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    हल्के में न लें बच्चों का बढ़ता वजन? नई रिसर्च में सामने आया हार्ट और डायबिटीज का सीधा कनेक्शन

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 03:08 PM (IST)

    बच्चे का बढ़ता वजन सिर्फ खानपान की नतीजा नहीं, बल्कि उनमें होने वाले बदलावों के पीछे उनके जीन्स का बड़ा हाथ होता है। ...और पढ़ें

    बच्चे का बढ़ता वजन कैसे तय करती है भविष्य में डायबिटीज और हार्ट डिजीज का रिस्क?  (Picture Credit- AI Generated)

    बच्चे का बढ़ता वजन कैसे तय करती है भविष्य में डायबिटीज और हार्ट डिजीज का रिस्क?  (Picture Credit- AI Generated)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर माता-पिता की नजर अपने बच्चे की लंबाई, वजन और अच्छी सेहत पर रहती है। लगभग हर घर में ये सवाल तो जरूर होता है कि इतना दुबला क्यों है? या इतनी जल्दी मोटा कैसे हो गया? अगर आपका बच्चा अपनी उम्र के मुताबिक असामान्य तरीके से बढ़ रहा है, तो जरूरी नहीं कि यह सिर्फ खानपान या लाइफस्टाइल की वजह से हो।

    जर्नल नेचर कॉम्युनिकेशन में प्रकाशित एक शोध में सामने आया है कि बच्चों के वजन और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) में होने वाले बदलावों का बड़ा हिस्सा उनके जीन से जुड़ा हो सकता है। यानी बढ़ता वजन सिर्फ चॉकलेट या फास्ट फूड का नतीजा नहीं होता।

    बच्चे की ग्रोथ जीन पर आधारित

    ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड ने एक स्टडी में बताया है कि बच्चे की 10 साल की उम्र का वजन और एक से 18 साल तक उनके बढ़ने की रफ्तार भविष्य की बीमारियों का संकेत दे सकती है। अगर बचपन की ग्रोथ असामान्य है, तो आगे चलकर डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हर बच्चे की ग्रोथ उसके जेनेटिक फैक्ट्स पर निर्भर करती है, इसलिए सिर्फ बाहरी दिखावट के आधार पर सेहत का अंदाजा लगाना गलत हो सकता है।

    इस रिसर्च में लगभग 6,300 बच्चों और एडल्ट्स के करीब 66,000 BMI मेजरमेंट की जांच की गई। वैज्ञानिकों ने बच्चों की ग्रोथ को सिर्फ एक उम्र में नहीं, बल्कि समय के साथ लगातार ट्रैक किया। इससे उनको समझने में मदद मिली कि बच्चे के जेनेटिक्स कैसे उनकी ग्रोथ पर असर डालते हैं।

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     (Picture Credit- AI Generated)

    अध्ययन में यह भी सामने आया कि छोटे बच्चे के शरीर के आकार को प्रभावित करने वाले जेनेटिक फैक्टर, टीनएजर में असर डालने वाले फैक्टर से अलग हो सकते हैं। यानी छोटे बच्चों में शरीर के आकार का अंतर जरूरी नहीं कि आगे चलकर मोटापे का जोखिम बन जाए।

    वैज्ञानिकों ने बताई असली चुनौती

    वैज्ञानिकों का कहना है कि अब असली चुनौती यह पता लगाना है कि किस उम्र में बच्चों की सेहत पर ध्यान देकर उन्हें भविष्य में मोटापे और गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। यह डेटा यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल की स्टडी चिल्ड्रन्स ऑफ द 90s पर आधारित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह डेटा एक खजाने जैसा है, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि पर्यावरण और हमारे जीन्स मिलकर इंसान के विकास और स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करते हैं।

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