कैंसर बनने से पहले पहचानना और उन्हें हटाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी को प्रबंधित करने और इससे बचने का सबसे कारगर तरीका नियमित कोलोनोस्कोपी कराना है। यह दोनों प्रकार के पॉलीप्स के बीच के अंतर को समझने और सही समय पर इलाज शुरू करने में मदद करता है।
किसे है सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत?
- जिन लोगों की उम्र 45 वर्ष से अधिक हो चुकी है।
- जिनके परिवार में पहले किसी को आंत की बीमारी या कैंसर का इतिहास रहा हो।
ऐसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहना चाहिए और कैंसर स्क्रीनिंग पर विशेष ध्यान देना चाहिए। समय पर की गई जांच आपकी जान बचा सकती है।