क्या आपको भी पीरियड्स में क्लॉट्स आते हैं? एक्सपर्ट ने समझाया कब नॉर्मल हैं और कब खतरे की घंटी
हर महिला की पीरियड्स की कहानी अलग होती है। किसी के लिए यह सामान्य दिनों जैसा होता है, तो किसी को हैवी फ्लो का सामना करना पड़ता है। थकान, ऐंठन, मूड स्वि ...और पढ़ें

पीरियड्स में हैवी फ्लो और क्लॉट्स: कहीं आप इसे नजरअंदाज तो नहीं कर रहीं? (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर महिला के लिए पीरियड्स का अनुभव अलग-अलग होता है। किसी को कम फ्लो होता है, तो किसी को ज्यादा। इस दौरान महिलाओं को कई शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि ऐंठन, मूड स्विंग्स, थकान और क्रेविंग्स। ये लक्षण हर महीने और हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं।
ऐसे में, आमतौर पर डॉक्टर आराम, पर्याप्त पानी पीने और हल्के व्यायाम की सलाह देते हैं, लेकिन एक ऐसा संकेत है जिसे कई महिलाएं देखती तो हैं, लेकिन अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं। जी हां, हम ब्लड क्लॉट्स यानी खून के थक्कों की बात कर रहे हैं।
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शरीर दे रहा होता है संकेत
अक्सर महिलाओं को लगता है कि पीरियड्स के दौरान क्लॉट्स का आना नॉर्मल बात है, लेकिन ये रैंडम नहीं होते। यह आपके शरीर का आपसे बात करने का एक तरीका हो सकता है कि किसी चीज पर ध्यान देने की जरूरत है। न्यूट्रिशनिस्ट राशि चौधरी ने अपने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में इसे विस्तार से समझाया है। उनका कहना है, "आपका पीरियड एक डेटा है और क्लॉट्स एक संकेत हैं।"
एक्सपर्ट के अनुसार, जिसे हम सिर्फ जमा हुआ खून समझते हैं, वह असल में केवल खून नहीं होता। वे आपके गर्भाशय की परत (Uterine Lining) के टुकड़े होते हैं जो शरीर से बाहर निकल रहे होते हैं।
समझिए हार्मोन्स का विज्ञान
राशि चौधरी बताती हैं कि एस्ट्रोजन एक ऐसा हार्मोन है जो टिश्यू बनाता है। हर महीने, यह हार्मोन आपके गर्भाशय की परत को तैयार करने में मदद करता है ताकि शरीर संभावित गर्भावस्था के लिए तैयार हो सके। वहीं, प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का काम एस्ट्रोजन को संतुलित करना और उस परत को स्थिर रखना होता है।
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समस्या तब आती है जब एस्ट्रोजन की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है। इसके कारण गर्भाशय की परत जरूरत से ज्यादा मोटी हो जाती है। जब पीरियड्स शुरू करने के लिए एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिरता है, तो शरीर को इस मोटी परत को बाहर निकालना पड़ता है। यह अतिरिक्त परत आसानी से नहीं निकल पाती और टुकड़ों में टूट जाती है। यही टुकड़े हमें क्लॉट्स या थक्कों के रूप में दिखाई देते हैं।
किन महिलाओं में यह ज्यादा देखा जाता है?
यह समस्या 20 से 35 वर्ष की महिलाओं में बहुत आम है। एक्सपर्ट के मुताबिक, क्लॉट्स आने के साथ-साथ अक्सर नीचे दिए लक्षण भी दिखाई देते हैं:
- पीरियड्स में दर्द होना
- बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना
- पेट फूलना
- पीएमएस
- मूड स्विंग्स
इसलिए, अगर आप भी पीरियड्स के दौरान क्लॉट्स देखती हैं, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय यह समझने की कोशिश करें कि आपका शरीर आपको क्या संकेत दे रहा है।