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    बचपन का मोटापा बन सकता है भविष्य में कैंसर की वजह! एक्सपर्ट ने दी गंभीर चेतावनी

    Updated: Fri, 06 Mar 2026 10:13 AM (IST)

    डॉक्टर का कहना है कि बचपन का मोटापा भविष्य में कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। ...और पढ़ें

    बचपन का मोटापा भविष्य में 30% तक बढ़ा सकता है कैंसर का जोखिम (Image Source: AI-Generated)

    बचपन का मोटापा भविष्य में 30% तक बढ़ा सकता है कैंसर का जोखिम (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में बच्चे मोबाइल फोन और ओटीटी प्लेटफॉर्म से चिपके रहते हैं और घर के अंदर ही समय बिताना पसंद करते हैं। इससे न सिर्फ उनकी आंखों, आईक्यू और सोशल स्क्रिल्स पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि दबे-पांव एक बहुत बड़ा और खामोश खतरा भी पनप रहा है।

    मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, साकेत की डॉ. स्वाति भायना (कंसल्टेंट - पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट) के अनुसार, बचपन का मोटापा बड़े होने पर हार्मोन्स से जुड़े कैंसर का कारण बन सकता है। शोध बताते हैं कि बचपन में वजन ज्यादा होने से भविष्य में कैंसर विकसित होने का जोखिम 9% से 30% तक बढ़ जाता है।

    Childhood obesity cancer risk

    (Image Source: AI-Generated) 

    मोटापा कैसे बन जाता है कैंसर की 'उपजाऊ मिट्टी'?

    यह सिर्फ इतनी-सी बात नहीं है कि एक मोटा बच्चा आगे चलकर एक मोटा वयस्क बन जाएगा। दरअसल, एक ओवर-वेट बच्चे के शरीर का जैविक वातावरण कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने के लिए एक 'उपजाऊ मिट्टी' की तरह काम करता है। हम अक्सर कैंसर के लिए माइक्रोवेव, प्लास्टिक या पॉलिश किए गए भोजन को दोष देते हैं, लेकिन शरीर को स्वस्थ और फिट रखना ही इस खतरे को खत्म करने का एकमात्र तरीका है।

    मोटापे के कारण शरीर में लगातार हल्की सूजन बनी रहती है, एस्ट्रोजन हार्मोन की अधिकता हो जाती है, डीएनए को नुकसान पहुंचता है और हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है। यही सब आगे चलकर कैंसर का कारण बनते हैं।

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    बचपन का मोटापा केवल कैंसर ही नहीं, बल्कि बड़े होने पर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्लीप एपनिया, अस्थमा और हड्डियों व जोड़ों की समस्याओं को भी जन्म देता है। जहां तक कैंसर का सवाल है, इसकी लिस्ट काफी लंबी है। मोटापे के कारण ल्यूकेमिया, हॉजकिन , ब्रेस्ट, इसोफेजियल, पेट, कोलोरेक्टल, एंडोमेट्रियल, ओवेरियन, थायरॉयड और पैंक्रियाटिक कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

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    छोटी बच्चियों में मोटापे के कारण प्यूबर्टी या तो बहुत जल्दी आ जाती है या बहुत देर से। यह स्थिति आगे चलकर स्तन और प्रजनन अंगों के कैंसर का एक बड़ा जोखिम कारक है। इसके अलावा, अगर कोई बच्चा ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) जैसी बीमारी से लड़ रहा है और उसे मोटापा भी है, तो उसके लिए कीमोथेरेपी पूरी करना बहुत मुश्किल हो जाता है। मोटापा कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण भी बनता है।

    Obesity related cancers

    (Image Source: AI-Generated) 

    'नॉर्मल वेट ओबेसिटी' का खतरा

    वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे का बीएमआई अपने आप में कैंसर का एक बड़ा जोखिम कारक है- भले ही उसकी ब्लड रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल, शुगर या ब्लड प्रेशर सामान्य क्यों न हो। आजकल अध्ययन 'नॉर्मल वेट ओबेसिटी' पर भी हो रहे हैं, जिसका मतलब है कि बच्चे का वजन और बीएमआई तो सामान्य है, लेकिन शरीर में फैट का अनुपात ज्यादा है। इसे भी बचपन के कैंसर से जोड़कर देखा जा रहा है।

    माता-पिता क्या करें?

    भले ही बच्चा एकदम सही वजन तक न पहुंच पाए, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से कैंसर का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है:

    • 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए: यह सुनिश्चित करें कि वे शारीरिक रूप से सक्रिय खेल खेलें।
    • 6 से 18 साल के बच्चों के लिए: हर दिन 1 से 2 घंटे की कड़ी शारीरिक गतिविधि बहुत जरूरी है। इसमें साइकिल चलाना, खेलकूद, दौड़ना, कूदना और लटकना शामिल होना चाहिए।
    • खान-पान में बदलाव: ऑनलाइन खाना ऑर्डर करने के बजाय पूरे परिवार के साथ घर का बना खाना खाने पर जोर दें। बच्चों को मौसमी फल और सब्जियां खिलाएं तथा कोल्ड ड्रिंक्स से दूर रखें।
    • स्क्रीन टाइम और नींद: बच्चों का मोबाइल और टीवी का समय कम करके उन्हें शारीरिक गतिविधियों की ओर मोड़ें और यह सुनिश्चित करें कि वे पर्याप्त और अच्छी नींद लें।

    याद रखें, बच्चों को मोटापे से बचाना सिर्फ उन्हें अच्छा दिखाने या फुर्तीला बनाने के लिए नहीं है, बल्कि यह भविष्य में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव का एक बहुत ही बुनियादी कदम है।

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