क्या आप भी अक्सर थका हुआ महसूस करते हैं? वैज्ञानिकों ने खोजा हमेशा एनर्जेटिक रहने का फॉर्मूला
एक नई रिसर्च से पता चला है कि जब लोगों का मूड अच्छा होता है, तो वे ज्यादा एक्टिव रहते हैं। ...और पढ़ें

अच्छे मूड और फिजिकल एक्टिविटी का है गहरा नाता (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। एक अंतरराष्ट्रीय शोध अध्ययन ने इस बात को साबित किया है कि लोग तब शारीरिक रूप से अधिक सक्रिय होते हैं, जब वे बेहतर महसूस कर रहे होते हैं यानी मूड अच्छा होता है। विश्वभर के 67 शोध समूहों के तीन लाख से अधिक वास्तविक समय की मूड रिपोर्ट का डाटा विश्लेषण यह भी बताता है कि अधिकांश लोगों के लिए दैनिक गतिविधियों के साथ मूड में सुधार होता है। यह निष्कर्ष नेचर ह्यूमैन बिहेवियर में प्रकाशित किया गया है।
शोध में जर्मनी की रुहर यूनिवर्सिटी बोचुम और यूरोप तथा अमेरिका के अन्य संस्थानों के विज्ञानियों ने स्मार्टफोन और पहनने योग्य उपकरणों के माध्यम से आठ हजार से अधिक प्रतिभागियों से एकत्रित डेटा का अध्ययन किया। इन उपकरणों ने शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद की कि लोग अपनी दैनिक दिनचर्या के दौरान कैसे महसूस करते हैं और चलते-फिरते हैं।

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बस कुछ कदम चलना बदल देगा आपकी पूरी एनर्जी
शोध अध्ययन के लेखकों के मुताबिक, व्यक्तियों के भीतर, शारीरिक गतिविधि (फिजीकल एक्टिविटी-पीए) ऊर्जा के उत्तेजना, सकारात्मक भावनात्मक स्थितियों और वैलेंस के साथ सकारात्मक संबंध दर्शाती है, जबकि शांति के साथ नकारात्मक संबंध है । व्यावहारिक प्रभाव के आकार अन्य दैनिक जीवन की गतिविधियों के समान होते हैं, जिसमें ऊर्जा के उत्तेजना का पीए के साथ सबसे मजबूत संबंध होता है।
अधिकांश व्यक्तियों के मामले में यह पाया गया कि दैनिक शारीरिक गतिविधियों के बाद मूड में सुधार होता है और इसके साथ ही यह भी सच है कि लोग तब भी अधिक चलने के लिए प्रवृत्त होते हैं, जब वे पहले से सकारात्मक महसूस कर रहे होते हैं। ऊर्जा स्तरों में सबसे मजबूत संबंध दिखा, जिसमें 95 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों ने गतिविधियों के दौरान ऊर्जा में वृद्धि की होने की बात बताई। अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन व्यक्तियों की प्रारंभिक स्वास्थ्यपरकता कम थी, उन्हें शारीरिक गतिविधि से सबसे अधिक लाभ मिला।
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डेली लाइफ की छोटी एक्टिविटीज भी मूड को रखती हैं फ्रेश
अध्ययन की सह-लेखिका अमेरिका की लुइजियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के पेनिंगटन बायोमेडिकल रिसर्च सेंटर की अमांडा स्टायानो ने बताया है कि यह अध्ययन वास्तविक दुनिया में स्वास्थ्य व्यवहारों को समझने के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। दुनियाभर की विविध जनसंख्याओं से डाटा को शामिल करके हम यह स्पष्ट चित्र प्राप्त कर रहे हैं कि कैसे दैनिक गतिविधियों की छोटी मात्रा भी लोगों के मूड पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
अध्ययन से प्राप्त साक्ष्य शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्यपरकता के बीच एक मजबूत संबंध की पुष्टि करते हैं, जो पहले नियंत्रित प्रयोगशाला सेटिंग्स और क्रॉस-सेक्शनल अध्ययनों में दिखाया गया था। यह अध्ययन प्राकृतिक, दैनिक परिस्थितियों में शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्यपरकता की जांच करता है, जो स्मार्टफोन और पहनने योग्य उपकरणों के माध्यम से संभव हुआ और यह समझने में मदद करता है कि गतिविधि समय के साथ व्यक्तियों को कैसे प्रभावित करती है। आगे चलकर इससे यह समझने में भी मदद मिलेगी कि कुछ व्यक्तियों का व्यायाम के प्रति प्रतिक्रिया क्यों भिन्न होती है।